नई दिल्ली। हिजबुल्लाह द्वारा तैनात किए गए सस्ते फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन दक्षिणी लेबनान में इजरायली सैनिकों के लिए नई ऑपरेशनल चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। इन ड्रोन्स के कारण इजरायली सेना को इस तेजी से बढ़ते जानलेवा खतरे के मुकाबले अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ रहा है।

इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल सिक्योरिटी स्टडीज (INSS) की वरिष्ठ शोधकर्ता ओर्ना मिजराही ने बताया कि ये डिवाइस छोटे, सस्ते और आसानी से उपलब्ध हैं तथा दिखने में बच्चों के खिलौनों जैसे लगते हैं।

क्यों है पारंपरिक ड्रोन से अलग?

AFP के अनुसार, मिजराही ने कहा कि सेना के पास आजकल इसका कोई जवाब नहीं है, क्योंकि उन्होंने खुद को ऐसे कम-तकनीक वाले विस्फोटकों के लिए तैयार नहीं किया था।

GPS या रेडियो संकेतों से निर्देशित पारंपरिक ड्रोन्स को इलेक्ट्रॉनिक जामिंग से बाधित किया जा सकता है। इसके विपरीत, हिजबुल्लाह ऐसे ड्रोन्स तैनात कर रहा है जो पतले फाइबर-ऑप्टिक केबलों के जरिए लॉन्च स्थल से जुड़े रहते हैं। ये केबल कई दर्जन किलोमीटर तक फैल सकते हैं।

इन ड्रोन्स को फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) मोड में उड़ाया जाता है, जिसमें स्क्रीन या वर्चुअल रियलिटी गॉगल्स का इस्तेमाल होता है। इन्हें उड़ाने के लिए बहुत कम प्रशिक्षण की जरूरत पड़ती है। इनकी उच्च गति और सटीकता इजरायली लक्ष्यों को भारी नुकसान पहुंचाने में सक्षम बनाती है।

चूंकि इनमें इलेक्ट्रॉनिक संकेत नहीं होते, इन्हें रडार से पकड़ना मुश्किल होता है। सैनिकों को इन्हें आंखों से या रडार से ही पहचानना पड़ता है, लेकिन तब तक अक्सर बहुत देर हो चुकी होती है।

असममित युद्ध की नई रणनीति

ओर्ना मिजराही के अनुसार, हिजबुल्लाह द्वारा फ़ाइबर-ऑप्टिक ड्रोन्स की तैनाती असममित युद्ध की ओर एक बड़े बदलाव को दर्शाती है। हाल के दिनों में इस समूह ने इन ड्रोन्स पर अपनी निर्भरता काफी बढ़ा दी है। यह शुरुआती दौर के भारी रॉकेट हमलों की रणनीति से एक महत्वपूर्ण विचलन है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इन ड्रोन्स को असेंबल करने की लागत कुछ सौ डॉलर से लेकर लगभग $4,000 तक हो सकती है, जो इस्तेमाल किए गए पुर्जों पर निर्भर करती है। इनमें से कई पार्ट्स AliExpress जैसे प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध हैं।

शुक्रवार को हिजबुल्लाह के मीडिया प्रमुख यूसुफ अल जैन ने इन ड्रोन्स के इस्तेमाल की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि इनका निर्माण लेबनान के अंदर ही किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमें दुश्मन की श्रेष्ठता का भान है, लेकिन हम उसकी कमजोरियों का भी फायदा उठा रहे हैं।

इजरायली सेना की तैयारी

वरिष्ठ इजरायली सैन्य अधिकारी ने स्वीकार किया कि सेना अभी भी फाइबर-ऑप्टिक ड्रोन से उत्पन्न खतरे के अनुरूप खुद को पूरी तरह ढालने की प्रक्रिया में है। अधिकारी ने कहा कि अब तक, हम फोर्स प्रोटेक्शन टेक्नोलॉजी और दूसरी सुरक्षा व्यवस्थाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो हमने दूसरी जगहों से और अपने अनुभव से सीखी हैं।

लेकिन यह एक ऐसा खतरा है जिसके हिसाब से हम अभी भी खुद को ढाल रहे हैं। ऐसा कुछ भी नहीं है जो पूरी तरह सुरक्षित हो। अधिकारी ने यह भी बताया कि इजरायली सेना यूक्रेन युद्ध से भी सीख रही है, जहां इस तरह के ड्रोन्स का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हो रहा है।

यूक्रेन की पेशकश ठुकराई

इजरायली न्यूज वेबसाइट Mako ने 2024 में रिपोर्ट किया था कि यूक्रेन ने रूस के हमले के बाद ड्रोन युद्ध में महारत हासिल कर ली थी और कई साल पहले इजरायल के साथ अपनी जानकारी साझा करने की पेशकश की थी, लेकिन इजरायल ने उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने उस समय कहा था, कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

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