आप जालंधर के एक छोटे कारोबारी हैं। आपसे एक जरूरी रिटर्न समय पर जमा नहीं हो पाई, इसलिए नहीं कि आपने कोई धोखा किया, न ही जानबूझकर नियम तोड़ा, बल्कि इसलिए, कि बीमार होने की वजह से आपका अकाऊंटैंट छुट्टी पर था। अभी तक चले आ रहे अंग्रेजों के जमाने के नियम-कानून में ऐसी छोटी चूक भी आपको आपराधिक मामले में सीधे अदालत तक ले जाती, जहां संगीन अपराधियों के साथ आप भी खुद को कटघरे में खड़ा पाते, यहां तक कि जेल का भी खतरा था।

जन विश्वास बिल 2026 अब ऐसी व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने आया है। मामूली चूक पर कारोबारियों को जेल की सजा की बजाय जुर्माने, सुधार का मौका और अपील का रास्ता खोला गया है। 3 अप्रैल को संसद में पास हुए इस बिल को मानवीय संवेदनाओं के मद्देनजर न्यायपूर्ण बनाने की कोशिश की गई है। इस बिल में 23 केंद्रीय मंत्रालयों के 79 बड़े कानूनों के 784 नियमों में से 717 में आपराधिक सजा हटा दी गई है। इससे पहले वर्ष 2023 के जन विश्वास कानून में भी 42 कानूनों के 183 नियमों में बदलाव हुआ था। कुल मिलाकर 900 नियमों में जेल जैसी सजा को कारोबारियों के लिए खत्म किया गया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर कारोबारी नियम आसान हों व सिस्टम भ्रष्टाचार मुक्त हो तो देश की जी.डी.पी. में अप्रत्याशित बढ़ोतरी की संभावना भारत को विकसित भारत बनाने के लिए बहुत मायने रखती है।

दुनिया से सबक : कारोबारियों के लिए कई कंप्लायंसेज को जेल की सजा से बाहर करने की पहल कई देशों ने की है। सिंगापुर ने छोटे नियमों के उल्लंघन को सजा की बजाय प्रशासनिक कार्रवाई में बदला। ब्रिटेन ने छोटे नियम तोडऩे पर जेल की जगह जुर्माना लगाया, कानून का पालन बेहतर हुआ तो असली अपराधियों पर ध्यान केंद्रित हुआ। ऑस्ट्रेलिया ने अपने कॉरपोरेट व पर्यावरणीय कानूनों में बदलाव करके जुर्माने लागू किए, इससे छोटे कारोबारियों के लिए नियमों का पालन आसान हुआ व अदालतों में लंबित मामले कम हुए।

छोटे कारोबारियों को बड़ा फायदा : भारत के 6.3 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मझोले कारोबारी (एम.एस.एम.ईज), जो देश की जी.डी.पी. में 30 प्रतिशत व एक्सपोर्ट में 45 प्रतिशत योगदान के साथ 12 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं, के लिए जन विश्वास 2026 बिल एक बड़ा बदलाव है। चूक होने पर अब पहले चेतावनी दी जाएगी, गलती दोहराने पर जुर्माना लगेगा। 

नाप-तौल, कॉपीराइट व पेटेंट कानून : मेट्रोलॉजी एक्ट 2009 के तहत अगर कोई दुकानदार या रेहड़ी-फड़ी वाला गलत तौल या गलत मापता था तो उसे एक साल तक की जेल हो सकती थी, भले ही गलती जानबूझकर न की हो। अब पहली बार गलती होने पर सुधार का मौका मिलेगा, दूसरी  बार जुर्माना लगेगा व जानबूझकर गलती करने पर ही सख्त कार्रवाई होगी। कॉपीराइट एक्ट एवं पेटेंट कानूनों में भी पहले छोटी गलतियों पर 3 साल तक की जेल की सजा व 2 लाख रुपए तक जुर्माने को अब अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया है। 

फूड प्रोसैसिंग : इस सैक्टर में एपीडा एक्ट 1985 के तहत फूड प्रोसैसर, एक्सपोर्टर्स के लिए समय पर कागजी कार्रवाई बहुत जरूरी थी। एक्सपोर्ट रिटर्न जमा करने में देरी पर 6 महीने तक की जेल की सजा व 1000 रुपए जुर्माने के साथ जेल की तलवार सिर पर लटकी थी। फूड प्रोसैसिंग सैक्टर में मौसम, लॉजिस्टिक व माल बहुत जल्दी खराब होने की चुनौती के बीच तय समय में रिटर्न का दबाव भी कारोबारियों के लिए परेशानी का एक बड़ा कारण था। अब पहली बार देर होने पर चेतावनी के साथ सुधार का मौका मिलेगा, बगैर किसी दंड के रिटर्न जमा होगी। 

हैल्थ सैक्टर : ड्रग्स एवं कॉस्मैटिक्स एक्ट 
1940 के तहत नकली ब्रांडेड कॉस्मैटिक्स बेचने पर 1 साल तक की जेल व 20,000 रुपए तक का जुर्माना था। लेबङ्क्षलग या फॉर्मूलेशन की गलती पर भी जेल की बजाय अब 1 लाख रुपए तक जुर्माना या जब्त किए गए नकली या खराब क्वालिटी के कॉस्मैटिक पर सही कॉस्मैटिक्स के मूल्य का 3 गुना तक जुर्माना होगा। क्लीनिकल एस्टैब्लिशमैंट एक्ट 2010 के तहत अस्पतालों व क्लीनिकों में छोटी कमियों पर भी आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान था। अब ऐसे मामलों में, जहां मरीज की सुरक्षा को खतरा नहीं है,आपराधिक कार्रवाई की बजाय 10,000 रुपए जुर्माना लगेगा।

प्राइवेट सिक्योरिटी सेवाएं : प्राइवेट सिक्योरिटी एजैंसी रैगुलेटरी एक्ट 2005 के तहत लाइसैंस व जरूरी जानकारी सार्वजनिक न किए जाने पर एक साल  तक जेल की सजा व 25,000 रुपए तक जुर्माना था। जन विश्वास 2026 बिल में ऐसी कमियों के लिए जेल की सजा खत्म कर दी है। लाइसैंस की अनिवार्यता पहले की तरह लागू रहेगी। 

माइनिंग सैक्टर : माइनिंग एंड मिनरल एक्ट 1957 के तहत माइनिंग का रिकॉर्ड रखने से लेकर रिपोर्ट जमा करने व प्रक्रियाओं का पालन न करने पर 5 साल तक जेल की सजा खत्म करके 50 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान किया है।  
इंफ्रास्ट्रक्चर : नैशनल हाईवे एक्ट 1956 के तहत असुरक्षित सड़क बनाने पर 5 साल तक की जेल व जुर्माना था। अब जन विश्वास बिल 2026 में 1 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

आगे की राह : जन विश्वास बिल 2026, सिर्फ नया कानून नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की सकारात्मक सोच है। असली चुनौती बदले हुए नियम-कानून को हकीकत में लागू करने की है। अगर इन्हें सही ढंग से लागू किया गया तो इसका असर लोगों के जीवन में भी दिखेगा।-डा. अमृत सागर मित्तल 

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