कांग्रेस 1 नवंबर को राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक ‘रामलीला मैदान’ में रैली करेगी। समाजवादी पार्टी का भी साथ रहेगा। दिल्ली पुलिस ने इजाजत भी दे दी है। 25 अक्तूबर से 3 नवंबर तक ‘अनापत्ति प्रमाण-पत्र’ (एनओसी) भी जारी कर दिया गया है। कांग्रेस दावा कर रही है कि 5 लाख से अधिक लोग जनसभा के दौरान आवाजाही करेंगे। यदि यही स्थिति रही, तो दिल्ली की उन सडक़ों पर जन-सैलाब होगा, यातायात बहुत बुरी तरह बाधित होगा, दुर्घटनाएं भी संभव हैं! क्या पुलिस ने ये तमाम आकलन कर लिए हैं? ‘रामलीला मैदान’ की घोषित क्षमता 60-65 हजार है, लेकिन एक लाख तक की भीड़ हमने देखी है। जयप्रकाश नारायण से बाबा रामदेव और अन्ना हजारे तक कई जनसभाओं के संबोधन इतिहास में दर्ज हैं। उन्होंने समय की धारा को मोड़ा है, नई जन-चेतना पैदा की है, लिहाजा सत्ताएं झुकीं और बदली भी हैं, लेकिन देश की भ्रष्ट व्यवस्था, सांप्रदायिक मानसिकता, वर्ग-भेद और बेरोजगारी-गरीबी लगभग यथावत मुद्दे आज भी हैं। बल्कि ये राष्ट्रीय समस्याएं हैं। अभी तक जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस के आसपास जो हुड़दंग मचाए गए, कहने को विरोध-प्रदर्शन किए गए, लिहाजा कारोबार ठप हुआ, लेकिन वे स्थितियां अब ‘रामलीला मैदान’ तक फैल सकती हैं। संवैधानिक और मानवाधिकार व्यापारी-वर्ग, दुकानदारों, रेहड़ी-फुटपाथ वाले कारोबारियों के भी हैं। बुनियादी मुद्दा ‘वोट चोरी’ का नहीं, प्रधानमंत्री मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, सरसंघचालक मोहन भागवत और ‘सबसे क्रूर खलनायक’ मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार गुप्ता हैं।
कांग्रेस और उसके समर्थन में विपक्ष अभी से 2029 की चुनावी रणनीति पर सक्रिय हैं, ताकि भाजपा-एनडीए के हाथ से जनादेश छीना जा सके। इसी रणनीति के तहत कभी यूथ कांग्रेस, कभी एनएसयूआई के कथित छात्र, तो कभी कोई और संगठन, तो निर्णायक तौर पर राहुल गांधी सडक़ पर उतर कर विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। बेशक यह उन सभी का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन व्यापार का बेड़ागर्क किया जाए, त्योहारी मौसम में भी दुकानों पर ताले जडऩे पड़ें और अंतत: 20,000 करोड़ रुपए के नुकसान का अनुमान सामने हो, तो कदाचित ये संविधान में प्रावधान नहीं हैं। व्यापार-संगठनों के आकलन हैं कि हालिया विरोध-अराजकता के कारण खुदरा कारोबार का 1800 करोड़ रुपए और थोक व्यापार का 300 करोड़ रुपए नुकसान हो चुका है। कनॉट प्लेस, जनपथ में ही करीब 80 फीसदी और पालिका बाजार, खान मार्केट में करीब 90 फीसदी व्यापार घट चुका है। खरीददारों की संख्या औसतन 2 लाख प्रतिदिन से घट कर 30-40 हजार पर आ चुकी है। लोग फोन पर पूछते हैं कि क्या मेट्रो चल रही है? क्या पुलिस, सुरक्षा बलों की किलेबंदी है या कम हो गई है? नई दिल्ली के ‘लुटियंस क्षेत्र’ में, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्री, सांसद, न्यायाधीश रहते हैं, वहां अब भी 27-28 हजार जवान तैनात हैं! क्या किसी युद्ध की आशंका है? व्यापारिक संगठनों के ही मुताबिक, बीते साल नवरात्रि से दीपावली और छठ पूजा तक के त्योहारी मौसम में 6 लाख करोड़ रुपए का कारोबार किया गया था। इस बार हालात ये हैं कि करीब 50,000 दिहाड़ीदार मजदूरों को काम ही नसीब नहीं हो पा रहा है। यदि दीपावली तक माहौल शांत नहीं हुआ, तो कुल नुकसान 20,000 करोड़ रुपए तक जा सकता है। लिहाजा व्यापारियों ने सरकार से राहत पैकेज मांगा है।



















