Guru Purnima 2026: हमारी संस्कृति में गुरु को भगवान से भी ऊपर का दर्जा दिया गया है, क्योंकि गुरु ही हमें सही और गलत का रास्ता दिखाते हैं. यही वजह है कि हर साल आषाढ़ महीने की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा का त्योहार पूरे देश में बड़े ही आदर और उत्साह के साथ मनाया जाता है. यह दिन सिर्फ शिक्षकों के लिए नहीं है, बल्कि माता-पिता या हर उस इंसान के प्रति आभार जताने का मौका है जिसने हमें जीवन में सही राह दिखाई हो.
इस साल पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 28 जुलाई 2026 को शाम 6 बजकर 18 मिनट पर हो रही है, जो अगले दिन 29 जुलाई 2026 को रात 8 बजकर 5 मिनट पर समाप्त होगी. उदया तिथि को मानते हुए देश भर में गुरु पूर्णिमा का पर्व 29 जुलाई को ही मनाया जाएगा.
गुरु पूर्णिमा में पूजा और सम्मान का सही तरीका
ऋषिकेश के ज्योतिषी अखिलेश पांडेय ने बताया कि इस दिन सुबह जल्दी उठकर नहा-धोकर साफ कपड़े पहनने चाहिए और अपने गुरु का ध्यान करना चाहिए. अगर आपके गुरु आपके पास हैं, तो उनके पैर छूकर आशीर्वाद लें. अगर वे दूर रहते हैं, तो फोन या वीडियो कॉल के जरिए भी आप अपना आदर जता सकते हैं. इस दिन गुरु की सेवा करना और उनके बताए रास्ते पर चलने का संकल्प लेना बहुत शुभ माना जाता है. लोग इस दिन दान-पुण्य और पाठ-पूजा भी करते हैं.
गुरु को क्या उपहार देना होता है शुभ?
ज्योतिषी अखिलेश पांडेय बताते हैं कि गुरु पूर्णिमा पर दिए जाने वाले तोहफे की कीमत मायने नहीं रखती, बल्कि उसके पीछे का आपका आदर भाव सबसे जरूरी है. मान्यताओं के अनुसार आप अपने गुरु को किताबें, धार्मिक ग्रंथ, साफ कपड़े, फल, मिठाई, पेन या डायरी दे सकते हैं. इसके अलावा ज्ञान और तरक्की के प्रतीक के रूप में पौधा भेंट करना भी बहुत अच्छा माना जाता है. उपहार हमेशा दिखावे से दूर, सच्चे मन से देना चाहिए.
भूलकर भी न करें ये गलतियां
इसके अलावा इस पवित्र दिन पर किसी भी हाल में अपने गुरु का अपमान नहीं करना चाहिए. कड़वे बोल बोलना, गुस्सा करना, झूठ बोलना या किसी का दिल दुखाना इस दिन अच्छा नहीं माना जाता. अगर गुरु से किसी बात पर मतभेद भी हो, तब भी इस दिन पूरी विनम्रता बनाए रखें. अगर आपके जीवन में कोई प्रत्यक्ष गुरु नहीं हैं, तो आप अपने माता-पिता या शिक्षकों को गुरु मानकर उनके प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर कर सकते हैं.



















