भारत और ओमान के बीच वाणिज्यिक रिश्ते सदियों से चलते आ रहे हैं। दोनों देशों का एक साझा इतिहास प्राचीन नावों के पाल पर सवार होकर आगे बढ़ता रहा है और पीढ़ियों से चले आ रहे सांस्कृतिक आदान-प्रदान के जरिए कायम रहा है। भारत-ओमान व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता (सीईपीए) इस सभ्यतागत बंधन को और मजबूत करता है। एक ऐसे दौर में जब वैश्विक व्यापार भू-राजनैतिक प्रतिद्वंद्विताओं, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और बढ़ते संरक्षणवाद से जूझ रहा है, यह समझौता भरोसेमंद साझेदारों के साथ आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने के भारत के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। वर्ष 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद, यह सीईपीए खाड़ी देशों के साथ भारत की बढ़ती आर्थिक भागीदारी को मजबूती से स्थापित करता है।
द्विपक्षीय व्यापार में लगातार विस्तार हुआ है और वित्त वर्ष 2025-26 में यह 11.18 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है। जबकि, सेवाओं का व्यापार 2024 में 863 मिलियन अमेरिकी डॉलर का रहा। आर्थिक रिश्तों का विविधीकरण हुआ है और इसमें परंपरागत वस्तुओं से परे इंजीनियरिंग सामान, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं का समावेश हुआ है। फिर भी, काफी अनछुई संभावनाएं अभी भी बाकी हैं। वस्तुओं एवं सेवाओं के व्यापार, निवेश, पेशेवर आवाजाही और नियामकीय सहयोग को शामिल करके, यह सीईपीए अधिक सुदृढ़, समन्वित और व्यापक आर्थिक साझेदारी का एक व्यापक ढांचा तैयार करता है।
भारतीय निर्यात के विकास का प्रवेश द्वारा
इस सीईपीए के तहत ओमान की 98.08 प्रतिशत टैरिफ लाइनों पर भारतीय निर्यात को शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच हासिल है। इस समझौते से पहले, भारत के निर्यात का सिर्फ लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा ही सर्वाधिक तरजीह वाले देश (मोस्ट फेवर्ड नेशन) की व्यवस्था के तहत ओमान में शुल्क-मुक्त प्रवेश करता था, जबकि शेष पर 5 प्रतिशत तक का शुल्क लगता था। इस सीईपीए के तहत, भारत के वर्तमान निर्यात की 99.38 प्रतिशत मात्रा अब शुल्क-मुक्त प्रवेश का लाभ उठाएगी।
भारतीय निर्यातकों की दृष्टि से, ये लाभ काफी महत्वपूर्ण हैं। ओमान के ‘विजन 2040’ के तहत बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक विविधीकरण में उसके द्वारा किए जा रहे निवेश से मांग में वृद्धि होगी। वित्त वर्ष 2024-25 में 875.83 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के इंजीनियरिंग सामानों के निर्यात के 2030 तक बढ़कर 1.3 से 1.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के बीच होने का अनुमान है। शून्य शुल्क की सुविधा के जरिए वस्त्र एवं परिधान सेक्टर को क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धियों पर महत्वपूर्ण बढ़त मिलेगी। इससे तिरुपुर, सूरत, लुधियाना और कोयंबटूर जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी और साथ ही रोजगार भी सृजित होगा।
मौके व्यापक और विविध हैं। आयात पर निर्भर ओमान का दवा बाजार भारतीय कंपनियों के लिए मजबूत संभावनाएं पेश करता है। नियामकीय मंजूरियों में तेजी, गुणवत्ता प्रमाणपत्रों की मान्यता और प्रमुख उत्पादों के शुल्क-मुक्त पहुंच से अनुपालन संबंधी लागत में कमी आएगी और बाजार में पैठ बढ़ेगी। चावल, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, मसाले और कन्फेक्शनरी सहित कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण आधारित निर्यात को भी लाभ होगा।
खुलते बाजार, हितों का संरक्षण
भारत के हालिया व्यापार समझौतों के अनुरूप, इस सीईपीए में एक संतुलित और सुविचारित दृष्टिकोण का समावेश है। जहां एक ओर भारत प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने एवं वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में शामिल होने के लिए बाजारों को खोल रहा है, वहीं दूसरी ओर संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रहा है। दुग्ध तथा अनाज जैसे प्रमुख कृषि उत्पादों के साथ-साथ रबर, वस्त्र और जूते जैसे उद्योग सुरक्षित बने हुए हैं। यह दृष्टिकोण बाहरी बाजारों तक पहुंच और घरेलू कमजोरियों से बचाव को एक साथ जोड़ता है।
भारत ने ओमान से आयात होने वाले लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर लागू होने वाली अपनी 77 प्रतिशत से अधिक टैरिफ लाइनों को उदार बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे ओमान के प्रमुख निर्यातों, खासकर मेथनॉल और निर्जल अमोनिया जैसे औद्योगिक इनपुट को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। ओमान को धातुओं और मिश्र धातुओं की एक विस्तृत श्रृंखला में तरजीही बाजार पहुंच हासिल होगी। इससे हमारे दोनों देशों को कम उत्पादन लागत का लाभ उठाने में मदद मिलेगी।
जिन क्षेत्रों में भारत के रक्षात्मक हित हैं, उन क्षेत्रों में टैरिफ दर कोटा (टीआरक्यू) के जरिए ओमान को पहुंच प्रदान की गई है। यह व्यवस्था निर्दिष्ट मात्रा की सीमा के भीतर खजूर, संगमरमर और चुनिंदा पेट्रोकेमिकल जैसे उत्पादों के तरजीही निर्यात की अनुमति देती है। बेहद सावधानीपूर्वक तैयार किया गया जुड़ाव का यह तरीका प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत करने के साथ-साथ संक्रमण काल ​​के दौरान कमजोर क्षेत्रों को सहायता भी प्रदान करता है।
व्यापार, प्रतिभा और विश्वास
यह सीईपीए भारतीय सेवा प्रदाताओं को उन सभी क्षेत्रों में बाध्यकारी प्रतिबद्धताएं प्रदान करता है, जहां भारत की स्थिति स्पष्ट रूप से मजबूत है। इनमें आईटी, पेशेवर सेवाएं और निर्माण क्षेत्र शामिल हैं। विभिन्न क्षेत्रों में शत-प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देने वाले प्रावधानों के साथ, भारतीय कंपनियों को ओमान में अपनी उपस्थिति का विस्तार करने के अधिक मौके मिलेंगे।
प्रतिभाओं की दृष्टि से भी, यह समझौता एक बड़ी उपलब्धि है। कंपनी के भीतर स्थानांतरित कर्मचारियों (इंट्रा-कॉरपोरेट ट्रांसफरी) की सीमा को 50 प्रतिशत तक बढ़ाकर, भारतीय कंपनियों को अब विशिष्टता प्राप्त कर्मचारियों को आसानी से तैनात करने तथा बाजार में अपनी मजबूत उपस्थिति को और अधिक मजबूत करने की सुविधा मिल गई है। इसके अलावा, किसी भी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) में पहली बार, ओमान ने स्वतंत्र पेशेवरों के लिए एक समर्पित आवाजाही की व्यवस्था स्थापित की है। अब जबकि वैश्विक स्तर पर जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण कारखानों में श्रमिकों की कमी हो रही है और आधुनिक मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर एआई एवं रोबोटिक्स के साथ जुड़ रहा है, ऐसे में यह प्रावधान भारतीय प्रतिभाओं के लिए दुनिया भर में एक सशक्त मिसाल कायम करता है।
इस सीईपीए में समर्पित स्वास्थ्य सेवा का एक परिशिष्ट भी शामिल है, जो आयुर्वेद जैसी पारंपरिक प्रणालियों को मुख्यधारा की स्वास्थ्य सेवा में शामिल करने में सुविधा प्रदान करता है। साथ ही, यह चिकित्सा पेशेवरों के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को भी सुव्यवस्थित करता है। इसके अलावा, एक अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा समझौते से संबंधित बातचीत से भविष्य में भारतीय प्रवासी समुदाय को दोहरे योगदान के बोझ से बचाया जा सकेगा।
क्षेत्रीय मूल्य श्रृंखलाओं का निर्माण
भारत-ओमान सीईपीए नियामकीय सहयोग, सामंजस्यपूर्ण मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं के जरिए गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करके टैरिफ से परे जाता है। यह भारत के आधुनिक व्यापार समझौतों से जुड़े उच्च मानकों को दर्शाता है और सीमा के भीतर मौजूद वाणिज्य में रुकावट डालने वाली विभिन्न बाधाओं को दूर करता है।
भारत एक बेहद ही एकीकृत क्षेत्रीय व्यापार संरचना की नींव रख रहा है। भारत के मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से जुड़े सभी साझेदार मिलकर अब वैश्विक जीडीपी का लगभग 67 प्रतिशत और वस्तुओं एवं सेवाओं के वैश्विक आयात का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा हैं। खाड़ी, पूर्वी अफ्रीका और व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र के मिलन बिंदु पर स्थित, ओमान को एक अनूठी भौगोलिक हैसियत हासिल है। सोहार, दुक्म और सलालाह जैसे ओमान के लॉजिस्टिक्स व औद्योगिक केन्द्र भारत की मैन्यूफैक्चरिंग संबंधी विशेषज्ञता एवं प्रतिभाओं को व्यापक मध्य पूर्व और अफ्रीका के साथ जोड़कर मूल्य श्रृंखलाओं को एकीकृत कर सकते हैं। इसका परिणाम क्षेत्रीय संपर्क और विकास के लिए निर्मित एक साझेदारी के रूप में सामने होगा।
व्यापार समझौते तभी सफल होते हैं जब वे भरोसा पैदा करते हैं, व्यवसायों को निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, श्रमिकों को नए कौशल हासिल करने के लिए प्रेरित करते हैं और अर्थव्यवस्थाओं को स्थायी साझेदारी बनाने के लिए आगे बढ़ाते हैं। यह सीईपीए ठीक यही काम कर रहा है। यह सदियों पुराने रिश्ते को इक्कीसवीं सदी की हकीकतों के अनुरूप एक रणनीतिक आर्थिक साझेदारी में परिवर्तित कर रहा है। * (लेखक वाणिज्य विभाग के सचिव हैं)


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