बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को होने वाला उपचुनाव राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस सीट से अभिषेक कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार इस सीट से चुनावी मैदान में उतरे हैं। वहीं महागठबंधन से यह मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी।
नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट
बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व विधायक नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई है। नितिन नवीन वर्ष 2010 से लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने करीब 52 हजार वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। मार्च 2026 में उनके राज्यसभा जाने के बाद इस सीट पर उपचुनाव की नौबत आई।
जेपी के लिए प्रतिष्ठा का सवाल
बांकीपुर सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। लगातार कई चुनावों से पार्टी यहां जीत दर्ज करती रही है। क्षेत्र में भाजपा का मजबूत संगठन और पारंपरिक वोट बैंक माना जाता है। यही वजह है कि इस उपचुनाव को भाजपा केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक साख से जुड़ा मुकाबला मान रही है। पार्टी इस सीट को हर हाल में अपने पास बनाए रखना चाहती है।

प्रशांत किशोर ने मुकाबला बनाया रोचक
जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। जन सुराज इस चुनाव को बदलाव की राजनीति के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी का फोकस स्थानीय मुद्दों जैसे ट्रैफिक जाम, जलजमाव, सफाई व्यवस्था, पार्किंग और रोजगार पर है।
राजनीतिक दलों की नजर परिणाम पर
इस उपचुनाव का असर केवल बांकीपुर तक सीमित नहीं रहेगा। यदि भाजपा सीट बरकरार रखती है तो वह इसे अपने संगठन और जनसमर्थन की जीत बताएगी। वहीं अगर परिणाम उसके पक्ष में नहीं आता है तो विपक्ष इसे भाजपा के खिलाफ जनमत के रूप में पेश करने की कोशिश करेगा। इसी वजह से बांकीपुर उपचुनाव बिहार की राजनीति में खास महत्व रखता है और सभी प्रमुख दलों की नजर इसके नतीजों पर टिकी हुई है।



















