राजधानी दिल्ली के द्वारका स्थित करगिल चौक के पास जंगल में मिले युवक के शव की गुत्थी आखिरकार पुलिस ने सुलझा ली है. इस हत्याकांड के पीछे जो वजह सामने आई है, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया. पुलिस का दावा है कि मकान मालिक अपने किरायेदार के सात वर्षीय बेटे को भविष्य में अपना वारिस बनाना चाहता था. इसी मंशा के चलते उसने अपने साथी के साथ मिलकर बच्चे के पिता की हत्या की साजिश रच डाली. वारदात का खुलासा 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और तकनीकी जांच के आधार पर हुआ.

दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों अनिल ठाकुर और राजू कुमार को गिरफ्तार किया है. दोनों मूल रूप से बिहार के निवासी हैं और नजफगढ़ के धर्मपुरा इलाके में रह रहे थे. पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी अनिल ठाकुर एक निजी बैंक में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत है. जांच के दौरान हत्या में इस्तेमाल किया गया हथौड़ा, दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन और वारदात के समय पहने गए कपड़े भी बरामद कर लिए गए हैं.

पुलिस ने तकनीकी जांच से जोड़ी हत्या की कड़ियां

इस हत्याकांड की जांच द्वारका नॉर्थ थाना और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने की. एसएचओ सुनील कुमार रोहिल्ला और स्पेशल स्टाफ प्रभारी कमलेश कुमार की निगरानी में पुलिस टीम ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के साथ घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे 500 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया. लगातार पड़ताल के बाद जांच की कड़ियां आरोपियों तक पहुंचीं.

पत्नी की मौत के बाद बेटे के साथ रह रहा था किरायेदार

जांच में सामने आया कि मृतक अखिलेश भी बिहार का रहने वाला था और वह आरोपी अनिल के मकान में किराये पर रहता था. करीब तीन महीने पहले कैंसर के कारण उसकी पत्नी की मौत हो गई थी. इसके बाद वह अपने सात वर्षीय बेटे के साथ वहीं रह रहा था. पुलिस का कहना है कि अकेले रहने वाला अनिल इसी बच्चे को भविष्य में अपना वारिस बनाना चाहता था और इसी सोच को सच करने की नीयत से उसने इस अपराध को अंजाम दे डाला.

शराब पिलाने का झांसा देकर सुनसान इलाके में ले गए

पुलिस जांच के मुताबिक 10 जुलाई को अनिल ने अपने साथी राजू के साथ मिलकर अखिलेश को शराब पीने के बहाने बुलाया. इसके बाद दोनों उसे करगिल चौक के पास जंगल की ओर ले गए. रास्ते में जब अखिलेश ने वहां जाने का कारण पूछा तो आरोपियों ने कहा कि मुख्य सड़क पर पुलिस चेकिंग चल रही है और चालान से बचने के लिए दूसरे रास्ते से चलना होगा. सुनसान स्थान पर पहुंचते ही दोनों ने हथौड़े से हमला कर उसकी हत्या कर दी और शव वहीं छोड़कर फरार हो गए.

एक CCTV फुटेज ने बदल दी पूरी जांच की दिशा

जांच के दौरान पुलिस को घटनास्थल के नजदीक लगे एक सीसीटीवी कैमरे से अहम सुराग मिला. फुटेज में तीन लोगों को जंगल की ओर जाते हुए देखा गया, लेकिन कुछ देर बाद केवल दो लोग ही वापस लौटते दिखाई दिए. यही असामान्य दृश्य पुलिस के लिए सबसे महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ. इसके बाद जांच टीम ने उसी आधार पर पूरे घटनाक्रम को पीछे से जोड़ना शुरू किया.

500 से ज्यादा कैमरों की जांच के बाद आरोपियों तक पहुंची पुलिस

पहले मिले सुराग के बाद पुलिस ने अलग-अलग इलाकों में लगे सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को क्रमवार खंगाला. लगातार रिवर्स ट्रैकिंग के दौरान आरोपियों की गतिविधियां नजफगढ़ के धर्मपुरा इलाके तक पहुंचती नजर आईं. इसके बाद पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां पूरे हत्याकांड की साजिश का खुलासा हुआ. पुलिस अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है.

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