राजस्थान के अलवर शहर में 16 अगस्त को प्रस्तावित केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के दौरे से ठीक तीन दिन पहले बुधवार को ऐसा घटनाक्रम हुआ, जिसने राज्य की भजनलाल शर्मा सरकार के भीतर की खींचतान को सामने ला दिया. अलवर में वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री संजय शर्मा अपनी ही सरकार के अधिकारियों के खिलाफ धरने पर बैठ गए.
मामला 2012 की सफाईकर्मी भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं देने का है. मंत्री ने अधिकारियों के रवैये पर खुलकर नाराजगी जताई, उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए और साफ़ तौर पर कहा कि जब मंत्री की बात तक नहीं सुनी जा रही तो आम आदमी की सुनवाई कैसे होती होगी ?
सफाईकर्मियों की नियुक्ति का मामला
मंत्री संजय शर्मा का आरोप है कि राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद सफाईकर्मियों को नियुक्ति नहीं दी जा रही. उन्होंने कहा कि इस मामले को लेकर वह नगर निगम आयुक्त, जिला कलेक्टर, डीएलबी, संबंधित मंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं निकला. मंत्री के मुताबिक कई महीनों की प्रक्रिया के बाद 69 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर सहमति बनी थी, लेकिन बाद में अधिकारियों ने यह प्रक्रिया भी रोक दी.
डीएम पर गंभीर आरोप
संजय शर्मा ने मीडिया से बातचीत में जिला कलेक्टर डा० आर्तिका शुक्ला के रवैये पर भी गंभीर सवाल उठाए. उनका आरोप था कि उन्होंने कलेक्टर से बात की, लेकिन उनका रवैया सकारात्मक नहीं था और वह मामले को सुलझाने के लिए तैयार नहीं थीं. मंत्री ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि सफाईकर्मियों को नियुक्ति पत्र देने से फिर इनकार कर दिया गया है तो वह खुद नगर निगम कार्यालय पहुंचे और कर्मचारियों के साथ धरने पर बैठ गए. उन्होंने साफ कहा कि जब तक नियुक्ति पत्र नहीं मिलते, वह धरने से नहीं उठेंगे.
कांग्रेस ने साधा निशाना
मामला सामने आते ही कांग्रेस पार्टी ने बीजेपी सरकार पर सियासी हमला बोल दिया. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने वीडियो जारी कर कहा कि कांग्रेस जिस अफसरशाही की बात लगातार उठाती रही है, उसकी तस्वीर अब खुद सरकार के मंत्री के धरने से सामने आ गई है. जूली ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अधिकारियों का दबदबा इतना बढ़ गया है कि मंत्रियों तक की बात नहीं सुनी जा रही. उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूरे मामले पर जवाब मांगा और तंज कसा कि जब मंत्री को अपनी ही सरकार के अफसरों के खिलाफ सड़क पर बैठना पड़े तो सरकार चला कौन रहा है मंत्री या अफसर ?
अब यह विवाद सिर्फ सफाईकर्मियों की नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा. यह सरकार और अफसरशाही के बीच अधिकार और जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है. खास बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे से ठीक पहले सामने आया यह घटनाक्रम भाजपा के लिए राजनीतिक रूप से भी असहज स्थिति पैदा कर रहा है.



















