एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर कांग्रेस नेता और कर्नाटक के गृहमंत्री प्रियांक खरगे ने बुधवार को केंद्र सरकार को जमकर घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण, सार्वजनिक परामर्श और आम सहमति के इस ईंधन को लागू कर 3.6 करोड़ भारतीयों को एक प्रयोग का हिस्सा बना दिया गया।

प्रियांक खरगे ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने जवाब में स्वीकार किया है कि एथेनॉल मिश्रण के प्रभाव का आकलन अभी जारी है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पर्याप्त सार्वजनिक चर्चा और सहमति के बिना ही इस नीति को लागू कर दिया। इसको लेकर उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर लिखा, ‘कुछ दिन पहले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने खुली चुनौती देते हुए कहा था, ‘दुनिया में कहीं भी ऐसा एक वाहन दिखाइए जिसे E20 पेट्रोल से समस्या हुई हो।’ लेकिन केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि ‘एथेनॉल मिश्रण एक प्रयोग है, इसके नतीजे अगले साल आएंगे।’ यानी 3.6 करोड़ भारतीयों पर एक प्रयोग किया जा रहा है। इस पर गंभीरता से सोचिए। एक तरफ मंत्री पूरी दुनिया को चुनौती दे रहे हैं, दूसरी तरफ सरकार अदालत में स्वीकार कर रही है कि उसे खुद इसके परिणाम नहीं पता।’

उन्होंने आगे लिखा, ‘इस बीच हमारी सड़कों पर वास्तविकता यह है कि माइलेज लगातार घट रहा है, आम लोगों की मेहनत की कमाई पहले से ज्यादा तेजी से ईंधन में खर्च हो रही है, इंजन खराब हो रहे हैं और मरम्मत का खर्च परिवारों पर भारी पड़ रहा है। भारत में हर 10 में से 9 वाहन E20 के अनुकूल नहीं हैं। यानी करीब 3.6 करोड़ वाहन प्रभावित हो सकते हैं।’

प्रियांक खरगे बोले- पहले साबित कीजिए, फिर लागू कीजिए

कर्नाटक के गृहमंत्री ने अपने सोशल पोस्ट में इसे वापस लिए जाने की मांग करते हुए आगे लिखा, ‘यह नीति बिना आम सहमति, बिना सार्वजनिक परामर्श और बिना किसी जवाबदेही के लागू की गई। आप राष्ट्रीय स्तर पर ईंधन में इतना बड़ा बदलाव लागू करने के बाद इसे प्रयोग नहीं कह सकते। जब आपका अपना डेटा अभी पूरा नहीं है, तब नागरिकों से नुकसान साबित करने की चुनौती भी नहीं दे सकते। आम लोग कोई प्रयोगशाला के गिनी पिग नहीं हैं, हमारी सड़कें परीक्षण ट्रैक नहीं हैं और हमारी जेबें आपके परीक्षण का बजट नहीं हैं। पहले इसे साबित कीजिए, फिर लागू कीजिए। E20 को वापस लिया जाए।’

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने क्या कहा था?

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पिछले सप्ताह स्पष्ट किया था कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है। सरकार इसकी लगातार निगरानी कर रही है। मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर E20 पेट्रोल को लेकर भ्रामक और बेबुनियाद दावे फैलाए जा रहे हैं। मंत्रालय के अनुसार, सरकार ने पाया है कि पुराने वीडियो और तस्वीरों को दोबारा साझा कर लोगों में अनावश्यक भ्रम और चिंता पैदा करने की कोशिश की जा रही है।

गौरतलब है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम की शुरुआत वर्ष 2003 में कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। यह कार्यक्रम तकनीकी तैयारी और विभिन्न हितधारकों से परामर्श के आधार पर चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। वर्ष 2023 से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की शुरुआत की गई।

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