पिछले सप्ताह, 19 जून को, शिवसेना ने अपनी 60वीं वर्षगांठ मनाई। अपनी स्थापना के बाद से, पिछले 60 वर्षों में, पार्टी ने कई विभाजन देखे हैं, जिनमें से नवीनतम 26 जून को हुआ। शिव सेना की 60वीं वर्षगांठ को 2 गुटों-ठाकरे की सेना (यू.बी.टी.) और एकनाथ शिंदे की सेना द्वारा विवादित माना जा रहा है, जिनमें से प्रत्येक पार्टी की मूल वैचारिक विरासत का दावा कर रहा है।

26 जून को, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यू.बी.टी.) के भीतर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक दरार तब उभरी, जब उसके 9 लोकसभा सांसदों में से 6 ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ शिवसेना गुट में शामिल होने के लिए पाला बदल लिया। इससे लोकसभा में उनकी संख्या केवल 3 रह गई और शिंदे गुट की संसदीय ताकत मजबूत हो गई है। अपने 60 वर्षों में, शिवसेना 5 बार विभाजित हो चुकी है, जो आंतरिक विभाजनों के प्रति इसकी भेद्यता और इस तरह के संघर्षों के प्रभावी प्रबंधन की आवश्यकता को उजागर करता है। 2003 में पार्टी संस्थापक बाल ठाकरे द्वारा अपने बेटे उद्धव को सेना का कार्यकारी अध्यक्ष नामित करने से ठीक पहले, पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उनके लिए एक प्रमुख संगठनात्मक भूमिका की मांग शुरू कर दी थी। बाद में, उद्धव के बेटे आदित्य ठाकरे की सेना में पदोन्नति ने भी इसी तरह का रास्ता अपनाया, जहां पार्टी नेताओं ने उन्हें युवा सेना प्रमुख नियुक्त किए जाने से पहले ‘अगली पीढ़ी’ के चेहरे के रूप में प्रस्तुत किया।

28 नवंबर, 2019 को, शिवसेना के नेता और महा विकास अघाड़ी (एम.वी.ए.) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। 21 जून, 2022 को, विधानसभा में शिवसेना के नेता एकनाथ शिंदे कई अन्य विधायकों के साथ लापता हो गए। इस ‘बागी’ समूह ने पहले सूरत और फिर गुवाहाटी का रुख किया, यह दावा करते हुए कि एम.वी.ए. गठबंधन शिवसेना की विचारधारा के विपरीत है और मुख्यमंत्री ठाकरे में विश्वास की कमी व्यक्त की। 2022 के विभाजन के बाद, 56 में से 40 शिवसेना विधायक शिंदे के साथ हो गए। लोकसभा में, 18 में से 13 सांसद शिंदे खेमे में शामिल हो गए, जिससे उद्धव के पास केवल 5 सांसद बचे। दोनों गुट बाल ठाकरे की राजनीतिक विरासत के सही उत्तराधिकारी होने का दावा करते हैं, जिसमें उद्धव अपने रक्त संबंध पर जोर देते हैं और शिंदे का तर्क है कि वह पार्टी की वैचारिक नींव को बनाए रखते हैं।

शिवसेना यू.बी.टी. में नवीनतम विभाजन ठाकरे परिवार के भविष्य पर महत्वपूर्ण सवाल उठाता है। यह कई तरह से सामने आ सकता है-बागी नेताओं के बीच ठाकरे के नेतृत्व से असंतोष के कारण असहमति बढ़ रही है। उनका मानना है कि उन्होंने उनके साथ पर्याप्त जुड़ाव नहीं रखा, विशेष रूप से समर्थन के अनुरोधों के बावजूद उनके निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा न करके। विभाजन के बाद की चुनौतियों से निपटने और उद्धव गुट के अस्तित्व और पुनरुत्थान को सुनिश्चित करने के लिए, कई रणनीतिक कार्यों पर विचार किया जा सकता है : 

शिकायतों को हल करने और समर्थकों के बीच एकता और विश्वास को बहाल करने की तत्काल आवश्यकता है। यदि गुट विभाजन और बदलती जनभावनाओं को स्वीकार करने में विफल रहता है, तो वे भविष्य में अपना प्रभाव खोने का जोखिम उठाते हैं। विश्वसनीय और संबंधित नेताओं का समर्थन आत्मविश्वास को प्रेरित, नए समर्थकों को आकॢषत कर सकता है और मौजूदा आधार को ऊर्जावान बना सकता है। रोजगार, शिक्षा और बुनियादी ढांचे जैसे प्रमुख मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने से समर्थकों को सशक्त बनाया और उनका समर्थन हासिल किया जा सकता है। स्थानीय मुद्दों को संबोधित करने वाली आऊटरीच पहल और अभियान विश्वास और सांझा उद्देश्य की भावना को बढ़ावा दे सकते हैं। सांस्कृतिक विरासत का लाभ उठाना और सामाजिक गतिविधियों में संलग्न होना क्षेत्रीय पहचान और जनता के बीच सद्भावना को मजबूत कर सकता है। बदलती राजनीतिक भावनाओं और युवा पीढ़ी की अपेक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होना प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है।

इस अवधि के दौरान आंतरिक सामंजस्य को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। आंतरिक संघर्षों को तेजी से हल करना और एक समावेशी वातावरण बनाना समर्थकों के बीच आशा और जिम्मेदारी की सांझी भावना को प्रेरित कर सकता है, जिससे पार्टी की एकता और लचीलापन मजबूत होगा।इन रणनीतियों को लागू करके, उद्धव गुट जीवित रह सकता है और महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से प्रभाव हासिल कर सकता है। कोई भी गुट चुनावी रूप से आत्मनिर्भर नहीं है-शिंदे भाजपा की मशीनरी पर निर्भर है, जबकि उद्धव एम.वी.ए. के संयुक्त वोट शेयर पर। इसलिए, आगामी विधानसभा चुनाव इस बात की असली परीक्षा होगी कि शिवसेना का कौन-सा गुट जीवित रहता है। अंतत:, परिणाम काफी हद तक उनके रणनीतिक निर्णयों और महाराष्ट्र के उभरते राजनीतिक परिदृश्य के प्रति प्रतिक्रिया करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करता है। उनके द्वारा किए गए चुनाव ठाकरे परिवार और पार्टी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होंगे।-कल्याणी शंकर

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