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कोरिया। गोधन न्याय योजना से आम जीवन में बदलाव की तस्वीर लगातार उजली होती जा रही है। यह योजना परंपरागत ढंग से पशुपालन करने वाले सभी किसानों के लिए आर्थिक संबल की एक नई इबारत लिखने लगी है। कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पिपरिया की रहने वाली श्रीमती सीता देवी ने इस कहानी को एक नया मोड़ दिया है। संयुक्त आदिवासी परिवार की इस बहू ने अपने पति विष्णु सिंह को उपहार में देने के लिए गोधन न्याय योजना के तहत मिली रकम से एक मोटर सायकल खरीद ली है। यह पूरी कहानी पिपरिया गोठान के सफलता के साथ गोधन न्याय योजना के सीधे लाभ से जुड़ी हुई है। आदिवासी समुदाय से आने वाली बारहवीं पास श्रीमती सीता देवी ग्राम पंचायत पिपरिया के मौहारी पारा में निवासरत है। लंबे समय से श्रीमती सीता देवी की इच्छा थी कि उनके पति के पास खुद की मोटर सायकल हो ताकि दोनो लोग अपनी इच्छानुसार आस पास के गांवों में अपने परिचितों के यहां आना जाना कर सकें। उनकी इस सोच को साकार करने का अवसर मिला गोधन न्याय योजना के आने से, क्योंकि यह एैसी योजना है जिससे सीधा लाभ हितग्राहियों के खाते में आ रहा है। अब तक लगभग 40 टन गोबर बेचकर इस परिवार को 80 हजार रूपए का लाभ हो चुका है। इस राशि से ही श्रीमती सीता देवी ने अपने पति के लिए उपहार के रूप में एक बाइक ही खरीद ली है। खडग़ंवा जनपद के ग्राम मझौली में रहने वाली श्रीमती सीता देवी का श्री विष्णु सिंह से कुछ वर्षों पूर्व विवाह हुआ। ग्राम पंचायत पिपरिया के मौहारी पारा में रहने वाले एक संयुक्त आदिवासी कृषक परिवार के दूसरे बेटे विष्णु सिंह की पत्नी श्रीमती सीता देवी कुल बारहवीं तक पढ़ी लिखी हैं। इस परिवार के पास लगभग पांच एकड़ खेती है परंतु सारी खेती असिंचित है। केवल बारिश पर आधारित खेती के अलावा इस परिवार के पास कुल 13 गाय बैल और भैंस है। गोधन न्याय योजना के पहलेे यह परिवार अपने पशुओं से मिलने वाले गोबर से कंडे एवं खाद बनाने में उपयोग करते थे। श्रीमती सीता देवी ने बताया कि उनके पति पेशे से चालक हैं और बड़े वाहन चलाते हैं। विवाह के बाद पिपरिया आने के बाद इन सबके बीच श्रीमती सीता और उनके पति विष्णु को जब भी कहीं जाना होता था तो खुद का वाहन न होने की कमी खलती थी। सीता देवी गत वर्ष राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बिहान से जुड़ी और विद्या महिला स्व सहायता समूह बनाकर छोटी छोटी बचत से समूह की आर्थिक गतिविधि की राह बनाने का काम प्रारंभ किया। जागरूक श्रीमती सीता देवी गांव में पशु सखी का कार्य भी कर रही हैं। इसके बाद सुराजी ग्राम योजना के तहत पिपरिया में ग्राम गौठान का निर्माण शुरू हुआ तो विद्या महिला स्व सहायता समूह से जुड़ी हुई सीता को गौठान में वर्मी बनाने का काम भी मिला। श्रीमती सीता देवी ने बताया कि इस साल हरेली से गांव के गौठान में गोधन न्याय योजना शुरू हुई। योजना के प्रारंभ से ही इस परिवार ने अपने पषुओं से मिलने वाला लगभग एक क्विंटल गोबर प्रतिदिन इस गौठान में बेचना प्रारंभ किया। अब तक इस परिवार ने लगभग 40 टन गोबर बेच दिया है। गोधन न्याय योजना के तहत मिली राशि से श्रीमती सीता देवी ने अपने पति के लिए एक मोटरसायकल खरीद ली है। गत सप्ताह उन्होने यह मोटरसायकल खरीदी। श्रीमती सीता देवी के पति श्री विष्णु अभी अपने रोजगार के सिलसिले में बाहर गए हैं वह हंसकर कहती हैं कि इस बार नए साल में अपने पति को मोटरसायकल उपहार के रूप में देंगी। आने वाले समय में बेहतर करने की चाह रखने वाले इस आदिवासी कृषक परिवार के लिए गोधन न्याय योजना दोहरे लाभ का सौदा बन चुकी है।

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