हैदराबाद: भारत के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। भारत के खजाने में चार चांद लगाने जा रहा है दक्षिण भारत का एक राज्य। यह राज्य है आंध्र प्रदेश। दरअसल, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने 24 जून को कुरनूल जिले के जोन्नागिरी में 405 करोड़ रुपये के सोने की माइनिंग और प्रोसेसिंग प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। इसके साथ ही राज्य में कमर्शियल स्तर पर सोने का उत्पादन शुरू हो गया है। इसके शुरू होने से कर्नाटक की सरकारी हुट्टी खदानों की लगभग पूरी मोनोपॉली टूट गई है, जो अभी देश के घरेलू सोने के उत्पादन का 99% हिस्सा बनाती हैं। इस प्रोजेक्ट की शुरुआत से खुश होकर मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा-आंध्र प्रदेश अब सिर्फ अन्नपूर्णा नहीं, बल्कि रत्नगर्भा भी है।
जोन्नागिरी प्रोजेक्ट: पहले चरण में 600 एकड़ में खनन
- आजादी के बाद से भारत की एकमात्र चालू प्राइवेट-सेक्टर प्राइमरी गोल्ड माइन (सोने की खदान) के तौर पर पहचाना जाने वाला जोन्नागिरी प्रोजेक्ट देश के माइनिंग सेक्टर में एक अहम उपलब्धि है।
- जियो मैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और डेक्कन गोल्ड माइन्स लिमिटेड द्वारा विकसित यह प्रोजेक्ट अपने पहले चरण में 600 एकड़ जमीन को कवर करता है। बाद में, राज्य सरकार द्वारा आवंटित 1,500 एकड़ जमीन पर इसका कामकाज बढ़ाया जाएगा।
- मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को प्रोडक्शन यूनिट का उद्घाटन किया और दूसरे चरण का काम शुरू किया। टीडीपी सरकार ने उत्पादन फिर से शुरू होने के मौके पर जोग्नागिरी गांव का नाम बदलकर स्वर्णगिरी कर दिया। इसका असली नाम सुवर्णगिरी था, जिसका मतलब है ‘सोने का पहाड़’।
- नायडू ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘यह प्रोजेक्ट न सिर्फ रायलसीमा के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए विकास का इंजन बनेगा।’ उन्होंने कहा कि राज्य में सोने के उत्पादन से विदेशी मुद्रा बचाने और स्थानीय युवाओं को मौके देने में मदद मिलेगी।
- उन्होंने कहा, ‘…सोने की खदान का शुरू होना इस इलाके के पुराने गौरव की वापसी का प्रतीक है।’
पहले साल 400 किलो सोने का उत्पादन
- मई में ट्रायल प्रोडक्शन सफलतापूर्वक पूरा हो गया, जिससे बड़े पैमाने पर कमर्शियल कामकाज शुरू करने का रास्ता साफ हो गया। उम्मीद है कि यह फैसिलिटी अपने कामकाज के पहले साल में 400 किलोग्राम सोना पैदा करेगी, जो भारत के घरेलू सोने के उत्पादन का लगभग 20% होगा। दूसरे साल से सालाना उत्पादन बढ़कर 900 किलोग्राम हो जाएगा।
- पूरी तरह से विस्तार होने के बाद इस खदान से सालाना दो टन तक सोना निकाला जा सकता है। मुख्यमंत्री ने समारोह में प्रोजेक्ट के दूसरे चरण की आधारशिला भी रखी।
- 405 करोड़ रुपये के निवेश से शुरू हुए इस प्रोजेक्ट से आंध्र सरकार को उत्पादित सोने की कीमत पर 4 फीसदी रॉयल्टी मिलेगी। मौजूदा उत्पादन स्तर पर यह सालाना लगभग 57 करोड़ रुपये होगी।
700 लोगों को सीधे मिलेगा रोजगार
- इस प्रोजेक्ट से लगभग 700 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है। इसमें काम करने वाले 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग स्थानीय निवासी होंगे। इस प्रोजेक्ट से राज्य सरकार को रॉयल्टी के तौर पर अच्छी-खासी कमाई होगी।
- सोने की कीमत पर चार प्रतिशत रॉयल्टी के हिसाब से आंध्र प्रदेश को शुरुआती 400 किलोग्राम उत्पादन से लगभग 57 करोड़ रुपये और सालाना उत्पादन 900 किलोग्राम तक पहुंचने पर लगभग 144 करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिल सकती है।
आंध्र प्रदेश का मतलब सिर्फ अन्नपूर्णा नहीं है.. बल्कि रत्नगर्भा भी है। इस इलाके के खनिज भंडार इसका सीधा उदाहरण हैं। मुझे उम्मीद है कि यह जोन्नागिरी गोल्ड फील्ड इस इलाके के लिए विकास का इंजन बनेगा।
एन चंद्रबाबू नायडू, मुख्यमंत्री आंध्र प्रदेश
सम्राट अशोक के बाद से नहीं निकाला गया सोना
जोन्नागिरी प्रोजेक्ट आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में भारत के पहले प्राइवेट-सेक्टर गोल्ड माइनिंग प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई। इस खदान में आखिरी बार तीसरी सदी BCE में सम्राट अशोक के शासनकाल में सोना निकाला गया था।
भारत के गोल्ड माइनिंग मैप में आया आंध्र
- इस पहल से आंध्र प्रदेश भारत के गोल्ड माइनिंग मैप पर आ गया है। अब तक यह क्षेत्र पारंपरिक रूप से कर्नाटक की कोलार गोल्ड फील्ड्स (जो अब बंद हो चुकी है) से जुड़ा रहा है।
- जोन्नागिरी इलाके में सोने के भंडार का पता तब चला जब हीरे मिलने के बाद जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने विस्तृत सर्वे किया। लगभग तीन दशकों तक चली जियोलॉजिकल स्टडीज से जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागीदिराय गांवों में व्यावसायिक रूप से फायदेमंद भंडार होने की पुष्टि हुई।
भारत अभी 1.5 टन सोने का प्रोडॅक्शन करता है
भारत अभी हर साल लगभग 1.5 टन सोने का प्रोडॅक्शन करता है, जो देश की कुल सालाना खपत का महज 1 फीसदी है। ऐसे देश में जहां पारंपरिक रूप से धन-दौलत की चमक को बिना कुछ सोना जमा किए अधूरा माना जाता है।



















