दिल्ली के जंतर-मंतर पर जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था के विरोध में जारी प्रदर्शन ने देर रात हिंसक मोड़ ले लिया। ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले जुटे सैकड़ों युवाओं को शुक्रवार देर रात पुलिस ने मौके से हटा दिया। इस दौरान पुलिस पर लाठीचार्ज करने और मंच तोड़ने के आरोप लगे हैं। जंतर-मंतर से हटाए जाने के बाद जब कई प्रदर्शनकारी शनिवार सुबह बापू की समाधि राजघाट पहुंचे, तो दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वहां भी कड़ी कार्रवाई करते हुए कई युवाओं को हिरासत में ले लिया।

‘हमारे मंच तोड़े गए, लाठियों से खदेड़ा गया’

प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे तानाशाही करार दिया है। प्रदर्शनकारी सन्नी द्विवेदी ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उनके साथ पुलिस ने बेहद सख्त रवैया अपनाया, लाठी-डंडों के बल पर खदेड़ा और धरना स्थल पर लगा मंच भी पूरी तरह तोड़ दिया। उन्होंने बताया कि जब वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने राजघाट पहुंचे, तो वहां भी पुलिस ने उन्हें बसों में भरकर हिरासत में ले लिया। वहीं, भूख हड़ताल का ऐलान करने वाले प्रदर्शनकारी पंकज का कहना था कि लगभग एक हजार निहत्थे युवाओं पर पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज किया, जबकि आंदोलनकारी पूरी तरह से अहिंसक और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रख रहे थे।

क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?

दिल्ली पहुंचे इन युवाओं की सबसे प्रमुख मांग यह है कि सरकारी सहायता, कोचिंग और शिक्षा में पात्रता तय करने का एकमात्र आधार जाति के बजाय व्यक्ति की आर्थिक स्थिति को बनाया जाना चाहिए। इसके साथ ही प्रदर्शनकारी वर्तमान आरक्षण व्यवस्था की व्यापक समीक्षा, क्रीमी-लेयर नियमों को कड़ाई से लागू करने और अनुसूचित जाति व जनजाति अधिनियम के साथ-साथ उच्च शिक्षा में यूजीसी (UGC) से जुड़े कुछ नियमों में सुधार की मांग कर रहे हैं। युवाओं का तर्क है कि वर्तमान व्यवस्था का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पा रहा है।

पुलिस का पक्ष, प्रदर्शन की अनुमति नहीं थी

मामले पर दिल्ली पुलिस और मध्य जिला पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) कार्यालय का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और धारा 144 लागू होने के कारण जंतर-मंतर पर किसी भी तरह के विरोध-प्रदर्शन या सभा की अनुमति नहीं दी गई थी। पुलिस प्रशासन के अनुसार, शुक्रवार को केवल रामलीला मैदान में शाम 4 बजे तक अधिकतम 500 लोगों के एकत्र होने के लिए एनओसी (NOC) जारी की गई थी। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर बिना अनुमति के भीड़ जुटने और स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा बलों को यह कदम उठाना पड़ा।

कॉकरोच पार्टी को लेकर प्रदर्शनकारियों का आरोप

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ‘कॉकरोच पार्टी’ के समर्थक पिछले कई दिनों से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे थे, जिससे उनके शांतिपूर्ण आंदोलन में परेशानी हुई। उनका आरोप है कि उनके साथ समान व्यवहार नहीं किया गया और उन्हें जंतर-मंतर से हटा दिया गया। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी राजघाट पहुंचे, जहां सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कार्रवाई की और कुछ लोगों को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने कहा कि धारा 144 के तहत कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए।

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