डेस्क: रात में नींद के दौरान अचानक पिंडलियों में तेज़ ऐंठन या खिंचाव उठना एक आम समस्या है, लेकिन जब यह दर्द होता है तो व्यक्ति को कुछ सेकेंड के लिए भी बुरी तरह परेशान कर देता है। यह समस्या अक्सर नींद में ही पकड़ लेती है और कई लोग दर्द से कराह उठते हैं। आमतौर पर यह दर्द कुछ ही मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन उस समय की तकलीफ काफी असहनीय होती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें खराब लाइफस्टाइल, शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी सबसे प्रमुख माने जाते हैं।
लेग क्रैंप्स आखिर होते क्या हैं
लेग क्रैंप्स तब होते हैं जब पिंडली की मांसपेशियां अचानक सिकुड़ जाती हैं या उनकी नॉर्मल मूवमेंट गड़बड़ा जाती है। इस दौरान नसों और मसल्स में तेज खिंचाव महसूस होता है। यह स्थिति आमतौर पर कुछ सेकेंड से लेकर कुछ मिनट तक रहती है, लेकिन दर्द इतना तेज होता है कि पूरा शरीर असहज हो जाता है।
नसों और ब्लड सर्कुलेशन की गड़बड़ी भी एक कारण
मायो क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, पैरों में आने वाले क्रैंप्स कई बार नसों की थकान और ब्लड फ्लो कम होने की वजह से होते हैं। जब मसल्स तक पर्याप्त खून नहीं पहुंचता, तो उनमें ऐंठन शुरू हो जाती है। इसके अलावा कुछ मेडिकल कंडीशंस जैसे डायबिटीज, थायराइड, लिवर से जुड़ी समस्या, एनीमिया या नर्व डैमेज में भी यह परेशानी ज्यादा देखने को मिलती है। कुछ मामलों में हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की दवाइयों के साइड इफेक्ट के रूप में भी यह समस्या सामने आ सकती है।
डिहाइड्रेशन और मिनरल्स की कमी बढ़ाती है समस्या
शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन भी लेग क्रैंप्स का बड़ा कारण है। जब शरीर में सोडियम, पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स का बैलेंस बिगड़ जाता है, तो मसल्स सही तरीके से काम नहीं कर पातीं। इसके साथ ही लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत पोस्चर, बहुत देर तक खड़े रहना या बिना स्ट्रेचिंग के एक्सरसाइज करना भी पिंडलियों में खिंचाव पैदा कर सकता है।
क्रैंप आने पर तुरंत क्या करें
अगर अचानक पिंडली में क्रैंप आ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। तुरंत प्रभावित हिस्से को धीरे-धीरे स्ट्रेच करें या हल्की मालिश करें। पैर को सीधा जमीन पर रखकर खड़ा होना या थोड़ी देर चलना भी दर्द को कम करने में मदद करता है। इससे मसल्स अपनी सामान्य स्थिति में लौट आती हैं और दर्द धीरे-धीरे कम हो जाता है।
बार-बार क्रैंप आने पर क्या करें
अगर यह समस्या बार-बार हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है ताकि असली कारण का पता चल सके। साथ ही डाइट में केला, दूध, दही, हरी सब्जियां और प्रोटीन युक्त भोजन शामिल करें। रोज हल्की स्ट्रेचिंग और एक्सरसाइज करें, पर्याप्त पानी पिएं और आरामदायक जूते पहनें। सोने से पहले हल्की मसल स्ट्रेचिंग करने से भी काफी राहत मिलती है।



















