पश्चिम बंगाल (West bengal) में आज पहले चरण की वोटिंग के साथ ही चुनावी माहौल गर्माना तय है। सिर्फ राज्य की ही नहीं, देशभर की नज़रें पश्चिम बंगाल चुनाव पर हैं। आज, 23 अप्रैल को पहले चरण की वोटिंग चल रही है और 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग होगी। 4 मई को चुनावी परिणाम सामने आ जाएंगे और यह पता चल जाएगा कि किसकी सरकार बनेगी। इस चुनाव में महिलाओं का वोट निर्णायक साबित हो सकता है।

‘किंगमेकर’ बन सकती हैं महिलाएं

पश्चिम बंगाल में महिला मतदाता अब चुनावी नतीजों की दिशा तय करने वाली निर्णायक ताकत बन चुकी हैं, जिसका असर राष्ट्रीय राजनीति की रणनीतियों पर भी साफ दिख रहा है। पिछले डेढ़ दशक में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है और कई चुनावों में उनका ‘साइलेंट वोट’ ही निर्णायक कारक रहा है। ऐसे में बंगाल में महिलाएं ‘किंगमेकर’ बन सकती हैं।

चुनाव-दर-चुनाव बढ़ रही है महिलाओं की भागीदारी

1996 और 2001 में जहाँ पश्चिम बंगाल में महिला मतदान पुरुषों से कम था, वहीं 2011 में पहली बार महिलाओं ने 84.45% मतदान के साथ पुरुषों को पीछे छोड़ा और इसी चुनाव में राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ। 2016 और 2021 में भी यह बढ़त कायम रही। संख्या के लिहाज से भी महिला मतदाता 1996 के 2.16 करोड़ से बढ़कर 2021 में करीब 3.59 करोड़ हो गईं।

महिलाओं को लुभाने में लगे राजनीतिक दल

महिलाओं की इस बढ़ती ताकत को देखते हुए सभी राजनीतिक दल उनकी ओर केंद्रित हो गए हैं। टीएमसी जहां नकद लाभ वाली योजनाओं पर जोर दे रही है, वहीं बीजेपी भी सीधी आर्थिक सहायता के वादों के ज़रिए महिलाओं को लुभाने में लगी हुई है। दोनों राजनीतिक दलों की महिला वोटों को अपने पक्ष में करने पर जोर रहेगा, जिससे उन्हें फायदा मिल सके।

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