देश में पटाखों की खपत काफी अधिक होने के कारण अवैध पटाखे बनाने वाले छोटे-बड़े सैंकड़ों कारखाने चल रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में गरीब परिवारों की महिलाओं और बच्चों सहित अप्रशिक्षित और अनुभवहीन मजदूरों से काम करवाया जाता है, जो इन अवैध कारखानों में होने वाले विस्फोटों के कारण मौत के मुंह में जा रहे हैं जिनके चंद उदाहरण निम्न में दर्ज हैं:

* 1 अप्रैल, 2025 को ‘बनासकांठा’ (गुजरात) में एक पटाखा फैक्टरी में ब्वायलर फटने के बाद आग लग जाने से 17 लोगों की मौत हो गई तथा मृतकों की लाशों के टुकड़े आसपास के खेतों में जा गिरे। इस दुर्घटना में मृत सभी मजदूर मध्य प्रदेश से यहां रोजगार के लिए आए थे। 
* 4 अप्रैल, 2025 को ‘विरुधुनगर’ (तमिलनाडु) में एक और पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हुआ जिसमें 4 लोगों की जान चली गई। 
* 13 अप्रैल, 2025 को ‘अमरावती’ (आंध्र प्रदेश) के ‘कैलासा’ शहर में पटाखे बनाने वाली एक फैक्टरी में विस्फोट से 8 लोगों की मौत हो गई।
* 26 अप्रैल, 2025 को ‘विरुधुनगर’ (तमिलनाडु) में ‘पुदुपट्टी’ स्थित एक पटाखा फैक्टरी में भीषण विस्फोट से 3 महिलाओं की दर्दनाक मौत हो गई तथा कई अन्य महिलाएं बुरी तरह झुलस गईं। 
* 17 जून, 2025 को ‘अमरोहा’ (उत्तर प्रदेश) के ‘अतरासी’ गांव के जंगलों में स्थित एक पटाखा फैक्टरी में तेज धमाके से वहां काम कर रहीं 4 महिला मजदूरों के शरीर के चीथड़े उड़ गए व अनेक मजदूर झुलस गए। इस फैक्टरी में ‘फुलझड़ी’ के अलावा ‘अनार बम’ सहित कई तरह की आतिशबाजियां तैयार की जाती थीं। 

* 13 अगस्त, 2025 को ‘अनकापल्ली’ (आंध्र प्रदेश) में ‘कोटा वुराटाला’ में स्थित एक पटाखा फैक्टरी में तेज धमाके के बाद आग लग जाने से 8 मजदूरों की मौत हो गई तथा आधा दर्जन से अधिक घायल हो गए।
* 31 अगस्त, 2025 को ‘लखनऊ’ (उत्तर प्रदेश) के ‘बहेटा’ गांव में स्थित पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके में वहां काम करने वाली एक ही परिवार की 4 महिला मजदूरों की जान चली गई।
* 28 फरवरी, 2026 को ‘काकीनाडा’ (आंध्र प्रदेश) जिले के ‘वेटला पलेम’ गांव में स्थित एक पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट में 20 दिहाड़ीदार श्रमिकों की मौत तथा 8 अन्य गंभीर रूप से झुलस गए।
* 31 मार्च, 2026 को ‘लुधियाना’ (पंजाब) में स्थित एक अवैध पटाखा फैक्टरी में विस्फोटकों में आग लगने से हुए धमाके से लैंटर गिरने से ‘मोहम्मद कैफ’ नामक युवक की उसके नीचे दब कर मौत हो गई।
* 19 अप्रैल, 2026 को ‘विरुधुनगर’ (तमिलनाडु) के ‘कटनार पट्टी’ गांव में स्थित ‘वनजा’ नामक पटाखे बनाने वाली फैक्टरी में हुए धमाके में वहां काम कर रहे 23 मजदूरों की मौत हो गई। 
धमाका इतना शक्तिशाली था कि 4 कमरे पूरी तरह मलबे में तबदील हो गए और आसपास की कई इमारतें भी धराशायी हो गईं। कई शव इतनी बुरी तरह झुलस गए कि उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया। 
घायलों में महिलाएं भी शामिल हैं जिनमें से कुछ 60 प्रतिशत तक झुलस गईं। यह भी उल्लेखनीय है कि घटना के दिन छुट्टी होने के बावजूद फैक्टरी में 50 से 100 के बीच मजदूरों से काम करवाया जा रहा था।

* और अब 21 अप्रैल, 2026 को ‘त्रिशूर’ (केरल) की एक पटाखा फैक्टरी में हुए धमाके में 13 लोगों की मौत हो गई और 40 लोग घायल हो गए।
लगातार हो रही ऐसी दुर्घटनाएं यह संकेत देती हैं कि पटाखा फैक्टरियों में सुरक्षा मानकों के पालन में कहीं न कहीं बड़ी चूक हो रही है। ये घटनाएं न सिर्फ एक औद्योगिक त्रासदी हैं बल्कि यह उन मजदूरों की भी कहानी है जो रोजी-रोटी के लिए जोखिम भरे काम करने को मजबूर हैं। अत: जरूरत है कि सरकार और संबंधित एजैंसियां सख्त कदम उठाएं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। 
अवैध पटाखा फैक्टरियां राज्यों की पुलिस व प्रशासन की सहायता के बिना नहीं चल सकतीं अत: जिन इलाकों में इस तरह की अवैध फैक्टरियां चल रही हैं, वहां के अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.

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