वाशिंगटन। दुनिया भर में लगातार टूटते गर्मी के रिकॉर्ड्स के बीच नासा के शोध ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जहां पूरी दुनिया इस समय ग्लोबल वार्मिंग की भयानक चपेट में है, वहीं भारत में गर्मी बढ़ने की रफ्तार बाकी देशों की तुलना में काफी धीमी बनी हुई है।
इस खास प्राकृतिक घटना को जलवायु वैज्ञानिक वार्मिंग होल नाम दे रहे हैं, जो भारत को वैश्विक तापन के चरम प्रभाव से फिलहाल सुरक्षित रखे हुए है।
वैश्विक आंकड़ों से भारतीय स्थिति में बड़ा अंतर
नासा के आंकड़ों के अनुसार, साल 1980 के बाद से पृथ्वी का औसत तापमान लगभग 1.4 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। इसके विपरीत, भारत में 20वीं सदी की शुरुआत से लेकर अब तक तापमान में यह बढ़ोतरी 0.9 डिग्री सेल्सियस से भी कम दर्ज की गई है।
तापमान नियंत्रित रहने के पीछे के वैज्ञानिक कारण
विशेषज्ञों के मुताबिक, उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में बड़े पैमाने पर की जाने वाली सिंचाई इस स्थिति का एक मुख्य कारण है। खेतों की सिंचाई से हवा में नमी की मात्रा बढ़ती है, जिससे स्थानीय स्तर पर तापमान कम रहता है।
इसके साथ ही, हवा में मौजूद प्रदूषण के कण सूर्य की किरणों को वापस परावर्तित करके अंतरिक्ष की ओर लौटा देते हैं, जिससे धरातल पर गर्मी का दबाव काफी हद तक दब जाता है।
18 राज्यों में मूसलाधार बारिश की चेतावनी
जहां एक तरफ तापमान के आंकड़े कुछ राहत देते हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के कई हिस्सों में मानसूनी आफत जारी है। मध्य प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के लगभग 18 राज्यों में आने वाले दिनों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस दौरान इन इलाकों में 30 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएँ चलने और बादलों की गरज के साथ बिजली गिरने की आशंका है।
हाल के दिनों में मध्य प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और छत्तीसगढ़ में तेज बारिश दर्ज की गई है। लगातार हो रही इस बारिश के कारण मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के निचले एवं संवेदनशील इलाकों में अचानक बाढ़ आने का अलर्ट जारी किया गया है।



















