पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस संकट से गुजर रही है। विधानसभा में पार्टी की दो फाड़ होने के बाद अब संसद में भी पार्टी टूट सकती है। टीएमसी के करीब 20 विधायकों ने एक पत्र लिखकर मोदी सरकार को समर्थन देने की बात कही हैं। टीएमसी के बाद अब बीजेपी की नजर NDA की सहयोगी पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) पर है।

बीजेपी में विलय को लेकर बढ़ा तनाव

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरएलएम के तीन विधायक आलोक कुमार सिंह, रामेश्वर महतो और माधव आनंद बीजेपी के संपर्क में थे। इंडियन एक्सप्रेस ने बीजेपी सूत्रों के हवाले से दावा किया कि उपेंद्र कुशवाहा को इसी साल राज्य सभा भेजते समय उनसे RLM का बीजेपी में विलय करने का आश्वासन लिया गया था। इसके अलावा जब दीपक प्रकाश को दोबारा मंत्री बनाने पर विचार हुआ, तब भी पार्टी नेतृत्व ने विलय का मुद्दा उठाया था। हालांकि, उपेंद्र कुशवाहा ने साफ कहा है कि वे केवल किसी पद के लिए अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय नहीं करेंगे।

NDA में घटता प्रभाव

एक समय उपेंद्र कुशवाहा को एनडीए का बड़ा नेता माना जाता था, लेकिन अब प्रभाव कम होता नजर आ रहा है। जब से सम्राट चौधरी बिहार के सीएम बने हैं, उसके बाद से कुशवाहा की राजनीतिक भूमिका भी सीमित होती गई।  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी ने 6 में से 4 सीटें जीती थी और अपनी मौजूदगी दर्ज कराई थी। वहीं NDA के पास भारी बहुमत होने के कारण पार्टी की सौदेबाजी की ताकत काफी कमजोर मानी जा रही है।

उपेंद्र कुशवाहा को दिया झटका

बिहार विधान परिषद चुनाव में बीजेपी ने अपने सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा को बड़ा झटका दिया है। विधान परिषद के लिए 18 जून को मतदान होगा। बिहार सरकार में मंत्री और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश को एनडीए ने प्रत्याशी नहीं बनाया है। ऐसे में उनका मंत्री पद भी जाना तय माना जा रहा है, क्योंकि दीपक प्रकाश ने विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। लेकिन सम्राट कैबिनेट में उन्हें जगह दी गई थी। इसके बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि दीपक प्रकाश को MLC बनाया जा सकता है। 

दीपक प्रकाश ने क्या कहा? 

NDA द्वारा एमएलसी प्रत्याशी नहीं बनाए जाने पर दीपक प्रकाश की तरफ से प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि उन्हें NDA नेतृत्व के आशीर्वाद से मंत्री बनाया गया था और जब तक नेतृत्व का भरोसा बना रहेगा, वे मंत्री बने रहेंगे। हालांकि उन्होंने MLC टिकट नहीं मिलने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

पार्टी के अंदर दीपक प्रकाश का हुआ था विरोध

बता दें कि दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने के बाद आरएलएम के अंदर विरोध देखने को मिला था। पार्टी के चार में से तीन विधायकों ने आरोप लगाया था कि उपेंद्र कुशवाहा परिवारवाद को बढ़ावा दे रहे हैं। विधायकों का कहना था कि खुद कुशवाहा राज्य सभा सांसद हैं, उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा विधायक हैं और अब बेटे को भी मंत्री बना दिया गया, जबकि वे न विधायक हैं और न ही विधान परिषद के सदस्य। इसके अलावा, मंत्री बनाए जाने के फैसले के विरोध में पार्टी के सात नेताओं ने इस्तीफा भी दिया था।

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