नई दिल्ली। केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 44 दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर जारी किसानों के प्रदर्शन को अब राजनीतिक स्तर पर काफी समर्थन मिल रहा है। शनिवार को कांग्रेस ने किसान आंदोलन के समर्थन में देशभर में प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इसके तहत 15 जनवरी को सभी राज्यों में कांग्रेस के कार्यकर्ता राजभवनों का घेराव करेंगे। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शनिवार को किसानों के मुद्दे पर पार्टी महासचिवों और प्रभारियों के साथ बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इस बैठक में उन्होंने किसान संगठनों और सरकार के बीच हुई आठवें दौर की वार्ता के बेनतीजा रहने के लिए सरकार के अडिय़ल रवैये को जिम्मेदार ठहराया है। बैठक में इस बात की घोषणा की गई कि कांग्रेस किसान आंदोलन के समर्थन में तथा कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन करेगी। इसके तहत पार्टी कार्यकर्ता 15 जनवरी को सभी राज्यों के राजभवनों का घेराव कर किसान आंदोलन के प्रति समर्थन जाहिर करेंगे। सड़क पर उतरकर किसानों के लिए लड़ाई लडऩे के साथ काग्रेस सोशल मीडिया पर भी कैम्पेन चलाएगी। वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि केंद्र सरकार के मंत्री किसानों को सुप्रीम कोर्ट जाने की सलाह दे रहे हैं। ऐसे में मंत्रियों से पूछना चाहता हूं कि अघर कोर्ट केंद्र को कृषि कानूनों को वापस लेने का आदेश देता है तो क्या सरकार को ऐसा करेगी? और अगर सरकार ऐसा कर सकती है तो क्यों ना किसानों की समस्या को समझते हुए पहले ही ऐसे कदम उठाए जाएं। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को लगभग डेढ़ महीना हो गया है। इस बीच कृषि कानूनों को लेकर किसानों और सरकार के बीच उपजा विवाद आठ दौर की वार्ता के बाद भी समाप्त नहीं हो सका है। किसान संगठन अब भी तीनों कृषि कानून वापस लिये जाने की मांग पर अड़े हैं, जबकि सरकार का कहना है कि वो संशोधन के लिए तैयार है लेकिन कानून वापस लेने के लिए नहीं।

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