एक महोदय उवाच- मैं उस देश में रहने पर शर्मिंदा हूं, जहां शासक दल जनतंत्र को खत्म करने पर तुला हुआ है। फिर एक भविष्यवक्ता महोदय कहिन- एक साल बाद ये सरकार गिर जाएगी… लेकिन गिरी तो तृणमूल कांग्रेस गिरी! खबर आई कि तृणमूल कांग्रेस के ऋतव्रत बनर्जी के नेतृत्व में अट्ठावन विधायक एक ‘नई तृणमूल कांग्रेस’ बनाने जा रहे हैं। वे अध्यक्ष को पत्र दे रहे हैं और अपने को असली तृणमूल कांग्रेस बता रहे हैं।
फिर तमिलनाडु के भाजपा
नेता खबर बनाने लगते हैं कि वे भाजपा से अलग पार्टी बनाने वाले हैं। फिर वे दिल्ली आकर भाजपा नेताओं से मिलते हैं। मीडिया उछालता है कि वे अलग पार्टी बनाने वाले हैं। फिर कई दिन बाद खबर आती है कि वे भाजपा से अलग हो रहे हैं। यहां भी वही कि ‘एक कुर्सी की नजर दूसरे की कुर्सी पर’।
फिर एक चैनल ईद के दिन वाले कुछ वीडियो दिखाने लगता है, जिनमें कुछ युवक एक अन्य युवक को बुलाते हैं कि बकरा कैसे कटता है, वह इसे आकर देखे। जब वह बकरे का कटना देखने से आनाकानी करता है, तो बाकी युवक चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर देते हैं। हत्या के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ती दिखती है। फिर एक दिन खबर आती है कि हत्या का आरोपी मुठभेड़ में मारा गया। एक चर्चा में एक प्रवक्ता अपनी चिंता प्रकट करती है कि इन युवाओं में इतनी हिंसा क्यों बढ़ रही है!
इसी बीच पटना के दो कोचिंग सेंटर के मालिकों के टकराव की कहानी विद्यार्थियों के टकराव में बदल जाती है। गोलियां चलती हैं… पत्थरबाजी होने लगती है। पुलिस कार्रवाई करती है। कुछ उपद्रवियों को गिरफ्तार करती है। इन एक कोचिंग सेंटर के संचालक पड़ोस के दूसरे कोचिंग सेंटर पर आरोप लगाते हैं कि वहां से गोली चलवाई गई है, लेकिन दो दिन बाद एक खबर आती है कि गोली दूसरे कोचिंग वाले ने नहीं चलाई, बल्कि आरोपकर्ता के सुरक्षा कर्मियों से चलवाई गई है।
कोचिंग कारोबार और परीक्षा घोटालों का कनेक्शन
सच क्या है, यह सब तो जांच से ही सामने आ सकता है, लेकिन इस एक घटना से साफ है कि पेपर लीक मामले में कोचिंग सेंटरों का हाथ होता है। हर बार की ‘पेपर लीक’ कोचिंग केंद्रों की ओर इशारा तो करती है, लेकिन कोई इन पर हाथ नहीं डालता, क्योंकि इनके पीछे करोड़ों का कारोबार खड़ा है, जिसके पीछे कोचिंग माफिया खड़ा रहता है। इसीलिए इनको बंद नहीं किया जाता है।
इसी बीच मालवीय नगर के एक होटल-सह-रेस्तरां में आग लग जाती है और इक्कीस लोगों की जान चली जाती है। गद्दे की दुकान वाला पड़ोसी अपने गद्दे लगा देता है, जिन पर कूदकर कुछ लोग जान बचा पाते हैं। लापरवाही की हद यह कि न रेस्तरां में अग्निशमन का जरूरी बंदोबस्त है, न बाहर निकलने के रास्ते हैं। बहुत से लोग भाग नहीं पाते और अंदर घुटकर मर जाते हैं।
रिपोर्टर और एंकर साफ कहते हैं कि ऐसे होटलों के मालिक सिर्फ पैसा बनाते रहते हैं। इजाजत थी छह कमरे बनाने की, लेकिन बना डाले पच्चीस। पूरी दिल्ली में कई होटल इसी तरह से ‘अनधिकृत’ और मनमाने तरीके से बने हैं। जब कोई ऐसी घटना हो जाती है, तब प्रशासन में कुछ हरकत होती है। फिर सब सो जाते हैं और अगले अग्निकांड का इंतजार करने लगते हैं..!
इसके बाद आती है ‘काकरोच जी’ के 6 जून को दिल्ली आने की खबर। एक-एक चैनल काकरोच के नेताओं को उवाचते दिखते हैं कि मैं अपने देश, अपने घर आ रहा हूं… शिक्षामंत्री से इस्तीफा मांगने आ रहा हूं। एक सत्ता प्रवक्ता तुरंत कहता है कि जी हां, एक जोकर आ रहा है..! एक विश्लेषक कहिन कि लगता है काफ्का की कहानी वाला ‘काकरोच’ कहानी से निकल ‘जंतर-मंतर’ पर आ रहा है। एक कहिन कि इसका गुस्सा ‘अल्गोरिद्म’ पर पलता है… तीसरा कहिन कि यह व्यवस्था कचरा हो चुकी है… कचरे में काकरोच ही बनते हैं। चौथा कहिन कि काकरोच को पहली नजर में ही आदमी चप्पल से मारता है।
एक ने कहा कि जेन-जी ने तमिलनाडु में विजय को जिता दिया है। फिर एक दिन एक वैश्विक अहंकारी कह उठता है कि इस नेतन्याहू को मैंने बचाया हुआ है, वरना इसे तो इसकी जनता ही निपटा देती।
बहरहाल, इस बीच कर्नाटक का ‘कुर्सी नाटक’ खूब चला। एक चाहते थे कि दूसरा कुर्सी छोड़े, लेकिन दूसरा कहता था कि वे तो छोड़ दें, लेकिन कुर्सी उनको छोड़े तब न! इस नाटक को देख इन दिनों बार-बार आने वाला वह विज्ञापन याद आता रहा, जिसका मुख्य पात्र कहता रहता है कि दुनिया में हर एक की नजर दूसरे की कुर्सी पर। जैसे सिपाही की नजर थानेदार की कुर्सी पर… कि बाबू की नजर अफसर की कुर्सी पर… जैसे कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री की नजर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर..! जिस पर किसी की नजर नहीं, वह कुर्सी बेमानी है।
तृणमूल कांग्रेस के सांसद यूसुफ पठान ने कहा कि ममता बनर्जी ने कभी भी उनसे लोकसभा सीट छोड़ने के लिए नहीं कहा है। पार्टी के किसी नेता ने उन्हें ऐसा कोई मैसेज नहीं दिया है। एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने सौरव गांगुली से कहा है कि वह यूसुफ को लोकसभा सीट छोड़ने के लिए मनाएं। भारतीय टीम के पूर्व खिलाड़ी यूसुफ पठान ने एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो में पठान ने कहा, “पिछले कई दिनों से एक न्यूज बहुत तेजी से वायरल हो रही है कि ममता बनर्जी ने यूसुफ पठान से कहा कि बहरामपुर लोकसभा सीट से इस्तीफा दे दें, ताकि वो वहां से लोकसभा का चुनाव लड़ सकें। मुझे ममता बनर्जी ने कभी भी ये बात नहीं की। हमारी लास्ट मीटिंग भी हुई थी वहां पर भी उन्होंने मुझसे यह बात नहीं कही।” -सुधीश पचौरी



















