लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती..लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती…1 अगस्त का दिन ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए सबसे सफल दिन रहा, जिसमें भारतीय बॉक्सरों ने रिकॉर्ड 7 गोल्ड मेडल जीते, जबकि जूडोका और पैरा ट्रैक एंड फील्ड एथलीटों ने भी शानदार प्रदर्शन किया. मुकाबले के आखिरी से एक दिन पहले, भारत 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 8 ब्रॉन्ज़ मेडल के साथ कुल 38 मेडल जीतकर मेडल टेबल में चौथे स्थान पर पहुंच गया. कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के इस ऐतिहासिक परफॉर्मेंस का पूरा श्रेय भारतीय बॉक्सरों को जाता है जिन्होंने गोल्डन पंच मारकर भारत के लिए ग्लासगो में इतिहास रचा. ऐसे में जानते हैं कि बॉक्सिंग में भारत को 7 गोल्ड मेडल दिलाने वाले भारतीय बॉक्सर कौन हैं.

प्रीति पवार
23 साल की प्रीति भारत की पहली महिला एथलीट हैं जिन्हें सीधे भारतीय सेना में नायब सूबेदार के पद पर नियुक्त किया गया है. 14 साल की उम्र में उनके चाचा विनोद पवार जो खुद नेशनल लेवल पर मेडल जीतने वाले बॉक्सर थे, उन्होंने प्रीति को बॉक्सिंग से परिचित कराया. वह पहले ही एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत चुकी हैं और कुछ समय से शानदार फ़ॉर्म में हैं. उन्होंने 2025 में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप में गोल्ड मेडल और इस साल की शुरुआत में एशियन एलीट बॉक्सिंग चैंपियनशिप में तीन बार की वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपिक ब्रॉन्ज़ मेडलिस्ट हुआंग शियाओ-वेन को हराकर शानदार जीत के साथ CWG में एंट्री की थी, और अब वह गोल्ड मेडलिस्ट बनकर लौटी हैं.

जैस्मिन लंबोरिया
जैस्मिन को वॉल्श के खिलाफ़ कड़ी टक्कर मिली, लेकिन जैसे-जैसे मुकाबला आगे बढ़ा, मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन का हुनर साफ नज़र आया. हरियाणा के भिवानी की रहने वाली 24 साल की जैस्मिन ने 2022 में जीते ब्रॉन्ज़ मेडल से बेहतर प्रदर्शन करते हुए फाइनल में शानदार खेल दिखाया और गोल्ड मेडल अपने नाम किया. वह एशियाई खेलों में दो बार गोल्ड मेडल जीतने वाले (1966 और 1970) हवा सिंह की पड़पोती हैं, उनके परिवार में बॉक्सिंग की परंपरा रही है. उन्होंने पहले कहा था, “बचपन से ही मैंने अपने चाचाओं – संदीप लंबोरिया और परमिंदर लंबोरिया.. को ट्रेनिंग करते, उनके मेडल और बॉक्सिंग का सामान देखा था. और फिर मैरी कॉम और विजेंदर सिंह के नाम और उनकी कामयाबियों के बारे में सुनकर मेरे मन में भी बॉक्सिंग करने की इच्छा जगी थी.” पेरिस ओलंपिक के पहले राउंड में बुरी तरह हारने के बाद, 2024 में उन्होंने अपने बॉक्सिंग स्टाइल में बदलाव किया और जल्द ही वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीत लिया. अब वह CWG गोल्ड मेडलिस्ट भी हैं.

साक्षी चौधरी
25 साल की साक्षी भिवानी की एक और बॉक्सर हैं. ग्लासगो फाइनल तक पहुंचने के लिए उन्हें काफी हिम्मत दिखानी पड़ी. जूनियर लेवल पर शानदार प्रदर्शन के बाद, ’21 एशियन चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर सीनियर लेवल पर अपनी पहचान बनाने की राह पर थीं, लेकिन कंधे की गंभीर चोट ने उनकी प्रोग्रेस रोक दी और वह 2022 CWG और ‘2023 एशियन गेम्स में हिस्सा नहीं ले पाईं. असल में 54kg कैटेगरी की बॉक्सर होने के बावजूद, टीम में उनकी जगह प्रीति पंवार ने ले ली थी. ग्लासगो जाने के लिए उन्होंने अपना वजन घटाकर 51kg किया, और फिर ज्योति गुलिया, निखत जरीन और मौजूदा वर्ल्ड चैंपियन मीनाक्षी हुड्डा को हराकर CWG 2026 के लिए क्वालिफाई किया. उन्होंने तब कहा था, “यह मेरे लिए करो या मरो वाली स्थिति थी..मैं अपना सब कुछ झोंक देना चाहती थी क्योंकि पिछली बार मौका चूकने के बाद CWG और एशियन गेम्स के लिए क्वालिफाई करना मेरे लिए बहुत जरूरी था” अब उनकी वापसी पूरी हो चुकी है और उन्होंने CWG में अपने डेब्यू पर गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है.
अरुंधति चौधरी
राजस्थान के कोटा की रहने वाली 23 साल की अरुंधति 15 साल की उम्र तक जूनियर स्टेट-लेवल की बास्केटबॉल खिलाड़ी थीं. फिर उन्होंने अपने पिता की सलाह पर बॉक्सिंग शुरू की, क्योंकि उन्हें लगा कि यह खेल उनके लिए ज़्यादा सही रहेगा. वह स्कूल में अक्सर झगड़ों में पड़ जाती थीं. 2021 में उन्होंने ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ को बताया था कि जब भी उन्हें लगता था कि उनके साथ भेदभाव या पक्षपात हो रहा है, तो वह झगड़ा करने लगती थीं. उन्होंने एक बार कहा था, “स्कूल में ऐसी ही एक घटना में, मैंने एक सीनियर लड़के को अपनी बोतल से मारा था क्योंकि वह लड़कियों को नल से पानी नहीं भरने दे रहा था. उसका कहना था कि पुरुष श्रेष्ठ होते हैं और वही तय करेंगे कि किसे मौका मिलेगा.”
बता दें कि साल 2021 में, वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप जीतकर वह किसी भी लेवल पर वर्ल्ड चैंपियन बनने वाली पहली राजस्थानी बॉक्सर बनीं. 2025 में उन्होंने बॉक्सिंग वर्ल्ड कप में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी पहचान बनाई. इस कॉमनवेल्थ गेम्स मेंउनका सेमीफ़ाइनल मुकाबला शायद सबसे मुश्किल था, लेकिन उन्होंने वेल्स की रोजी एक्लेस को हराकर फाइनल में जगह बनी. एक्लेस मौजूदा चैंपियन थीं और यह उनका आखिरी टूर्नामेंट था, लेकिन अंत में अरुंधति उन पर भारी पड़ीं. ठीक वैसे ही, जैसे वे इंग्लैंड की वर्ल्ड नंबर 5 रीड जैसी अनुभवी प्रतिद्वंद्वी पर भारी पड़ी थीं.
प्रिया गंगहास
20 साल की प्रिया गंगहास इस दल की सबसे कम उम्र की खिलाड़ी हैं. भिवानी की रहने वाली प्रिया और साक्षी कजिन हैं और वे बड़े मंचों पर अपने परिवार का नाम रोशन कर रही हैं. शानदार इंटरनेशनल डेब्यू के बाद ही उन पर सबकी नजरें टिक गई थीं, उन्होंने इस साल की शुरुआत में एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में 60kg कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता था और इस दौरान चीन की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन चेंग्यू यांग को हराया था. CWG का यह गोल्ड मेडल उनकी लोकप्रियता और उन पर लोगों की उम्मीदों को और बढ़ाएगा.
सचिन सिवाच
26 साल के सचिन सिवाच ने 10 साल की उम्र में बॉक्सिंग शुरू की थी. भिवानी से होने के कारण, उनके किसान पिता किशन कुमार और मां निर्मला देवी ने उन्हें बॉक्सिंग में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया. इस करियर में उन्होंने यूथ CWG और वर्ल्ड यूथ चैंपियनशिप में कई मेडल जीते, लेकिन सीनियर लेवल पर आने के शुरुआती दौर में वे चर्चा से बाहर हो गए थे. हालांकि, हाल ही में उन्होंने अपने खेल में सुधार किया है. उन्होंने 2025 में वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में गोल्ड और इस साल की शुरुआत में एशियन चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. अब यह कॉमनवेल्थ गोल्ड उन्हें आगे बढ़ने और बेहतर प्रदर्शन करने का हौसला देगा.

अंकुश पांघल
सिर्फ 22 साल के अंकुश, अपनी टीम के कई साथियों की तरह यूथ लेवल पर शानदार प्रदर्शन करने के बाद सीनियर लेवल पर भी बेहतरीन शुरुआत करने में सफल रहे थे. इस साल नेशनल चैंपियनशिप जीतने से पहले उन्होंने वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में सिल्वर मेडल जीता, जिससे उन्हें बड़े मंच पर खुद को साबित करने का मौका मिला. हरियाणा के इस युवा और ताकतवर बॉक्सर ने अपने पहले ही CWG में गोल्ड मेडल जीता है, जिससे वे भविष्य के लिए एक होनहार खिलाड़ी के तौर पर उभरे हैं.



















