आपने अक्सर देखा या सुना होगा कि किसी भी प्राकृतिक आपदा के आने से पहले जानवरों के व्यवहार में कुछ अलग बदलाव देखना को मिलता है. आज के आधुनिक युग में वैसे तो किसी प्राकृतिक आपदा का अनुमान काफी हद तक लगाना संभव हो गया है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि पूराने समय में लोग इस बारे में कैसे पता लगाते थे या उन्हें कैसे पता चलता था?
असल में प्राकृतिक आपदा आने का आभास जानवरों को पहले ही हो जाता है. जानवरों की इंद्रियां इंसानों के मुकाबले बेहद संवेदनशील होती हैं. जानवर प्रकृति में होने वाले छोटे से बदलाव को भी इंसानों की तुलना में जल्दी महसूस कर लेते हैं. ऐसे में पहले लोग जानवरों की गतिविधियों के अनुसार प्राकृतिक आपदा का अनुमान लगाते थे. आइए जानते हैं ऐसे जानवरों के बारे में जो प्रकृति में होने वाले बदलावों को सबसे पहले महसूस कर लेते हैं.
कुत्ते को हो जाता है आभास
कुत्तों की सूंघने और सूनने की क्षमता इंसानों से अधिक तेज होती है. ऐसा माना जाता है कि धरती में होने वाले छोटे से कंपन को भी वे महसूस कर लेते हैं. कई बार भूंकप आने से पहले कुत्तों में डर, बैचेनी और भौकनें जैसी हरकतें देखी गई है. ऐसा भी माना जाता है कि कुत्ते प्रकृति में होने वाले छोटे बदलाव का आभास कर लेते हैं.
हाथी भी होते हैं संवेदनशील
कई शोध में पाया गया है कि हाथी अपने पैरों की मदद से धरती में होने वाले छोटे कंपन को सबसे पहले महसूस कर लेते हैं. वहीं कई घटनाओं में यह भी पाया गया है कि सुनामी आने से पहले हाथियों को ऊंचे स्थानों पर जाते हुए देखा गया है. ऐसे में यह बात साफ है कि हाथी प्रकृति में होने वाले बदलाव को पहले ही समझ जाते हैं.
सांप को भी लग जाता है पता
सांप धरती में होने वाले कंपन को महसूस कर लेते हैं. कई घटनाओं में पाया गया है कि भूकंप आने से पहले सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं. वे अपने जबड़ो की सहायता से धरती में होने वाले बदलाव का पता लगा लेते हैं.
पक्षियों को पता चल जाता है तूफान के बारे में
पक्षी प्रकृति में होने वाले वायुमंडलीय दबाव को महसूस कर लेते हैं. कई घटनाओं में तूफान आने से पहले पक्षियों को सामान्य से अलग दिशाओं में उड़ते हुए देखा गया है. वहीं कुछ घटनाओं में तो पक्षियों को जगह छोड़ते हुए भी पाया गया है. वहीं इनके अलावा भेड़, गाय, घोड़ा और मछलियों जैसे जानवर को भी प्राकृतिक घटनाओं का आभास पहले ही हो जाता है.



















