नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने इजरायल और रूस के सुरक्षा बलों को सशस्त्र संघर्षों में यौन हिंसा और बलात्कार के लिए जिम्मेदार मानते हुए अपनी ब्लैकलिस्ट में शामिल कर लिया है। एफपी द्वारा समीक्षा की गई महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की आगामी रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं को पहुंच न दिए जाने के बावजूद फिलिस्तीनी बंदियों और यूक्रेनी युद्धबंदियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के कई विश्वसनीय मामले सामने आए हैं।

दरअसल, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने पिछले साल अगस्त में ही रूस और इजरायल को इस ब्लैकलिस्ट में शामिल किए जाने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद, यूक्रेन युद्ध और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में यौन हिंसा की घटनाओं और उनके विशेष पैटर्न का सामने आना लगातार जारी रहा। इस घटना को संयुक्त राष्ट्र द्वारा लगातार निगरानी किया जाना जारी रहा।

जांच में डाल रहे थे बाधा

दस्तावेज में साफ तौर पर कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से दी गई इस चेतावनी के बाद भी दोनों देशों के अधिकारियों ने संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं को लगातार जांच के लिए पहुंचने से इनकार किया गया। जांच में लगातार बाधा डालने और पहुंच से वंचित करने के बावजूद, अब इजरायल और रूस को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एजेंडे में शामिल करते हुए ब्लैकलिस्टेड किया गया है।

बलात्कार और यौन हिंसा का आरोप

दोनों देशों को उन सशस्त्र संघर्षों से जुड़े विश्वसनीय रूप से संदिग्ध पक्षों की सूची में डाल दिया गया है, जो बलात्कार या यौन हिंसा के अन्य रूपों को अंजाम देने या उसके लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। यह सूची सुरक्षा परिषद के उन पक्षों को चिन्हित करती है जो युद्ध या संघर्ष के दौरान यौन शोषण को एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करते हैं।

इसमें कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा सत्यापित मामले कई वर्षों के रुझानों के सूचक हैं, लेकिन इजरायली हिरासत केंद्रों तक पहुंच से इनकार किए जाने के कारण वे व्यापक नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र ने अपराधियों की पहचान इजरायली सेना, सुरक्षा बलों और जेल सेवाओं के सदस्यों के रूप में की है।

गुरुवार को इजरायल ने संयुक्त राष्ट द्वारा की गई इस कार्रवाई की निंदा किया। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में रूस के संबंध में गंभीर खुलासे करते हुए बताया गया है कि रूसी सशस्त्र बलों और जेल सेवाओं द्वारा कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्रों के साथ-साथ स्वयं रूस के भीतर भी यौन हिंसा को अंजाम दिया गया।

यूक्रेन में मानवाधिकार निगरानी मिशन के आंकड़ों के आधार पर इस रिपोर्ट में संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा के 310 मामलों का उल्लेख किया गया है, जिनमें बलात्कार, जननांग विकृति और बिजली के झटके देना शामिल हैं। 

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