रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा धांधली को लेकर रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के धरना स्थल पर देर रात हलचल देखने को मिली। आरोप है कि पुलिस के अधिकारी अंधेरे में छात्रों को धरनास्थल से हटाने के लिए पहुंचे थे। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों को हटाने पहुंची पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन को जबरन दबाने की कोशिश कर रही है। मरांडी ने बताया कि देर रात करीब डेढ़ से दो बजे भारी पुलिस बल के साथ सिटी एसपी, एसएसपी और डीसी खुद मौके पर पहुंचे थे। उनका इरादा बल प्रयोग कर छात्रों को वहां से हटाने और आंदोलन को कमजोर करने का था।

सिर्फ परीक्षा रद्द करना समाधान नहीं

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि अधिकारी छात्रों से आंदोलन खत्म करने को कह रहे थे और तर्क दे रहे थे कि जब JPSC परीक्षा रद्द हो चुकी है तो अब विरोध की क्या जरूरत है। मरांडी ने कहा कि JPSC का असली काम तो अभी हुआ ही नहीं है। केवल परीक्षा रद्द कर देना समस्या का हल नहीं है, बल्कि असली सवाल यह है कि परीक्षा रद्द करने की नौबत क्यों आई? मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांग बिल्कुल स्पष्ट और जायज है। जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच नहीं होगी, तब तक दूध का दूध और पानी का पानी नहीं हो सकता।

‘CBI जांच से डर रही सरकार’

सरकार के रुख पर निशाना साधते हुए उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार सीबीआई जांच से इसलिए भाग रही है क्योंकि उसे अंजाम का डर है। मरांडी के अनुसार, निष्पक्ष जांच होते ही इस पूरे घटनाक्रम की आंच सत्ता के शीर्ष बैठे लोगों तक पहुंचेगी, और इसी डर से सरकार पुलिस प्रशासन के जरिये युवाओं की आवाज को दबाने में जुटी है।

छात्रों से अधिकारियों ने की पूछताछ

छात्र नेता राजेश प्रसाद ने कहा कि यहां एसएसपी, एसपी और डीसी समेत पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने धरना स्थल का दौरा किया। सबसे पहले, वे भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों से मिले और उनके नाम व घर के बारे में जानकारी लेने की कोशिश की। बातचीत के बाद डीसी बाहर आए और जेएसएससी सीजीएल के उम्मीदवारों को बुलाया। उन्होंने सीजीएल अभ्यर्थियों से सवाल जवाब किए। राजेश प्रसाद ने कहा कि जेएसएससी सीजीएल को रद्द किए जाने की हमारी मांग उचित है और इसका एक आधार भी है। यह आधार भी सीआईडी की तरफ से तैयार किया गया, लेकिन इसे कोर्ट में जमा नहीं किया गया था। छात्र नेता ने कहा कि सरकार से हमारा यही अनुरोध है कि हमारी मांग को धरातल पर उतारें और सीआईडी की रिपोर्ट में दर्ज लोगों के बयानों को दाखिल करें।

पुलिस बोली- असामाजिक तत्वों की सूचना पर पहुंचे थे

पुलिस अधिकारियों ने अपने बयान में कहा कि वे प्रदर्शन स्थल पर असामाजिक तत्वों को देखने आए थे। सिटी एसपी पारस राणा ने कहा कि हमें जानकारी मिली थी कि कुछ असामाजिक तत्व और बाहरी लोग, जिनकी पहचान की पुष्टि नहीं हुई थी, यहां मौजूद हैं, इसलिए हम उनकी पहचान की पुष्टि करने और जांच करने आए थे। हम कुछ छात्रों से मिलने भी आए थे। सीओ शिव शंकर पांडे ने कहा कि हम यहां सिर्फ यह सुनिश्चित करने के लिए आए कि भीड़ में कोई असामाजिक तत्व तो नहीं घुस आया है और कोई गड़बड़ तो नहीं कर रहा है।

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