पिछले साल 20 जनवरी को राष्ट्रपति का पद संभालने के कुछ ही दिन बाद 5 फरवरी, 2025 को ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ के विरुद्ध अमरीका के 50 राज्यों में प्रवासियों के निर्वासन, ट्रांसजैंडरों के अधिकार वापस लेने, उनके महिला खेलों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाने जैसे प्रस्तावों के विरुद्ध प्रदर्शन शुरू हो गए थे। अब इसमें ईरान के साथ युद्ध जैसे मुद्दे भी आ जुडऩे के कारण विदेशों में ही नहीं, अमरीका में भी ट्रम्प के कृत्यों को लेकर विरोध बढ़ गया है और उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में भी उनका विरोध हो रहा है। 

‘डोनाल्ड ट्रम्प’ की नीतियों के कारण ही उन पर 3 बार जानलेवा हमले हो चुके हैं। अभी हाल ही में 20 अप्रैल, 2026 को वाशिंगटन स्थित हिल्टन होटल में व्हाइट हाऊस में कोरेस्पोंडैंस डिनर के दौरान ‘कोल थामस एलन’ नामक हमलावर ने उन पर गोली चलाई परंतु ट्रम्प बाल-बाल बच गए। अमरीका-ईरान युद्ध के कारण ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट आफ होर्मुज’ बंद करने से दुनिया भर में र्ईंधन की सप्लाई प्रभावित होने के कारण महंगाई बढ़ रही है। इसी को देखते हुए नाटो सहित अमरीका के समर्थक अनेक देशों ने ट्रम्प के समर्थन से हाथ पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं क्योंकि अधिकांश देश युद्ध नहीं चाहते। 

उल्लेखनीय है कि इस युद्ध में अमरीका का भी भारी नुकसान हुआ है। न सिर्फ इस युद्ध में अमरीका के अनेक सैनिक मारे गए हैं, बल्कि ईरान ने अमरीका के 42 विमान भी तबाह कर दिए हैं। अमरीका में ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ की लोकप्रियता बारे किए गए एक सर्वे के अनुसार 65-66 प्रतिशत अमरीकी लोग देश की आॢथक स्थिति व बढ़ती महंगाई से खफा हैं। इन्हीं कारणों से 19 मई, 2026 को ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ को झटका देते हुए अमरीकी सीनेट ने उन्हें ईरान युद्ध रोकनेे के लिए मजबूर करने वाले विधेयक को आगे बढ़ाने की मंजूरी दे दी है। ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ की ‘रिपब्लिकन पार्टी’ के सांसदों ने भी ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ की इच्छा के विरुद्ध जाकर इस विधेयक के पक्ष में मतदान किया और ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ ने भी कह दिया है कि वह ईरान से संघर्ष के बहुत जल्द समाप्त होने की उम्मीद कर रहे हैं। 

व्हाइट हाऊस में आयोजित वाॢषक संसदीय समारोह को संबोधित करते हुए भी ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ ने कहा है कि ‘‘ईरान समझौता करने के लिए बेहद उत्सुक है। हम इस युद्ध को बहुत जल्दी खत्म कर देंगेे परंतु ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।’’
दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्री ‘अब्बास अराघची’ ने भी चेतावनी दी है कि अगर अमरीका ने उनके विरुद्ध फिर से आक्रामक रुख अपनाया तो अमरीका को देने के लिए उनके पास कई और बड़े झटके तैयार हैं। ईरान के हालात के चलते भारत में भी पैट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि के कारण महंगाई बढ़ी है। इसीलिए हाल ही में प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी’ ने लोगों से अपनी जरूरतों में छोटी-मोटी कटौती करने की अपील करते हुए कम्पनियों और दफ्तरों से वर्क फ्राम होम को बढ़ावा देने, एक वर्ष तक सोने की खरीद कम करने, खाने के तेल का उपयोग सीमित करने, विदेशी उत्पादों से दूरी बनाने, देश में पर्यटन बढ़ाने आदि की भी अपील की है। 

अभी हाल ही में ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ चीन के राष्ट्रपति ‘शी जिनपिंग’ से वार्ता करने बीजिंग गए थे, जहां आशा के विपरीत उनका बहुत फीका स्वागत हुआ। न वहां कोई बड़ी व्यापारिक डील हो सकी और न ही ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ चीन से ईरान पर दबाव डलवाने में ही सफल हो सके क्योंकि ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक सांझेदार तो चीन ही है। ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ ने तो ‘शी जिनपिंग’ की जमकर तारीफ की और उन्हें अपना दोस्त बताया परंतु चीन ने अमरीका को ‘पतन की ओर बढ़ रहा देश’ करार दिया। ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ की अंदरूनी खीझ का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वहां से लौटते समय अमरीकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन से मिले सभी उपहार ट्रम्प के विमान में सवार होने से पहले ही सीढिय़ों के नीचे रखे कूड़ेदान में फैंक दिए। 

दूसरी ओर ‘डोनाल्ड ट्रम्प’ की चीन यात्रा के तुरंत बाद चीन के पुराने व्यापारिक भागीदार रूस के राष्टï्रपति ‘व्लादिमीर पुतिन’ के बीजिंग पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत हुआ। फिलहाल ईरान के मोर्चे से अमरीकी सैनिकों की वापसी से युद्ध समाप्त होने की कुछ आशा बंधी है और ऐसा होना अमरीका और ईरान ही नहीं सारी दुनिया के हित में होगा।–

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