बिजनेस डेस्कः बैंक खातों और लॉकर में एक से ज्यादा नॉमिनी होने से क्लेम सेटलमेंट में बढ़ती दिक्कतों के बीच बैंकों ने अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से स्पष्ट और एक जैसे नियम बनाने की मांग की है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था में कई बार नॉमिनी अलग-अलग समय पर दावा पेश करते हैं, जिससे पैसे के भुगतान और प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी बढ़ जाती है।
फिलहाल नियमों के अनुसार एक बैंक खाते या लॉकर में अधिकतम चार लोगों को नॉमिनी बनाया जा सकता है लेकिन बैंकों का कहना है कि जब सभी नॉमिनी एक साथ बैंक नहीं पहुंचते या मामला अदालत में चल रहा होता है, तब क्लेम निपटाना काफी जटिल हो जाता है।
मामले से जुड़े बैंक अधिकारियों के मुताबिक, इस मुद्दे को अनौपचारिक तौर पर RBI के सामने रखा जा चुका है और जल्द ही आधिकारिक रूप से भी नई गाइडलाइंस की मांग की जाएगी। उनका मानना है कि RBI की ओर से स्पष्ट नियम आने पर पूरे देश में एक समान प्रक्रिया लागू हो सकेगी।
क्या है सबसे बड़ी दिक्कत?
- कई नॉमिनी अलग-अलग समय पर दावा करते हैं
- कोर्ट में मामला होने पर बैंक उलझन में पड़ जाते हैं
- अलग-अलग अदालतों के फैसलों से भ्रम की स्थिति बनती है
- कानूनी वारिस और नॉमिनी के अधिकारों को लेकर विवाद बढ़ता है
कोर्ट क्या कहता है?
अदालतों का रुख लगातार यह रहा है कि नॉमिनी सिर्फ रकम का संरक्षक होता है, जबकि संपत्ति पर असली अधिकार कानूनी वारिस का माना जाता है। हाल ही में ओडिशा हाई कोर्ट ने भी कहा कि हिंदू उत्तराधिकार कानून के तहत पत्नी का अपने पति की संपत्ति पर पहला अधिकार है, भले ही बैंक खाते में किसी दूसरे व्यक्ति को नॉमिनी बनाया गया हो।



















