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रायपुर। सूरजपुर निवासी की राज्य से बाहर रांची में आत्महत्या के प्रकरण में परिजनों ने राज्य महिला आयोग में मृतका के मृत्यु पर कार्रवाई करने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया गया था। उक्त प्रकरण में उपस्थित मृतक के सहपाठियों ने मृतक छात्रा के संबंध में अध्यक्ष को विस्तारपूर्वक जानकारी दी। दोनों पक्षो को सुनने के बाद प्रकरण को नस्तीबद्ध किया गया। इसके पश्चात उपस्थित छात्राओं को अध्यक्ष ने महिला आयोग के संबंध में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। अध्यक्ष ने छात्राओं को महिला अधिकारों से अवगत कराते हुए, इन अधिकारों का भविष्य में गलत उपयोग नहीं करने की सलाह दी। एक अन्य प्रकरण में पति-पत्नी आपसी सहमति से विवाह बंधन से मुक्त होने पर सहमति दी। विवाह बंधन से मुक्त होने के लिए पति ने पत्नि को एकमुश्त भरण पोषण की राशि नौ लाख रुपए को सहर्ष देने पर सहमत हुए। आयोग ने दोनों पक्षो को निर्देशित किया कि भविष्य में इस प्रकरण से संबंधित आवेदन कहीं और प्रस्तुत नही किया जाएगा। इस शर्त के उल्लंघन पर आयोग द्वारा जारी आदेश स्वमेव निरस्त माना जाएगा।

इसी तरह एक अन्य प्रकरण में महिला द्वारा बिना तलाक के आर्य समाज में दूसरी शादी करने को गंभीर अपराध माना। इसके लिए आयोग के अध्यक्ष ने महिला को न्यायालय के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने कहा। इसके साथ-साथ महिला को उनके दोनों बच्चों से मिलने के लिए महिला के सुविधानुसार अधिवक्ता की मध्यस्थता में एक घंटा मिलने देने पर सहमत हुए। इसी तरह तीन माह पूर्व विवाह संबंध में बंधे दम्पति आयोग की समझाइस पर भी एक साथ रहने सहमत नही होने पर, उन्हें न्यायालय के शरण में जाने की सलाह दी गई। एक अन्य प्रकरण में आयोग के अध्यक्ष ने महिला और बुजुर्ग के अधिकारों का सम्मान करने की बात कही। बच्चे अपने कर्तव्यों से दूर न भागे। माता-पिता की संपत्ति पर उनके बच्चों का अधिकार होता है। यह अधिकार माता-पिता के जीवित होने पर इच्छा के विरुद्ध बच्चों को नही दिया जा सकता। आयोग के समक्ष प्रस्तुत ऐसे प्रकरण जो पहले से पुलिस या न्यायालय में दर्ज किया जा चुका है, ऐसे प्रकरणों को नस्तीबद्ध किया गया। इसी तरह अतिक्रमण, निजी संस्थानों में वेतन, नियुक्ति आदि के संबंध में अनावश्यक आवेदन देकर आयोग का समय बर्बाद न करें। ऐसे विविध मामलों की लिए शासन द्वारा अलग संस्थान है, जहाँ पर प्रकरण को प्रस्तुत किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने आज विभिन्न जिलों की महिलाओ द्वारा दिए गए आवेदनों की आयोग कक्ष में जन सुनवाई की। आज प्रस्तुत प्रकरण में शारीरिक शोषण, मानसिक प्रताडऩा, दहेज प्रताडऩा, सम्पत्ति विवाद आदि से संबंधित थे। सुनवाई के दौरान सोसल डिस्टेंसिंग व फिजीकल डिस्टेंसिंग एवं सैनिटाईजर का प्रयोग करते हुए कार्यवाही प्रारंभ की गई।

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