केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने 20 अगस्त को शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। यह बैठक उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए की गई। इसमें उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने,  संस्थानों में उत्कृष्टता को बढ़ावा देने और छात्रों के लिए अवसर बढ़ाने से जुड़ी मुख्य प्राथमिकताओं और पहलों की समीक्षा भी की गई। इन सकारात्मक प्रयासों को लेकर कुछ बिन्दु महत्वपूर्ण हैं।

गुणवत्ता मानकों के दृष्टिकोण से, भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली संवेदनशील है। हमारे पास बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा संस्थान है जिनमें से अनेक की उच्च शिक्षा की गुणवत्ता हमेशा संदिग्ध रहती है। इसी प्रकार, जिन राज्यों में बड़ी संख्या में कालेज हैं वे अच्छी संख्या में उच्च गुणवत्ता वाले कालेज बनाने में पीछे हैं। आज देश में ऐसे कालेज कम नहीं हैं, जो कहने को तो कालेज हैं, मगर वहां  छात्रों के लिए बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं।  इसके अलावा, विश्वविद्यालय में संबद्ध विद्यालयों का बढ़ता बोझ, पाठ्यक्रमों में बदलाव की मांग और ड्रापऑऊट विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या असली चुनौतियां हैं,  वहीं, उच्च शिक्षा में  अध्यापकों के रिक्त पद से जुड़े आंकड़े  खुद अपनी हकीकत बताते हैं। इसका असर उच्च शिक्षा की अकादमिक गुणवत्ता पर पड़ा है। इसे ठीक करना होगा।

कुछ मीडिया रिपोर्ट के अनुसार  80 प्रतिशत से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले कालेज तीन राज्यों तमिलनाडु, दिल्ली और केरल में हैं।  यह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच के मामले में देश भर में भारी असमानताओं की व्यापकता को दर्शाता है। यदि हम विश्वविद्यालयों द्वारा तैयार किए गए पाठ्यक्रम की बात करें तो इसमें और सामाजिक व्यवहार के बीच भी अधिक तालमेल बिठाना होगा दरअसल, उच्च शिक्षा की अध्ययन सामग्री  उपयोगी और  मानवीय आवश्यकताओं पर आधारित कौशल विकास को बढ़ावा देने वाली होनी चाहिए।

इसी प्रकार, उच्च शिक्षा से ड्रापआऊट होने वाले विद्यार्थियों को रोकना और सकल नामांकन अनुपात बढ़ाना भी इस क्षेत्र की एक बड़ी चुनौती है। भारत की उच्च शिक्षा में 18 से 23 वर्ष आयु-वर्ग के अंतर्गत सकल नामांकन अनुपात काफी कम है, जो अन्य विकसित और कई विकासशील देशों की तुलना में बहुत कम है। इससे स्पष्ट होता है कि आज भी देश के करीब 74 प्रतिशत युवा उच्च शिक्षा से बाहर हो जाते हैं। इससे जाहिर होता है कि सभी वर्गों के विद्यार्थियों को समान अवसर देना और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना एक निरंतर प्रयास होना चाहिए।

उच्च शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण उपाय किए जा सकते हैं। शिक्षकों को नियमित और उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए ताकि वे नवीनतम शिक्षण विधियों और तकनीकों से लैस हो सकें। पाठ्यक्रम को समसामयिक और व्यावहारिक बनाए रखना आवश्यक है, जिससे छात्रों को वास्तविक जीवन में उपयोगी ज्ञान प्राप्त हो। सीखना ही पर्याप्त नहीं है, उपयोग में लेना भी जरूरी है।  सैद्धांतिक शिक्षा महत्वपूर्ण है परंतु व्यावहारिक शिक्षा ज्यादा महत्वपूर्ण है। असली शिक्षा वह है  जो हमारे काम और  व्यवहार में झलके। केंद्रीय शिक्षा मंत्री की संजीदगी को ध्यान में रखते हुए शिक्षा नीति रेखांकित करने वालों, शिक्षा  से जुड़े विद्वानों और शिक्षा नीति विशेषज्ञों को इस दिशा में तत्परता से काम करना होगा।-डा. वरिन्द्र भाटिया

Advertisement Carousel
Share.

Comments are closed.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930