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देश में दो तरह के पेट्रोल पंप है एक सरकारी और एक प्राइवेट। अब देश के कई शहरों में प्राइवेट पेट्रोल पंप धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत बना रहे हैं। कुछ प्राइवेट पंप सरकारी तेल कंपनियों की तुलना में सस्ता पेंट्रोल-डीजल ग्राहकों को बेच रहे हैं। ग्राहकों को मिलने वाले इस सस्ते पेंट्रोल डीजल में 1 से 5 रुपये तक का अंतर हो सकता है। ऐसे में यह सवाल उठता है कि आखिर प्राइवेट कंपनिया सरकारी तेल कंपनियों की तुलना में कैसे सस्ता पेट्रोल-डीजल बेच रही हैं।

प्राइवेट पेट्रोल पंप सस्ता तेल कैसे बेच रहे?

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने सस्ती दरों पर तेल का आयात किया था। सस्ती दरों पर तेल मिलने के बाद एक ओर जहां सरकारी कंपनियों ने तेल के दाम में कोई बदलाव नहीं किया वहीं दूसरी ओर Reliance Industries और Nayara Energy जैसी कंपनियों ने ग्राहकों को साधने के लिए कीमतों को नरम किया था। इसके साथ ही प्राइवेट कंपनियों को तेल रिफाइनिंग से होने वाला मार्जिन बढ़ा और उन्होंने यह लाभ सीधे ग्राहकों के साथ शेयर किया। हालांकि, यह हमेशा सस्ता नहीं होता। इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की प्राइस बढ़ने पर प्राइवेट कंपनियां सीधे पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ा देती हैं। अभी हाल ही में इन कंपनियों ने ईरान-अमेरिका युद्ध के बाद तेल की कीमतों में 3 से 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी।

देशभर में आज पेट्रोल-डीजल की कीमतें

देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम में मामूली बढ़त देखने को मिली। यह हर राज्य में अलग-अलग है क्योंकि राज्यों द्वारा लगाया जाने वाला टैक्स भी अलग होता है।

शहरपेट्रोल कीमतबदलाव
कोलकाताrs 105.45+0.04
मुंबईrs 103.54+0.04
चेन्नईrs 100.80-0.10
गुरुग्रामrs 95.51-0.14
भुवनेश्वरrs 100.94-0.41
हैदराबादrs 107.46-0.04
जयपुरrs 104.50+0.02
लखनऊrs 94.57-0.12
पटनाrs 105.74+0.51
तिरुवनंतपुरमrs 107.48+0.15

सरकारी कंपनियां तेल के दाम क्यों नहीं घटातीं?

सरकारी कंपनियों की लिस्ट में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम शामिल है। इंटरनेशनल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में होने वाले भारी भरकम बदलाव के बाद भी ये कंपनियां न तो तेल के दाम घटाती हैं और न ही बढ़ाती हैं।

ऐसा इसलिए क्योंकि तेल की कीमतें मुख्य रूप से राजनीति से जुड़ी हुई होती हैं। पेट्रोल-डीजल की महंगाई सीधे आम नागरिक के बजट को प्रभावित करती हैं। कीमतों के बढ़ने से महंगाई सीधे बढ़ती है और सरकार पर दबाव आता है। इसलिए Indian Oil, BPCL, HPCL अक्सर दाम स्थिर रखती हैं। नतीजा यह निकलता है कि इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड ऑयल की प्राइस घटे या बढ़े लेकिन भारतीय बाजार में पेंट्रोल-डीजल के दाम फिर भी स्थिर रहते हैं।

सरकारी पंपों का दबदबा क्यों?

प्राइवेट कंपनियों की छूट के बावजूद अभी भी सरकारी पंप भारतीय बाजार के 90 फीसदी हिस्से को कंट्रोल करती हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकारी कंपनियों की मजबूद सप्लाई चेन डेवलप हो चुकी है। ग्रामीण इलाको तक इनकी पहुंच है। वहीं बाजार में अब इनकी एक ब्रांड वैल्यू बन चुकी है।

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