पिछले महीने, प्रधानमंत्री ने आज की कठिन वैश्विक परिस्थितियों में भारत की आर्थिक स्थिति की गंभीरता पर बल दिया था। कुछ मायनों में, स्थिति 1990-91 की याद दिलाती है। तब, अमरीका-ईराक युद्ध ने वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में भारी वृद्धि कर दी थी और इस प्रकार भारत जैसे सभी प्रमुख तेल-आयातक देशों को व्यापार की शर्तों ने एक गंभीर झटका दिया था। आज, अमरीका और इसराईल द्वारा ईरान पर 3 महीने के बड़े हमले और परिणामस्वरूप होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से तेल की कीमतें 50 प्रतिशत से अधिक बढ़ गई हैं, जो भविष्य में और भी बढ़ सकती हैं, क्योंकि वैश्विक स्तर पर सरकारी और निजी स्टॉक कम हो रहे हैं।
1990-91 तक, कम निर्यात और उच्च राजकोषीय घाटे के साथ-साथ विदेशी निजी निवेश के प्रति एक मजबूत नीतिगत अरुचि के कारण भारत का भुगतान संतुलन पहले से ही गंभीर दबाव में था। 2025-26 तक, माल निर्यात में भारत की हिस्सेदारी गिरकर सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) का 11 प्रतिशत रह गई थी, जो कि 2011-14 में औसतन 17 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर थी। इस अवधि के दौरान माल निर्यात में इस भारी गिरावट का भुगतान संतुलन के चालू खाता घाटे पर प्रभाव, सेवा निर्यात में उछाल और विदेशों से आने वाले धन (रेमिटैंस) की उछाल के कारण छिपा रहा। लेकिन हाल ही में, बड़े पैमाने पर ऊर्जा के झटके और तेल एवं गैस के भुगतान में संबंधित उछाल ने माल निर्यात में लंबे समय से चली आ रही कमजोरी को उजागर कर दिया है।
जी.डी.पी. में इसकी हिस्सेदारी में गिरावट का रुझान कई कारकों के कारण रहा है, जिनका प्रभाव समय के साथ बदलता रहा है। अक्सर कम करके आंका जाने वाला एक कारण 2014 से भारत के सीमा शुल्क शुल्कों में निरंतर, लागत बढ़ाने वाली वृद्धि रही है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यू.टी.ओ.) के आंकड़े बताते हैं कि गैर-कृषि वस्तुओं के लिए, 10-15 प्रतिशत की श्रेणी में टैरिफ लाइनों की हिस्सेदारी 2014 और 2024 के बीच 1.4 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर 33.5 प्रतिशत हो गई और 15-25 प्रतिशत की श्रेणी के लिए 1.7 प्रतिशत से बढ़कर 14.9 प्रतिशत हो गई जबकि 0-10 प्रतिशत की श्रेणी में टैरिफ लाइनों की हिस्सेदारी इसी अवधि में 90.5 प्रतिशत से तेजी से गिरकर 42.5 प्रतिशत रह गई।
भुगतान संतुलन के पूंजी खाते में, पिछले 3 वर्षों में शुद्ध विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफ.डी.आई.) में सालाना 30-40 बिलियन डॉलर के स्तर से घटकर औसतन केवल 6 बिलियन डॉलर की महत्वपूर्ण गिरावट ने भुगतान संतुलन पर समग्र दबाव को और बढ़ा दिया है। इस भारी गिरावट का अधिकांश हिस्सा रीपेट्रिएशन (पूंजी वापस ले जाने) और आऊटबाऊंड निवेश (विदेशों में निवेश) दोनों में उछाल के कारण है, जो संभवत: घरेलू निवेश के माहौल में गिरावट का संकेत देता है। 2025-26 में जी.डी.पी. का लगभग 7.7 प्रतिशत का संयुक्त राजकोषीय घाटा स्पष्ट रूप से 1990-91 की तुलना में बेहतर है। लेकिन प्रमुख विकासशील देशों और हमारे अपने इतिहास (जैसे कि 2005-08 में) की तुलना में यह अभी भी काफी अधिक है। 80 प्रतिशत से अधिक के हमारे सरकारी ऋण-टू-जी.डी.पी. अनुपात के साथ, यह पैंतरेबाजी के लिए बहुत कम राजकोषीय गुंजाइश छोड़ता है।
सकारात्मक पक्ष पर, सरकार और आर.बी.आई. ने बाजार-उत्तरदायी विनिमय दर को अवमूल्यन होने दिया है, जिसमें विदेशी मुद्रा भंडार के उपयोग द्वारा गिरावट को धीमा करने के कुछ प्रयास शामिल हैं। यह 1990-91 से बिल्कुल अलग है, जब भारत में एक निश्चित (मुद्राओं की एक अज्ञात टोकरी से जुड़ी) दर प्रणाली थी। कम सकारात्मक बात यह है कि सरकार उपयोगकत्र्ताओं को तेल, गैस और उर्वरक की बढ़ती कीमतों का बोझ सौंपने में धीमी रही है और इसकी बजाय कर कटौती, तेल और गैस-विपणन कंपनियों के बढ़ते नुकसान, बढ़ते उर्वरक अनुदान और दुर्लभ ऊर्जा की अनौपचारिक राशङ्क्षनग के विभिन्न रूपों के मिश्रण को प्राथमिकता दे रही है। कुछ दिन पहले, सरकार और आर.बी.आई. ने सरकारी बांडों में विदेशी संस्थागत निवेशकों को मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ पर करों को समाप्त करके और अनिवासी भारतीय (एन.आर.आई.) की एक श्रेणी की नई जमाओं को हेजिंग लागत वहन करके विनिमय जोखिम से बचाकर अधिक विदेशी उधार को प्रेरित करने के लिए एक कार्यक्रम की घोषणा की।
इन नीतिगत प्रतिक्रियाओं की सामान्य विशेषताएं सरकार द्वारा उच्च राजकोषीय घाटा उठाने की इच्छा और भुगतान संतुलन पर दबाव को कम करने के लिए अधिक विदेशी उधार का सहारा लेना रही हैं। वे एक बाहरी ऊर्जा झटके के शुरुआती जवाबों के रूप में न्यायसंगत हैं, जो निर्यात, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और घाटे एवं ऋण के राजकोषीय मापदंडों में मौजूदा कमजोरियों के ऊपर आया है। यदि 2025-26 का वर्ष 1990-91 की याद दिलाता है, तो आशा करें कि 2026-27 हमें 1991-92 की याद दिलाएगा, जब आॢथक नीति बढ़े हुए विदेशी और घरेलू उधार से वास्तव में गंभीर नीतिगत सुधारों की एक विस्तृत शृंखला को लागू करने की ओर स्थानांतरित हो गई थी।-शंकर आचार्य
Related Posts
Add A Comment
chhattisgarhrajya.com
ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
Important Page
© 2025 Chhattisgarhrajya.com. All Rights Reserved.



















