ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता पूरा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के इस 14-सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद युद्ध का स्थायी अंत हो गया है। हालांकि इसमें पाकिस्तान की भूमिका को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा है।
पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के लिए झटका
रमेश ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, “इस शांति समझौते को ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ कहा जाना पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय अहमियत और वैश्विक प्रभाव को दिखाता है। यह वही देश है जिसे नवंबर 2008 में मुंबई आतंकी हमले के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था। ईरान-अमेरिका शांति समझौते में पाकिस्तान की भूमिका प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति के तौर-तरीकों और उसकी असलियत, दोनों के लिए एक बड़ा झटका है। पाकिस्तान अब वेस्ट एशिया के भू-राजनीतिक और सुरक्षा ढांचे में और भी गहराई से शामिल हो गया है, जिसके भारत के लिए गंभीर और परिणाम हो सकते हैं।”
अगले 60 दिन होंगे बहुत अहम
रमेश ने आगे लिखा, “अगर इस समझौते को उसकी सही भावना और शर्तों के साथ लागू किया जाता है, तो यह एक बड़ी कामयाबी होगी। लेकिन इसमें दोनों पक्षों की तरफ से गलतफहमी पैदा होने की गुंजाइश भी है। ऐसे में अगले 60 दिन बहुत अहम होंगे।”
मुश्किल हालात में भी डटा रहा ईरान
रमेश ने आगे लिखा, “इस समझौते से ईरान को काफी फायदे हुए हैं। ईरान ने अपनी मज़बूती और मुश्किल हालात में भी डटे रहने की क्षमता साबित की है। गल्फ देशों ने ईरान के जवाबी हमलों का सबसे ज़्यादा असर झेला है और इस समझौते का सावधानी से स्वागत किया है, लेकिन वो निश्चित रूप से दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करेंगे।”
इज़रायल के प्रति पीएम मोदी की दोस्ती देश को पड़ रही है भारी
रमेश ने आगे लिखा, “यह समझौता इज़रायल के पीएम के लिए एक हार है, जो अभी भी इसे कई तरीकों से नाकाम कर सकते हैं। बेंजामिन नेतन्याहू अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अकेले पड़ गए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने भी उनके प्रति अपना गुस्सा और निराशा सबके सामने जाहिर की है। सिर्फ पीएम मोदी ही नेतन्याहू के कदमों का लगातार समर्थन कर रहे हैं। इज़रायल के प्रति पीएम मोदी की यह दोस्ती हमारे देश को बहुत भारी पड़ रही है।”
अमेरिका के लिए झटका है यह समझौता
रमेश ने आगे लिखा, “यह समझौता अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने इज़रायल के साथ मिलकर 28 फरवरी, 2026 को ईरान के खिलाफ़ कई बड़े लक्ष्यों के साथ युद्ध शुरू किया था, जो पूरे नहीं हो पाए। सेना की ताकतों की सीमाएं एक बार फिर दुनिया के सामने आ गई हैं। पीएम मोदी का ट्रंप को लगातार खुश करने की कोशिश करना, जिसका हालिया सबूत पीएम मोदी-ट्रंप की द्विपक्षीय मीटिंग के बारे में विदेश मंत्रालय का बयान है, शर्मनाक और देश-विरोधी है।”



















