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डेस्क: आज के समय में बड़ों से लेकर बच्चों तक सभी को मोबाइल फोन की लत लग चुकी है। बच्चों को तो मोबाइल फोन की लत ऐसी लगी है कि कई बच्चे तो मोबाइल देखे बिना खाना नहीं खाते। वो फोन लेने की जिद करते है तो मां बाप भी उनकी जिद के आगे हार जाते है और बच्चे को शांत कराने के लिए उन्हें फोन दे देते है। लेकिन, ये बहुत खतरनाक है, इससे बच्चे ऑटिज़्म की शिकार हो रहे है। एम्स की एक रिसर्च में ये खुलासा हुआ है। इसमें बताया गया कि  कम उम्र में बच्चों को स्मार्टफोन देना उनके मानसिक विकास को काफी हद तक प्रभावित करता है। चलिए जानते है कि ऑटिज्म क्या है और बच्चों पर इसका क्या असर हो रहा है और AIIMS की रिसर्च में क्या खुलासा हुआ है…

ऑटिज़्म क्या है?

ऑटिज़्म (Autism Spectrum Disorder) एक न्यूरो-डेवलपमेंटल कंडीशन है, यानी यह बच्चे के दिमाग के विकास से जुड़ी स्थिति है। इसमें बच्चे की सोचने, समझने, बोलने और दूसरों से जुड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसे “स्पेक्ट्रम” इसलिए कहते हैं क्योंकि हर बच्चे में इसके लक्षण और उनकी गंभीरता अलग-अलग होती है। एम्स की रिसर्च में कई बड़े खुलासे हुए है, जिसमें बताया गया कि कम उम्र में बच्चों को स्मार्टफोन देना उनके मानसिक विकास को काफी हद तक प्रभावित करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, जो बच्चे ज्यादा मोबाइल फोन, गैजेट्स और ज्यादा टीवी देखते है। उनमें ये डिसऑर्डर होने का खतरा ज्यादा होता है।

रिसर्च में हुआ ये खुलासा

देश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल AIIMS New Delhi में बच्चों की सेहत को लेकर एक रिसर्च हुई है, जिसने माता-पिता की चिंता बढ़ा दी है। इसके मुताबिक, दो साल से कम उम्र के बच्चे जो ज्यादा मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं तो वे ऑटिज्म जैसी गंभीर स्थितियों का शिकार हो सकते हैं। रिसर्च में ये भी पाया गया कि जिन बच्चों के माता-पिता ने उन्हें जन्म से लेकर 18 महीने की उम्र तक मोबाइल फोन देखने की आदत डाल दी है, उन बच्चों में ऑटिज्म जैसी गंभीर स्थितियों पाई गई।

डॉक्टरों का क्या कहना?

रिसर्च के मुताबिक, डॉक्टरों ने बताया कि कुछ मामलों में ऐसे बच्चों में बोलने में देरी, आंखों से कम संपर्क करना, नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया न देना, सामाजिक गतिविधियों में रुचि कम होना और दोहराव वाली हरकतें देखने को मिल सकती हैं। ये लक्षण ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर जैसे न्यूरोडेवलपमेंटल कंडीशन से जुड़े हो सकते हैं, हालांकि सिर्फ मोबाइल देखने से ऑटिज्म होना सीधे तौर पर तय नहीं माना जाता। डॉक्टरों ने बताया कि इस डिसऑर्डर से बचने के लिए माता-पिता को बच्चे के जन्म से ही ध्यान रखना चाहिए। बच्चों को छोटी उम्र से ही मोबाइल फोन से दूर रखना चाहिए, अगर स्क्रीन दिखाई भी जाए तो शैक्षिक और इंटरैक्टिव कंटेंट हो, और माता-पिता की मौजूदगी में हो। बच्चे को अकेले मोबाइल देकर चुप कराने की आदत लंबे समय में नुकसानदायक हो सकती है। इससे असर बच्चे के विकास पर पड़ेगा। 

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