पुणे में 4 साल की बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले को भीमराव कांबले को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. रिकॉर्ड 59 दिनों में इस दिल दहला देने वाली घटना के दोषी को सजा सुनाई गई. 1 मई को पुणे के नसरापुर गांव में भीमराव कांबले ने 4 साल की बच्ची को कुछ खाने का सामान देकर बाड़े में ले जाकर उसके साथ दरिंदगी की थी. इस मामले में आज पुणे की अदालत ने POCSO की तीन धाराओं के तहत आरोपी को फांसी की सजा सुनाई. 65 साल के भीमराव कांबले पर अपहरण, बलात्कार, छेड़छाड़ और हत्या सहित कुल सात मामले दर्ज थे. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 137 पन्नों का अंतिम फैसला तैयार किया. 

65 साल के आरोपी ने 4 साल की बच्ची के साथ की थी दरिंदगी

इस मामले में आरोपी के खिलाफ सभी 7 आरोप पूरी तरह से साबित हो चुके थे. 65 वर्षीय आरोपी भीमराव प्रभाकर कांबले ने अपना जुर्म कबूल कर लिया था. इस मामले में अंतिम 26 जून को पुणे की विशेष अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया था. न्यायालय ने अपने निर्णय को तय करने के लिए देश के पूर्व न्यायिक मामलों का आधार लिया है, जिनमें बलात्कार और अमानवीय हत्या जैसे जघन्य अपराधों के लिए पहले भी दोषियों को फांसी की सजा दी जा चुकी है. 

बछड़ा दिखाने का झांसा देकर शेड में ले गया था आरोपी

घटना एक मई को शाम तीन बजे से चार बजे के बीच हुई थी. आरोप है कि कांबले पुणे जिले के नसरापुर गांव में बच्ची को खाने की चीजें दिलाने और मवेशी का बच्चा (बछड़ा) दिखाने का झांसा देकर अपने साथ ले गया था. वह उसे मवेशियों के बाड़े के पास एक शेड में ले गया, जहां उसने बच्ची का यौन शोषण किया और फिर उसका मुंह दबाकर व छाती पर गंभीर चोटें पहुंचाकर उसकी हत्या कर दी थी.
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (विशेष न्यायाधीश) एस. आर. सालुंखे ने आरोपी भीमराव कांबले को अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के लिए दोषी ठहराया.
विशेष लोक अभियोजक अजय मिसर ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अपहरण, छेड़छाड़, दुष्कर्म और हत्या के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की कई धाराओं के तहत लगाए गए सभी आरोपों को अदालत में साबित किया.

पुणे का यह केस रेयर ऑफ द रेयरेस्ट मामला

लोक अभियोजक अजय मिसर ने बताया कि अदालत ने माना है कि कांबले पर सभी आरोप पूरी तरह से साबित हुए. हालांकि आरोपी ने अपराध से इनकार करते हुए दावा किया था कि बच्ची को मवेशी का बच्चा दिखाते समय फिसल कर गिर जाने से चोटें आई थीं, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने उसके इस दावे को झूठा साबित कर दिया. उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष ने अदालत में यह दलील देने के लिए उच्चतम न्यायालय के 12 ऐतिहासिक फैसलों का सहारा लिया कि यह मामला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी में आता है.

39 मिनट तक बच्ची के साथ की थी दरिंदगी

मिसर ने कहा, “हमने अदालत के सामने पीड़िता की कम उम्र और उस पर 39 मिनट तक लगातार किए गए बर्बर हमले का विवरण रखा. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बच्ची के शरीर पर 18 चोटों के निशान पाए गए थे.” उन्होंने कहा कि ऐसे पुख्ता साक्ष्य मिले हैं जिनसे यह साबित हुआ कि आरोपी ने ही बच्ची के साथ यह हैवानियत की थी.

सीसीटीवी फुटेज में बच्ची को ले जाता दिखा था आरोपी

विशेष लोक अभियोजक ने बताया कि अदालत ने सीसीटीवी फुटेज, डीएनए प्रोफाइलिंग, चिकित्सीय साक्ष्य, यौन क्षमता (पोटेंसी) परीक्षण और मानसिक स्थिति (साउंडनेस) परीक्षण को पूरी तरह प्रमाणित मानते हुए साक्ष्य के रूप में स्वीकार कर लिया. मिसर ने यह भी बताया कि जिन बच्चों ने आरोपी को बच्ची को अपने साथ ले जाते हुए देखा था, उन्होंने पहचान परेड के दौरान भी आरोपी की स्पष्ट पहचान की. आरोपी ने पहले भी 62 वर्षीय एक महिला, 17 वर्षीय एक किशोरी के साथ दरिंदगी की थी. 

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