मुंबई: मुंबई के ठाणे में मुंब्रा से जीतकर पार्षद बनीं सहर शेख ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र होने के आरोपों को खारिज किया है। पिता युनूस शेख के ऐलान के अनुसार सहर शेख ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस की। इसमें पिता ने सहर शेख के जाति प्रमाणपत्र को मीडिया के सामने पेश किया। हालांकि सहर शेख ने मराठी में बोलने से मनाकर दिया। AIMIM की पार्षद सहर शेख ने कहा कि हमें फरार करार दिया। बड़े-बड़े आरोप लगाए गए। संविधान को मानने वाले हैं। हम इस लड़ाई को कानूनी तौर पर लड़ेंगे। सहर शेख ने कहा कि उनको (शिकायतकर्ता) को तो मैं कोर्ट में देखूंगी। पिता युनूस खान ने कहा कि ओरिजिनल प्रमाणपत्र तहसीलदार कार्यालय से मिला है। सहर शेख ने खुद को निशाना बनाए जाने पर फिर विपक्ष पर निशाना साधा और कह मुझे यह खौफ अच्छा लगा।

जितेंद्र आव्हाड का उड़ाया था मजाक

सहर शेख ने महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में ठाणे के मुंब्रा इलाके से AIMIM के टिकट पर जीतकर सनसनी फैला दी थी। इस क्षेत्र में शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के नेता और विधायक जितेंद्र आव्हाड को दबदबा माना जाता है। जीतने के बाद सहर शेख ने जितेंद्र आव्हाड पर टिप्पणी की थी और कहा कैसा हराया…इसके बाद वह सुर्खियों में आ गई थीं, हालांकि अगले पांच में मुंब्रा को हरा रंगने के बयान पर विवाद हुआ था। तब बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने सहर शेख के खिलाफ मुंब्रा थाने में शिकायत दी थी। प्रतिद्वंदी उम्मीदवार की शिकायत पर जाति प्रमाणपत्र को फर्जी बताए जाने पर सहर शेख ने के पिता कहा कि उन पर और उनकी बेटी पर OBC प्रमाणपत्र फर्जी होने का आरोप लगाया गया, जो पूरी तरह गलत है। उन्होंने बताया कि उनका ओरिजिनल ओबीसी प्रमाणपत्र तहसीलदार कार्यालय द्वारा जारी किया गया है।

मराठी बोलने को मजबूर नहीं कर सकते

प्रेस कांफ्रेंस में सहर शेख ने अपनी बात हिंदी में रखी। जब उनसे मराठी में बोलने के लिए कहा गया था तो सहर शेख ने कहा कि मेरी मराठी कमजोर हैं, क्योंकि मैं थोड़ी फेमस हूं। ऐसे में मैं नहीं चाहती मराठी बोलते में कोई एक शब्द में गड़बड़ हो। सहर शेख ने यह भी कहा कि मराठी महाराष्ट्र में सम्मानित भाषा है। मैं उसकी अस्मिता को खराब नहीं करना चाहती हूं। बाद में सहर शेख ने कहा कि आप मुझे जबरन मराठी बोलने के लिए मजबूर नहीं कर सकते हैं।

सहर शेख ने सुनवाई प्रक्रिया पर उठाए सवाल

एआईएमआईएम की पार्षद सहर शेख ने सुनवाई प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहली सुनवाई के दौरान तहसीलदार खुद मौजूद थे, लेकिन बाद में नायब तहसीलदार को सुनवाई का अधिकार किसने दिया, यह स्पष्ट नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि तहसीलदार उमेश पाटील के खिलाफ जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई गई है और जो जानकारी मांगी गई थी, वह गलत दी गई है। सहर शेख ने कहा कि वो मुझे गाजियाबाद का निवासी बात रहे हैं जबकि मेरी पढ़ाई ठाणे में हुई। सहर शेख ने कहा कि वे हमारे प्रूफ को कैसे गलत साबित कर पाएंगे। सहर शेख ने इस मामले को कानूनी ढंग से लड़ने की बात कही।

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