अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले महीने तुर्किये से अमेरिका लौटते समय ट्रंप ने सुरक्षा कारणों से चुपचाप विमान बदल लिया था। दिलचस्प बात यह है कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट उसी पुराने ‘एयर फोर्स वन’ में बैठे रहे, ताकि बाहर से यह आभास बना रहे कि राष्ट्रपति उसी विमान में यात्रा कर रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक, ट्रंप की सुरक्षा को लेकर संभावित खतरे के कारण यह कदम उठाया गया था। यानि  ट्रंप की सुरक्षा के लिए दो बड़े अमेरिकी मंत्रियों की जान दांव पर लगा दी गई! संभावित हमले के खतरे के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गुपचुप तरीके से एयर फोर्स वन से निकालकर दूसरे विमान में पहुंचाया गया, लेकिन दुनिया को ट्रंप के उसी विमान में होने का भ्रम देने के लिए विदेश मंत्री मार्को रूबियो और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट उसी विमान में बैठे रहे।

सुरक्षा योजना में अचानक बदलाव
ट्रंप पिछले महीने तुर्किये की राजधानी अंकारा में नाटो देशों के नेताओं की वार्षिक बैठक में शामिल होने गए थे। वह वहां उस नए विमान से पहुंचे थे, जिसे कतर ने अमेरिका को उपहार में दिया था। हालांकि, तुर्किये से अमेरिका लौटते समय ट्रंप ने कुछ दूरी के लिए पुराने एयर फोर्स वन का इस्तेमाल करने की इच्छा जताई थी। लेकिन वापसी के दौरान सुरक्षा योजना में अचानक बदलाव किया गया।  रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप को गुप्त तरीके से दूसरे विमान तक पहुंचाया गया, जबकि एयर फोर्स वन को इस तरह इस्तेमाल किया गया कि बाहरी लोगों को राष्ट्रपति के उसी विमान में होने का भ्रम बना रहे। अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, विदेश मंत्री मार्को रूबियो को विमान बदले जाने और इसके पीछे मौजूद सुरक्षा खतरे की जानकारी थी। हालांकि अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि खतरे की जानकारी होने के बावजूद रूबियो उसी विमान में क्यों रहे।

दोनों मंत्रियों को जानबूझकर विमान में रखा
अधिकारी ने यह भी कहा कि वित्त मंत्री स्कॉट बेसेन्ट को भी संभवतः इस योजना की जानकारी थी, लेकिन वह इसकी पुष्टि नहीं कर सकते। इससे सुरक्षा योजना को लेकर कई सवाल खड़े हुए हैं कि क्या दोनों मंत्रियों को जानबूझकर उसी विमान में रखा गया था ताकि राष्ट्रपति के वास्तविक विमान को लेकर भ्रम बना रहे। ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने इस सप्ताह रिपोर्ट दी थी कि तुर्किये से लौटते समय ट्रंप पुराने एयर फोर्स वन में मौजूद नहीं थे। रिपोर्ट में दावा किया गया कि संभावित ईरानी हत्या की साजिश से बचने के लिए ट्रंप को चुपचाप दूसरे विमान तक पहुंचाया गया था। हालांकि, इस दावे की पूरी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अमेरिकी अधिकारियों ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि विमान बदलने का कारण निश्चित तौर पर ईरान था। इससे पहले ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘सीबीएस न्यूज’ ने भी रिपोर्ट किया था कि अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने राष्ट्रपति या उनके विमान पर संभावित हमले को लेकर चिंता जताई थी। इसके बाद ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था में अतिरिक्त उपाय किए गए थे।

ट्रंप  को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्क
 ट्रंप ने मंगलवार देर रात विमान बदलने की बात स्वीकार की। ज्वाइंट बेस एंड्रयूज में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि उनकी सुरक्षा से जुड़े फैसले मुख्य रूप से सीक्रेट सर्विस पर निर्भर करते हैं। ट्रंप ने संकेत दिया कि वह अपनी सुरक्षा टीम और सेना की सलाह का पालन करते हैं। उनका कहना था कि वह वही करते हैं जो सीक्रेट सर्विस उनसे करने के लिए कहती है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति की सुरक्षा के इंतजाम कैबिनेट के दूसरे शीर्ष सदस्यों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक होते हैं। खास तौर पर ट्रंप के मामले में सुरक्षा एजेंसियां अतिरिक्त सतर्क रहती हैं, क्योंकि उनके खिलाफ अतीत में हत्या के प्रयास हो चुके हैं।  ऐसे में राष्ट्रपति की यात्रा के दौरान विमान, रूट, सुरक्षा घेरे और वास्तविक लोकेशन को लेकर गोपनीयता बनाए रखना सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा माना जाता है। 

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