Adhik Purnima 2026: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना गया है. वर्ष में 12 पूर्णिमा तिथियां आती हैं, अर्थात हर महीने एक पूर्णिमा पड़ती है. इस दिन दान, पवित्र नदी में स्नान, मंत्र जाप, पूजा-पाठ और अन्य पुण्य कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है. जब यह पूर्णिमा तिथि तीन वर्ष में एक बार आने वाले अधिक मास में पड़ती है, तो इसे अधिक पूर्णिमा कहा जाता है.

इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने का भी विधान है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चंद्रदेव की पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है, आर्थिक समस्याओं से राहत मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. हालांकि, अर्घ्य देते समय कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है. कहा जाता है कि इस दिन की गई छोटी-सी गलती भी व्रत और पूजा के फल को कम कर सकती है.

चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि

  • पीतल या चांदी के लोटे में शुद्ध जल भरें.
  • उसमें थोड़ा-सा कच्चा दूध, अक्षत (चावल), सफेद फूल और थोड़ी-सी मिश्री डालें.
  • ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा का संबंध सफेद वस्तुओं से माना गया है.
  • चंद्रोदय के बाद चंद्रमा की रोशनी में खड़े हो जाएं.
  • लोटे को अपने सीने की ऊंचाई तक उठाकर धीरे-धीरे जल की धारा चंद्रमा को अर्पित करें.
  • अर्घ्य देते समय चंद्रदेव के मंत्रों का जाप करें.
  • अर्घ्य अर्पित करने के बाद अपने स्थान पर खड़े होकर तीन बार परिक्रमा करें और चंद्रदेव से सुख-समृद्धि एवं शांति की प्रार्थना करें.

भूलकर भी न करें ये गलतियां

अक्सर लोग अनजाने में पूजा और अर्घ्य के दौरान कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनसे पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता. इसलिए इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  • चंद्रमा को अर्घ्य देते समय जल की धारा सीधे आपके पैरों पर या किसी गंदे स्थान पर नहीं गिरनी चाहिए. इसे अशुभ माना जाता है. अर्घ्य देते समय नीचे एक साफ थाली या गमला रख लें, ताकि जल उसमें एकत्र हो जाए. बाद में उस जल को किसी पौधे की जड़ में अर्पित कर दें.
  • पूर्णिमा के दिन घर में सात्विक वातावरण बनाए रखें. इस दिन मांस, मदिरा, प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करना चाहिए.
  • अधिक मास में क्रोध करने, किसी का अपमान करने या कटु वचन बोलने से भी बचना चाहिए.
  • जो लोग पूर्णिमा का व्रत रखते हैं, उन्हें चंद्र दर्शन और चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलना चाहिए. बिना चंद्र दर्शन और अर्घ्य के पूर्णिमा व्रत अधूरा माना जाता है.

(Disclaimer): इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है। यहां दी गई ज्योतिष, वास्तु या धार्मिक जानकारी मान्यताओं और विभिन्न स्रोतों पर आधारित है। किसी भी उपाय, सलाह या विधि को अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के प्रमाणित विशेषज्ञ या विद्वान से परामर्श अवश्य लें

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