82 लाख रुपये के गहने बरामद

करीमनगर-II टाउन पुलिस के अनुसार, जांचकर्ताओं ने करीब 161.4 तोला सोने के गहने और लगभग 112 किलोग्राम चांदी के सामान बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 82.02 लाख रुपये है. पुलिस ने पिस्तौल, वाहन और अन्य सामग्री भी जब्त की है, जिनका कथित तौर पर लूट के दौरान इस्तेमाल किया गया था.

बिहार की जेल में बना था चोरी का प्लान

पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने बताया कि मामले की जांच से पता चला है कि इसमें एक ऑर्गेनाइज्ड इंटर-स्टेट गैंग शामिल था. यह गिरोह तेलंगाना, महाराष्ट्र, बिहार, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों तक फैला है. पुलिस ने बिहार के कुख्यात अपराधी सुबोध सिंह को, जिसे ‘गोल्डन थीफ’ के नाम से जाना जाता है, इस लूट का मास्टरमाइंड बताया है.

कमिश्नर ने बताया कि यह गिरोह एक सोची-समझी रणनीति के तहत काम करता था और पुलिस की निगरानी से बचने के लिए अक्सर अपनी पहचान और ठिकाने बदलता रहता था. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि लूट की यह साजिश कथित तौर पर बिहार की पूर्णिया सेंट्रल जेल के अंदर रची गई थी. कमिश्नर ने बताया, ‘गिरोह के सरगना सुबोध सिंह ने जेल में बंद रहते हुए, अपने उन साथियों को लूट का पूरा खाका और उसे अंजाम देने की योजना समझाई, जो उससे जेल में मिलने आए थे. आरोपियों ने बाद में ठीक वैसे ही इस अपराध को अंजाम दिया, जैसा उन्हें निर्देश दिया गया था.’

अब तक तीन आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने बताया कि इस अपराध में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कुल 13 लोग शामिल पाए गए हैं. जहां पांच सदस्यों ने लूट में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था, वहीं अब तक केवल तीन आरोपियों को ही औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया गया है और बाकी संदिग्धों का पता लगाने की कोशिश जारी है. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान यमूर क्रांति कर उर्फ ​​धीर सिंह, रवि कुमार उर्फ ​​प्रभु, राजू उर्फ ​​अजय उर्फ ​​प्रेम गोस्वामी, मिथा और सूर्य कुमार उर्फ ​​संदीप के रूप में हुई है.

पुलिस के अनुसार, चोरी की वारदात को अंजाम देने के बाद, गिरोह गिरफ्तारी से बचने के लिए बिहार और पश्चिम बंगाल भाग गया था. करीमनगर की स्पेशल पुलिस टीमों ने कई राज्यों में मिलकर ऑपरेशन चलाए और 13 मई को हैदराबाद के पास गहन तलाशी और गाड़ियों की चेकिंग के दौरान आरोपियों को पकड़ लिया. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस गैंग को ज्वेलरी की दुकानों को निशाना बनाने का पहले से अनुभव था और लूट को अंजाम देने से पहले उन्होंने पूरी रेकी की थी.

ज्वेलरी शॉप पर रख रहे थे नजर

एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से काम करते थे. उन्होंने ज्वेलरी स्टोर के आस-पास की हलचल पर नजर रखी, भागने के रास्ते पहले से तय किए और पकड़े जाने से बचने के लिए दूसरे राज्यों में फैले अपने नेटवर्क का इस्तेमाल किया. CCTV फुटेज, टेक्निकल सबूत, कॉल डेटा एनालिसिस और दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ तालमेल की मदद से आरोपियों की पहचान हुई, उन्हें ट्रैक किया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुबोध सिंह और गैंग के कई दूसरे सदस्य अभी भी फरार हैं और उन्हें ढूंढने के लिए बिहार, पश्चिम बंगाल और दूसरी जगहों पर छापेमारी की जा रही है. पुलिस दूसरे राज्यों में ज्वेलरी चोरी के ऐसे ही मामलों में भी इस गैंग के शामिल होने की संभावना की जांच कर रहे हैं.

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