नई दिल्ली। अंतरिक्ष के क्षेत्र में भारत ने नया परचम लहराया है। शुक्रवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से ‘विक्रम-1’ की लॉन्चिंग सफलतापूर्वक पूरी हुई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस की टीम को बधाई दी है।

श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर में मौजूद टीम से फोन पर बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि ‘यह मिशन एक आगमन है। इस आगमन को अभी और आगे बढ़ते जाना है।’

आपकी टीम में युवा दिख रहे हैं: पीएम मोदी 

पीएम मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापकों से बात करते हुए कहा, ‘सबसे पहले स्काईरूट एयरोस्पेस को पूरी टीम को बधाई। मैं इस सफलता से आनंदित महसूस कर रहा हूं। मैं इस पूरे कार्यक्रम को देख रहा था। आपकी पूरी टीम 20-30 साल की उम्र की दिखती है। ये मुझे और खुशी दे रही थी।’

उन्होंने आगे कहा, ‘शुरू में आपके चेहरे पर चिंता भी नजर आ रही थी, लेकिन फिर मैं देख रहा था कि खुशियों का माहौल है। मैं आपको, आपकी पूरी टीम को इस महत्वपूर्ण निर्णय और सफलता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।’

नौजवानों पर भरोसा करना चाहिए: पीएम 

पीएम मोदी ने कहा, ‘जब हम स्पेस सेक्टर का निजीकरण करना चाहते थे, तब सामने कई तरह की आशंकाएं थीं। लेकिन मैं इस दिशा में आगे बढ़ता गया। अब आपकी वजह से मेरे उस निर्णय को ताकत मिल गई है। मेरी टीम भी मानेगी कि हां देश के नौजवानों पर भरोसा करना चाहिए। उनको काम देना चाहिए और वो करके दिखाते हैं। आपने काम को करके दिखाया है। यह ‘मिशन आगमन’ है। इस आगमन को अभी और आगे बढ़ते जाना है।

लॉन्च के समय दोनों शीर्ष अधिकारी इसरो के मिशन कंट्रोल सेंटर (MCC) में मौजूद थे। उन्होंने कहा कि रॉकेट को पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन और तैयार किया गया था। प्रधानमंत्री ने विक्रम-1 के साथ ‘वंदे मातरम’ लिखा हुआ एक पोस्टकार्ड भी भेजा और स्काईरूट टीम को बताया कि यह मिशन मशहूर राष्ट्रीय गीत की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर हो रहा है। पीएम मोदी के ‘वंदे मातरम’ लिखे पोस्टकार्ड का ज़िक्र करते हुए कहा चंदना ने कहा, ‘आपका कार्ड सफलतापूर्वक ऑर्बिट तक पहुंच गया है।’

वंदे मातरम अब ऑर्बिट में है: एयरोस्पेस के CEO

वंदे मातरम अब ऑर्बिट में है। इस बातचीत के बाद, स्काईरूट एयरोस्पेस के CEO पवन कुमार चंदाना ने कहा, ‘प्रधानमंत्री को स्काईरूट के बारे में इतनी अच्छी बातें करते हुए सुनना बहुत खुशी की बात है। यह न सिर्फ स्काईरूट और भारत के लिए, बल्कि पूरे ग्लोबल स्पेस सेक्टर के लिए एक ऐतिहासिक पल है। हमने कुछ बहुत खास और अनोखा हासिल किया है। यह रॉकेट पूरी तरह से भारतीयों ने भारत में ही बनाया है।’

यह मिशन भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और श्रीहरिकोटा में एक नया अध्याय शुरू करता है। इससे पहले ISRO ने 46 साल पहले देश का पहला सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल, SLV-3, सफलतापूर्वक ऑर्बिट में भेजा था।

क्यों खास है ‘मिशन आगमन’?

‘मिशन आगमन’ के तहत, 23 मीटर ऊंचे और 1.7 चौड़े इस लॉन्च व्हीकल ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर के पहले लॉन्च पैड से दोपहर 12:05 बजे उड़ान भरी। रॉकेट ने पेलोड को लगभग 60 डिग्री के झुकाव पर 450 किलोमीटर की लो-अर्थ ऑर्बिट में पहुंचाया। इस तरह भारत के पहले प्राइवेट तौर पर विकसित ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल को परखने का मिशन का मुख्य मकसद पूरा हुआ।

‘विक्रम-1’ की खासियत

एडवांस्ड कार्बन-कंपोजिट स्ट्रक्चर से बना ‘विक्रम-1’ तीन-स्टेज वाला सॉलिड-फ्यूल लॉन्च व्हीकल है। इसमें कई सैटेलाइट्स को सही ऑर्बिट में पहुंचाने और तैनात करने के लिए दोबारा स्टार्ट होने वाला लिक्विड-फ्यूल ऑर्बिट एडजस्टमेंट मॉड्यूल (OAM) लगा है।

इसे लो-अर्थ ऑर्बिट में 350 किलोग्राम तक और सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट में लगभग 260 किलोग्राम तक वजन ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है।

इसका मकसद अर्थ ऑब्जर्वेशन, कम्युनिकेशन, साइंटिफिक और टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन मिशन के लिए छोटे सैटेलाइट्स के डेडिकेटेड और राइडशेयर लॉन्च के बढ़ते ग्लोबल मार्केट को टारगेट करना है।

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