हवाई यात्रा आमतौर पर सुविधाजनक मानी जाती है, लेकिन हाल ही में एक घटना ने यात्रियों के मन में दहशत पैदा कर दी है. टेनेरीफ (स्पेन) से बर्मिंघम (यूके) जा रहे जेट2 एयरलाइंस के फ्लाइट LS1266 में 220 यात्रियों के साथ एक भयानक हादसा हो गया.
क्या हुआ था?
21 मई 2026 की रात फ्लाइट टेकऑफ के कुछ देर बाद ही कैप्टन को 30,000 फीट की ऊंचाई पर हार्ट अटैक आ गया. अचानक विमान की ऊंचाई घटने लगी. केबिन क्रू घबराकर रोते हुए गलियारों में दौड़ने लगे. उन्होंने यात्री से पूछा कि क्या किसी को मेडिकल ट्रेनिंग है. पूरा माहौल भय और चीख-पुकार से भर गया. सौभाग्य से को-पायलट अनुभवी था. उसने तुरंत कंट्रोल संभाल लिया और इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारी शुरू कर दी. विमान को पुर्तगाल के पोर्टो (Francisco Sa Carneiro Airport) डायवर्ट कर दिया गया. सुबह करीब 2:11 बजे विमान सुरक्षित लैंड कर गया.
यात्रियों की प्रतिक्रिया
यात्री इस घटना को याद करके अभी भी कांप रहे हैं. एक यात्री ने बताया, “हमने देखा कि स्टाफ रो रही थी और दौड़ रही थी. हमें लगा कुछ बहुत गंभीर है. जब पायलट को हार्ट अटैक बताया गया तो सब डर गए.” दूसरे यात्रियों ने कहा कि लैंडिंग के दौरान भी काफी टेंशन था, लेकिन को-पायलट ने शानदार तरीके से विमान उतारा. लैंडिंग के बाद मेडिकल टीम तुरंत विमान के पास पहुंची और पायलट को अस्पताल ले जाया गया. बाकी यात्रियों को 12 से 13 घंटे तक एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा. बाद में नया क्रू लेकर रिप्लेसमेंट फ्लाइट से उन्हें बर्मिंघम पहुंचाया गया.
जेट2 एयरलाइंस का बयान
जेट2 कंपनी ने बयान जारी कर कहा कि एक पायलट को अचानक तबीयत खराब होने के कारण फ्लाइट को पोर्टो डायवर्ट करना पड़ा. कंपनी ने यात्रियों को हुई परेशानी के लिए माफी मांगी और कहा कि यात्री सुरक्षा हमेशा प्राथमिकता है. विशेषज्ञों के अनुसार हर कमर्शियल फ्लाइट में दो पायलट होते हैं ताकि ऐसी स्थिति में दूसरा पायलट कमान संभाल सके. यह घटना दिखाती है कि सिस्टम काम करता है, लेकिन पायलटों के स्वास्थ्य पर और सख्त निगरानी की जरूरत है. हवाई अड्डों पर पायलटों की मेडिकल जांच नियमित अंतराल पर होनी चाहिए.



















