नई दिल्ली। भारत को एक के बाद एक दो करारे झटके लगे हैं। पहला झटका जापान ने दिया था। अब पड़ोसी चीन ने भी दे दिया। जापान ने भारत के प्रीमियम किस्मों के आयात पर रोक लगा दी है। दूसरी और चीन, भारत के नॉन बासमती चावल की खेपों को रिजेक्ट कर रहा है। ऐसा एक बार नहीं बल्कि वह कई बार कर चुका है।

सूत्रों ने बताया कि चीन ने भारत के नॉन-बासमती चावल निर्यात (Rice exports to China) पर लगातार सख्ती बढ़ाते हुए अब तक करीब 70 भारतीय खेपों को रिजेक्ट कर चुका है। चीन का आरोप है कि इन चावल की खेपों में जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज्म (GMO) पाए गए हैं। हालांकि, भारत सरकार ने साफ कहा है कि देश में कपास को छोड़कर किसी भी जीएम फसल की व्यावसायिक खेती नहीं होती।

जेनेटिकली मॉडिफाइड बहाना देकर चीन लौटा रहा भारत की खेप

बिजनेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पिछले हफ्ते भी चीन ने 4 से 5 भारतीय चावल की खेपों को यह कहते हुए लौटा दिया कि उनमें जीएमओ (Genetically Modified Organism Rice) के अंश मिले हैं। इससे पहले मार्च और अप्रैल में भी कई भारतीय कंपनियों की खेपों को वापस भेजा गया था। इतना ही नहीं, चीन ने तीन भारतीय निर्यातकों के आयात लाइसेंस तक निलंबित कर दिए थे। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या चीन व्यापारिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है या इसके पीछे कोई और रणनीति छिपी है।

भारत सरकार और कृषि विशेषज्ञ चीन के इन आरोपों को पूरी तरह गलत बता रहे हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने अप्रैल में स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत में किसी भी प्रकार के जीएम चावल की खेती नहीं की जाती। पर्यावरण मंत्रालय के अधीन जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेजल कमेटी (GEAC) ने भी पुष्टि की थी कि देश में जीएम राइस को मंजूरी नहीं दी गई है।

इंटरनेशनल मार्केट में भारत को कमजोर करना चाहता है चीन

दिलचस्प बात यह है कि चीन खुद जीएम चावल का उत्पादन (Production of GM Rice) करता है, लेकिन भारतीय चावल पर सवाल उठा रहा है। इससे भारतीय व्यापार जगत में यह आशंका बढ़ गई है कि बीजिंग भारत की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। कई व्यापारियों का मानना है कि चीन अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को कमजोर करना चाहता है।

लगातार रिजेक्शन के कारण भारतीय निर्यातकों की चिंता बढ़ गई है। बताया जा रहा है कि करीब 200 कंटेनरों को फिलहाल स्वेच्छा से रोक दिया गया है ताकि आगे नुकसान से बचा जा सके। निर्यातकों का कहना है कि चीन की इस कार्रवाई से भारतीय चावल कारोबार पर दबाव बन रहा है और खरीदारों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

चीन नहीं दे रहा स्पष्ट जवाब

मामले को लेकर भारत और चीन के अधिकारियों के बीच बातचीत भी हुई है। भारतीय अधिकारियों ने चीन के जनरल एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ कस्टम्स (GACC) से यह जानने की कोशिश की कि आखिर किस आधार और किस तकनीक से भारतीय खेपों को रिजेक्ट किया जा रहा है। लेकिन अब तक चीन की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

कुछ अधिकारियों का यह भी कहना है कि संभव है किसी अन्य देश का चावल भारतीय ब्रांड के नाम पर भेजा गया हो, हालांकि इसकी संभावना बहुत कम बताई जा रही है। वहीं कई विशेषज्ञ इसे सिर्फ गुणवत्ता का मामला नहीं बल्कि एक बड़ी व्यापारिक रणनीति मान रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला केवल चावल निर्यात तक सीमित नहीं है। चीन जिस तरह लगातार भारतीय कृषि उत्पादों पर सवाल उठा रहा है, उससे साफ संकेत मिलता है कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। आने वाले समय में यह विवाद भारत-चीन व्यापार संबंधों पर बड़ा असर डाल सकता है।

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
May 2026
M T W T F S S
 123
45678910
11121314151617
18192021222324
25262728293031