श्री पीयूष गोयल

आज से, यूके को होने वाले भारत के लगभग सभी निर्यात पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगेगा। इससे हमारे छोटे व्यवसायों, किसानों, मछुआरों, नवोन्मेषकों, महिलाओं और श्रम-प्रधान उद्योगों के लिए बड़े अवसर खुलेंगे, क्योंकि परिवर्तनकारी ‘व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता’ (सीईटीए) आज से लागू हो रहा है।
यह भारत का सबसे व्यापक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) है और यह बड़ी संख्या में नौकरियों और व्यापार- अवसरों का सृजन करके समृद्धि लाएगा। इससे भारतीय निर्माताओं को धीरे-धीरे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा करने का मौका मिलेगा और हर नागरिक को प्रतिस्पर्धी कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाले सामान प्राप्त करने का लाभ मिलेगा। इससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत 2047 मिशन को भी तेज गति मिलेगी।
व्यवसायियों में उत्साह है। उनके पास यूके को माल भेजने के लिए विस्तृत योजनाएं हैं। रत्न और आभूषण निर्यातकों को उम्मीद है कि यूके को होने वाला निर्यात अगले तीन साल या उससे भी कम समय में 230% बढ़कर 2.5 अरब डॉलर हो जाएगा, जबकि इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यातकों को उम्मीद है कि अगले 4-5 सालों में यूके को होने वाली बिक्री लगभग दोगुनी होकर 7.5 अरब डॉलर तक पहुँच जाएगी।
पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए इस समझौते से, जो दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद है, लगभग 99% टैरिफ लाइनों पर शुल्क तुरंत समाप्त हो जाएगा। इसमें लगभग 100% व्यापार मूल्य शामिल है, जिससे भारतीय निर्यात, जो वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद पहले से ही तेज़ी से बढ़ रहा है, के लिए अपार अवसर पैदा होंगे।
युवा सोच, वैश्विक अवसर– यह जन-केंद्रित एफटीए 15 जुलाई से लागू हो रहा है, जो विश्व युवा कौशल दिवस भी है। 2015 में इसी दिन पीएम मोदी ने कौशल भारत मिशन की शुरुआत की थी, जो हमारे युवाओं को न सिर्फ भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने, योगदान देने और नेतृत्व करने में सक्षम बना रहा है।
भारतीय युवाओं के लाभ के लिए, यूके ने अब तक की अपनी सबसे व्यापक सेवा-संबंधी प्रतिबद्धता व्यक्त की है, जिसमें सभी प्रमुख सेवा क्षेत्र और भारत के लिए निर्यात की दृष्टि से महत्वपूर्ण 137 उप-क्षेत्र शामिल हैं। बेहतर बाजार पहुँच और नियामक स्पष्टता से भारतीय सेवा प्रदाताओं को आईटी और आईटी-सक्षम सेवाओं, वित्तीय सेवाओं, पेशेवर सेवाओं, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, इंजीनियरिंग, दूरसंचार और परामर्श सेवाओं में समर्थन मिलेगा।
रोज़गार के अवसर – युवाओं को रोज़गार के ज़्यादा मौके मिलेंगे, क्योंकि बेहतर पहुँच के साथ रत्न और आभूषण, वस्त्र, चमड़ा और जूते, जैविक रसायन, प्लास्टिक, वाहन कल-पुर्जे, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण जैसे श्रम-गहन क्षेत्र अपने कामकाज का विस्तार करेंगे।
कुल मिलाकर, वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं तक पहुंच को बढ़ावा देकर और प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार करके, सीईटीए भारतीय युवाओं को जरूरी कौशल और अवसर प्रदान करेगा, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सार्थक भूमिका निभा सकें और विकास में योगदान दे सकें।
सीईटीए का एक महत्वपूर्ण पहलू है, दोहरी योगदान व्यवस्था। यह ऐतिहासिक व्यवस्था, जो सीईटीए के साथ लागू हो रही है, भारतीय श्रमिकों और नियोक्ताओं को अस्थायी कार्य-भार के दौरान यूके में दोहरी सामाजिक सुरक्षा योगदान से छूट देती है।
कर्मचारियों के लिए अस्थायी विदेशी कार्य-भार पर निरंतर सामाजिक सुरक्षा कवरेज से 75,000 से अधिक भारतीय पेशेवरों और 900 से अधिक कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
स्थानीय स्तर पर उगाएं, वैश्विक स्तर पर बेचें – भारतीय किसानों को 37.5 बिलियन डॉलर के ब्रिटेन के बाजार तक आसान पहुंच से फायदा होगा। इससे भारतीय डेयरी उत्पादों, चाय, कॉफी, मसालों, फलों, सब्जियों, फलों के रस, मांस और प्रसंस्कृत कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यूके के लगभग 95% कृषि आयात भारत के लिए शुल्क- मुक्त होंगे। इस विशाल बाजार में निर्यात तीन वर्षों में 50% तक बढ़ सकता है। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और कृषि मूल्य श्रृंखला में रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि इस समझौते में डेयरी, सब्जियां, सेब, खाद्य तेल, जई (ओट्स), मोटे अनाज, कुकिंग ऑयल और अन्य जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों को पूरी सुरक्षा दी गई है और इन्हें संवेदनशील सूची में रखा गया है। इन वस्तुओं पर ब्रिटेन को कोई सीमा-शुल्क छूट नहीं दी गई है। ये अपवाद मोदी सरकार की खाद्य सुरक्षा, घरेलू मूल्य स्थिरता और कमजोर कृषि समुदायों को प्राथमिकता देने की रणनीति को दर्शाते हैं।
एसएमई – स्थानीय प्रयास, वैश्विक ताकत – पीएम मोदी ने हमेशा से भारत के लघु और मध्यम उद्यमों (एसएमई) को उच्च प्राथमिकता दी है। सीईटीए में महत्वपूर्ण एसएमई क्षेत्र की मदद के लिए एक विशेष अध्याय है, 2024-25 में भारत के कुल निर्यात में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 45.8% थी। सीईटीए कई प्रमुख प्रावधानों के साथ एसएमई की मदद करेगा, जैसे तेज सीमा-शुल्क प्रक्रिया, डिजिटल प्रणालियों और दस्तावेज रहित व्यापार को मान्यता देने और सुविधाजनक बनाने के समझौते।
बाजार तक प्राथमिक पहुंच के अलावा, एसएमई को व्यापार, शिक्षा और वित्त, डिजिटल कौशल, व्यवसायिक अवसंरचना और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़ी सर्वोत्तम प्रथाओं पर बढ़ते सहयोग का भी लाभ मिलेगा।
मछुआरों के लिए बड़ी खुशी – सीईटीए से भारत के मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है, जो लगभग 28 मिलियन लोगों की आजीविका का ज़रिया है।
बाज़ार तक बेहतर पहुँच और ज़्यादा निर्यात से आंध्र प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, ओडिशा और महाराष्ट्र के मछुआरों को लाभ होगा। इससे न सिर्फ़ भारत के मत्स्य निर्यात को मज़बूती मिलेगी, बल्कि मछुआरों की भलाई और आजीविका में भी मदद मिलेगी और तटीय इलाकों में आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
महिलाओं के लिए बड़ी जीत – यह ऐतिहासिक समझौता, जो पारंपरिक एफटीए से कहीं अधिक है, सतत और समावेशी आर्थिक विकास में महिलाओं के योगदान को मान्यता देता है। इसका उद्देश्य महिलाओं के लिए अवसर और लाभ को बढ़ावा देना है।
दोनों देशों ने महिलाओं की बाज़ार और उभरते क्षेत्रों तक पहुंच बढ़ाने, वित्तीय समावेश और साक्षरता को बढ़ावा देने, कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए समान अवसर प्रदान करने, और उनकी क्षमता और कौशल विकसित करने जैसी विभिन्न गतिविधियाँ का वादा किया है।
सीईटीए सिर्फ एक व्यापार समझौता नहीं है। यह भारत की क्षमताओं और आकांक्षाओं में विश्वास का एक वक्तव्य है। यह एक नए भारत को प्रतिबिंबित करता है, जो सिर्फ वैश्विक व्यापार में भाग ही नहीं ले रहा है, बल्कि इसे आकार देने में भी मदद कर रहा है। हमारे किसानों, मछुआरों, कामगारों, महिला उद्यमियों, एमएसएमई, पेशेवरों और युवाओं को सशक्त बनाकर, यह समझौता देश के प्रत्येक हिस्से में रह रहे हर भारतवासी को अवसर उपलब्ध कराएगा।
(लेखक केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री हैं)

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