दिल्ली विश्वविद्यालय की सहायक प्रोफेसर देबोस्मिता पाल की हत्या के मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच से संकेत मिले हैं कि यह वारदात किसी अचानक हुए विवाद या आवेश का परिणाम नहीं थी, बल्कि इसकी कई महीनों तक सुनियोजित तरीके से तैयारी की गई थी। जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी रामप्रसाद दास ने हत्या से पहले प्रोफेसर के घर, उनकी दिनचर्या और सोसायटी की गतिविधियों की रेकी की थी। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने वारदात को अंजाम देने से पहले इलाके की पूरी जानकारी जुटाई और उसके बाद अपनी अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे के साथ दिल्ली पहुंचा योजना को अंजाम दिया।

पूर्वी जिला DCP ने बताया कि जांच में सामने आया है कि पश्चिम बंगाल के बर्धमान का रहने वाला रामप्रसाद दास काफी समय से इस अपराध की योजना बना रहा था। सैनिटरी सामान के कारोबार से जुड़े होने के कारण उसका दिल्ली के करोल बाग क्षेत्र में अक्सर आना-जाना होता था। इसी दौरान उसने प्रोफेसर के आवास और उनकी गतिविधियों पर नजर रखना शुरू कर दिया था। पुलिस के अनुसार, आरोपी पहली बार जनवरी 2026 में वसुंधरा एनक्लेव पहुंचा था, जहां उसने सोसायटी के बाहरी हिस्से का निरीक्षण किया और इलाके की जानकारी जुटाई। इसके बाद मार्च 2026 में वह दोबारा दिल्ली आया। इस दौरान उसने सोसायटी के अंदर जाकर प्रोफेसर के फ्लैट तक पहुंचने वाले रास्तों, सुरक्षा व्यवस्था और वारदात के बाद संभावित भागने के मार्गों का बारीकी से अध्ययन किया।

पैतृक संपत्ति विवाद बना हत्या की वजह

अधिकारियों के अनुसार, इस सनसनीखेज हत्याकांड की जड़ पश्चिम बंगाल के बर्धमान स्थित एक पैतृक संपत्ति से जुड़ा विवाद था, जो समय के साथ इतना बढ़ गया कि उसने हत्या का रूप ले लिया। पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त के मुताबिक, वर्ष 2023 में मुख्य आरोपी रामप्रसाद दास देबोस्मिता पाल की पैतृक संपत्ति में किरायेदार के रूप में रहने लगा था। शुरुआत में उसने मकान की पहली मंजिल किराये पर ली थी, लेकिन बाद में अपने सैनिटरी सामान के कारोबार के लिए ग्राउंड फ्लोर का भी इस्तेमाल करने लगा। जांच में सामने आया है कि रामप्रसाद दास लगातार प्रोफेसर देबोस्मिता पाल पर उक्त संपत्ति बेचने का दबाव बना रहा था। हालांकि, प्रोफेसर ने मकान बेचने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया था। पुलिस का कहना है कि इसी संपत्ति विवाद के चलते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया और यही विवाद आगे चलकर हत्या की मुख्य वजह बन गया।

वाट्सएप से संपर्क कर साजिश को दिया अंजाम

पुलिस के अनुसार आरोपी रामप्रसाद दास ने 1 जून को व्हाट्सएप के माध्यम से प्रोफेसर से संपर्क किया था। इसके दो दिन बाद, 3 जून को वह अपनी पत्नी बनाश्री और नाबालिग बेटे के साथ दिल्ली पहुंचा। पुलिस जांच के मुताबिक, सुबह करीब 11:30 बजे परिवार ने एक होटल में कमरा लिया, जहां कुछ समय रुकने के बाद आरोपी ने कपड़े बदले और दोपहर करीब 3 बजे वहां से निकल गया। इसके बाद वह सीधे प्रोफेसर के वसुंधरा एनक्लेव स्थित आवास पहुंचा। पुलिस के अनुसार, मुलाकात के दौरान संपत्ति को लेकर दोनों के बीच बातचीत हुई। जांच में सामने आया है कि जब देबोस्मिता पाल ने मकान बेचने से इनकार किया और आरोपी को संपत्ति खाली करने की चेतावनी दी, तो विवाद बढ़ गया। पुलिस का आरोप है कि इसके बाद रामप्रसाद दास ने प्रोफेसर पर एक भारी घरेलू वस्तु से हमला कर दिया। जांच एजेंसियों के अनुसार, वारदात में उसकी पत्नी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी प्रमाणों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं।

पहचान छिपाने बारबार बदले कपड़े

वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी रामप्रसाद दास और उसकी पत्नी ने कथित तौर पर अपने कपड़े बदल लिए और घटनास्थल से निकल गए। जांच में सामने आया है कि इसके बाद दोनों कैब के जरिए आनंद विहार रेलवे स्टेशन पहुंचे और वहां कुछ समय रुकने के बाद ऑटो से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की ओर रवाना हुए। पुलिस का दावा है कि यात्रा के दौरान आरोपियों ने एक बार फिर कपड़े बदले, ताकि उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाए। जांच अधिकारियों के मुताबिक, दोनों ने रेलवे यात्रा के लिए रिजर्व कोच की बजाय जनरल डिब्बे का इस्तेमाल किया। पुलिस का मानना है कि ऐसा कथित तौर पर अपनी पहचान छिपाने और निगरानी से बचने के उद्देश्य से किया गया।

1400 किलोमीटर दूर से परिवार सहित पहुंचा आरोपी

आरोपी रामप्रसाद दास पश्चिम बंगाल से करीब 1400 किलोमीटर की दूरी तय कर अपने परिवार के साथ दिल्ली पहुंचा था और कथित तौर पर पूर्व नियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। जांच अधिकारियों का कहना है कि आरोपी ने हत्या से पहले कई महीनों तक प्रोफेसर के आवास, उनकी दिनचर्या और सोसायटी की सुरक्षा व्यवस्था की रेकी की थी। इसके बाद वह अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे के साथ दिल्ली आया और योजना के अनुसार घटनाक्रम को अंजाम दिया। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि रामप्रसाद दास का नाम केवल इस हत्या के मामले में ही नहीं, बल्कि कथित ठगी और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में भी सामने आया है। पुलिस का दावा है कि वह लंबे समय से लोगों को विभिन्न तरीकों से झांसा देकर बड़ी रकम हड़पने का काम करता रहा है।

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