राजस्थान में मंत्रियों और दूसरे बड़े नेताओं के बेटों व परिवार के अन्य सदस्यों वाले राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन यानी आरसीए की एडहॉक को आज हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. हाईकोर्ट ने 28 महीने पहले गठित हुई एडहॉक कमेटी को भंग करते हुए यहां प्रशासक की नियुक्ति कर दी है. हाईकोर्ट ने राज्य के सीनियर आईएएस अफसर भास्कर सावंत को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का इंचार्ज नियुक्त करते हुए उन्हें खेल गतिविधियों को जारी रखने और 3 महीने में चुनाव कराने के निर्देश दिए हैं.
यह फैसला राजस्थान हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच ने राजीव प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर अंतरिम फैसला सुनाते हुए जारी किया है. राजीव प्रताप सिंह की पीआईएल में कहा गया था कि मौजूदा एडहॉक कमेटी का गठन 28 मार्च 2024 को 3 महीने के लिए किया गया था. कमेटी को राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का चुनाव कराकर उसे सभी शक्तियां सौंपनी थी.
ग्यारह बार कमेटी का कार्यकाल बढ़ा
राजस्थान के सहकारिता विभाग ने ग्यारह बार कमेटी का कार्यकाल बढ़ा दिया था. दो दिन पहले भी कार्यकाल बढ़ाया गया है. अदालत में इसे लेकर गहरी नाराजगी जताई है और सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार से इस बात का जवाब देने को कहा है कि क्यों ना मनमाने तरीके से काम करने और अदालत का आदेश नहीं मानने के मामले में उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए. हाईकोर्ट इस मामले में 27 जुलाई को फिर से सुनवाई करेगा. अगली सुनवाई में प्रशासक नियुक्त किए गए आईएएस अफसर भास्कर सावंत को चुनाव को लेकर पूरा प्लान कोर्ट के सामने पेश करना होगा.
भास्कर सावंत की देखरेख में होंगी गतिविधियां
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पीयूष नाग के मुताबिक नए चुनाव होने तक क्रिकेट की गतिविधियां प्रशासक भास्कर सावंत की देखरेख में जारी रहेंगी. उन्हें ही नए चुनाव कराने होंगे और नए पदाधिकारियो को कार्यभार सौंपना होगा. क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारियो ने हाईकोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है. भरतपुर क्रिकेट एसोसिएशन के पूर्व सचिव शत्रुघ्न तिवारी का कहना है कि नेताओं के परिवार वालों ने खेल की संस्था पर काबिज होकर मनमाने तरीके से काम किया है. खेल के नाम पर खिलवाड़ करने की कोशिश की है। हाईकोर्ट के दखल के बाद अब सुधार होने की उम्मीद है.
गौरतलब है कि एडहॉक कमेटी में कन्वीनर से लेकर सभी सदस्य राजनेताओं के परिवार से हैं. कोई मंत्री का बेटा है तो कोई सांसद और दूसरे नेताओं के परिवार का सदस्य है. एडहॉक कमेटी में जगह पाने को लेकर नेताओं के परिवार वालों में होड़ मची रहती है. हाईकोर्ट का डंडा चलने के बाद अब क्रिकेट एसोसिएशन में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है.



















