इन पंक्तियों के लिखे जाने तक निष्कर्ष यही है कि अमरीका-ईरान के बीच तत्काल शांति समझौते की संभावना खत्म हो चुकी है। हालांकि अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प बातचीत करने के अपने 2 प्रतिनिधियों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को इस्लामाबाद भेजने वाले थे तथा उन्होंने स्वयं कहा था कि हम समझौते के करीब हैं और इस्लामाबाद जा सकते हैं। उन्होंने ईरान की मांग को ध्यान में रखकर इसराईल-लेबनान के बीच भी 10 दिनों के युद्ध विराम की घोषणा कर दी। इसके बावजूद किसी को अगर उम्मीद रही हो कि पहले दौर की टूटी वार्ता पटरी पर लौट आई है, तो वह इस युद्ध की पृष्ठभूमि, ईरान की वर्तमान स्थिति तथा इसराईल को लेकर उसकी विचारधारा आदि का गहराई से विश्लेषण नहीं किया।
बातचीत की तैयारी के बीच समाचार आया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में अमरीकी नौसेना कमांडोज ने ईरान के गुजरते जहाज पर हमला कर उसे कब्जे में ले लिया। अमरीका ने घोषणा की कि जब तक समझौता नहीं होगा होर्मुज से ईरान का जहाज नहीं गुजरेगा। वस्तुत: अमरीका ने ईरान से होर्मूज की नाकेबंदी समाप्त करने को कहा था और ट्रम्प ने घोषणा कर दी थी कि वह ऐसा करने जा रहे हैं। स्वयं ईरान ने भी इसकी घोषणा कर दी लेकिन 24 घंटे के अंदर ही उसने नाकेबंदी जारी रखने का ऐलान कर दिया। अमरीकी राष्ट्रपति शांति समझौते की उम्मीद प्रकट करते रहे पर ईरान की ओर से आक्रामक और युद्धजनित वक्तव्य ही आते रहे। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकासिं्टग (आई.आर.ई.बी.) में कहा गया कि अमरीकी नेता हवा में किला बना रहे हैं। अमरीका एक ऐसी इच्छा प्रकट कर रहा है जिनका हकीकत से दूर तक का संबंध नहीं हो। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन का बयान आया कि हम अपना यूरेनियम अमरीका को नहीं सौंपेंगे। आखिर हमारा संवॢधत यूरेनियम ट्रम्प किस अधिकार के तहत लेंगे?
ट्रम्प भले पाकिस्तान की प्रशंसा कर रहे हों, कह रहे हों कि ईरान शांति समझौता कर लेगा लेकिन उन्हें भी मामले की जटिलता और ईरान के इस्लामी शासन की सोच का आभास है। इसलिए उन्होंने साथ-साथ घोषणा की थी कि दुनिया की सबसे ताकतवर नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी। जब तक ईरान के साथ शत प्रतिशत समझौता नहीं हो जाता तब तक होर्मूज की नाकाबंदी जारी रहेगी। होर्मुज ने दुनिया के लिए संकट पैदा कर दिया है और देशों को अपने जहाज अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से लाने पड़ रहे हैं जो लंबा रास्ता है। 2000 से ज्यादा जहाज खाड़ी में फंसे हुए हैं। 20 लाख से ज्यादा कंटेनर रुके पड़े हैं। ईरान से सबसे ज्यादा तेल और कच्चा माल चीन खरीदता है, इसलिए अमरीकी नाकाबंदी से सबसे ज्यादा समस्या उसे है और ईरान की आय पूरी तरह अवरुद्ध हो गई है। भारत कच्चे तेल का तीसरा सबसे बड़ा आयातक है, अत: हमारे लिए भी बड़ा संकट है। विश्व की आपूर्ति शृंखला इससे प्रभावित है।
आई.आर.जी.सी. के सीनियर एडवाइजर कमांडर मोहम्मद रेजा नकदी का बयान चल रहा है कि हमने कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण काम आगे के लिए छोड़ रखे हैं। अगर फिर युद्ध शुरू होता है तो भी हमारी बढ़त बनी रहेगी। हम तेल उत्पादन रोक सकते हैं, रोज के 15 मिलियन बैरल तेल को एक साल तक बंद रख सकते हैं। हम दुनिया में बड़ा संकट नहीं पैदा करना चाहते थे, इसलिए हमने धैर्य रखा और संयम से काम लिया। अमरीका का आॢटफिशियल इंटैलिजैंस और तकनीक हमारे नियंत्रण में हैं, उनके आई.टी. पर भी हमारा नियंत्रण है। वास्तव में जैसी जानकारी है, ईरान के हैकरों ने अमरीका पर जबरदस्त साइबर हमला किया और वहां समस्याएं पैदा कीं। गैस, तेल और ऊर्जा केन्द्रों पर ईरान के साइबर हमलों से कुछ समय के लिए काम ठप्प हुआ। इसी कमांडर ने कहा कि हमें मिसाइल बनाने से पूरी तरह रोकना संभव नहीं। इसका अर्थ हुआ कि ईरान न तो मिसाइल बनाना रोकेगा और न यूरेनियम सौंपेगा तथा होर्मुज पर नियंत्रण स्थापित करने के फैसले पर भी अडिग है।
अगर ट्रम्प शांति समझौते की बात कर रहे थे तो उनके रक्षा मंत्री इसके समानांतर ईरान को स्पष्ट चेतावनी दे रहे थे। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर वह न्यूक्लियर और क्षेत्रीय मुद्दों पर समझौता नहीं करता है, तो अमरीका दोबारा सैन्य कार्रवाई ज्यादा शक्ति से करेगा। उन्होंने कहा कि अमरीकी सेना लॉक एंड लोडेड यानी पूरी तरह से तैयार है और राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश पर ईरान पर पहले से अधिक ताकत के साथ हमला कर सकती है। हेगसेथ ने केवल कहा नहीं बल्कि अमरीका ने इसकी पूरी नियोजित तैयारी दिखाई।
पश्चिमी यूरोपीय मीडिया ने लिखा कि अमरीका ईरान को एनाकोंडा प्लांट में फंसा रहा है। अमरीका ने सेना के तीनों अंगों के लगभग 10 हजार सैनिक समुद्र में उतार दिए, 12 युद्धपोत तैनात हैं। यू.एस.एस. अब्राहम ङ्क्षलकन ईरान की सीमा से 200 किलोमीटर दूर है तो यू.एस.एस. त्रिपोली नाविक और कमांडो लिए हुए तैनात है। गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर भी ‘होर्मुज’ के पास है। अमरीका ने 100 से ज्यादा निगरानी और लड़ाकू विमान भी भेज दिए हैं जो ईरान की नाकाबंदी कर रहे हैं तथा उसके जहाजों को रोकने के लिए सी हॉक हैलीकॉप्टर उड़ान भर रहे हैं। सैटेलाइट से जहाज की निगरानी होती है। इतनी तैयारी का अर्थ है कि अमरीका इस बार ईरान को उस स्थिति में पहुंचाने के लक्ष्य पर बढ़ रहा है, ताकि फिर वह युद्ध करने की सोच न सके।– अवधेश कुमार



















