भाजपा की 13 दिन की नशा मुक्त पंजाब यात्रा कई मायनों में अहम रही। यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक रणनीति थी। 13 दिन में चारों क्षेत्रों मालवा, दोआबा, माझा और पुआध को साधा। 4000 किलोमीटर का सफर किया। कुल 474 प्रोग्राम किए जिनमें जन सभाएं, रोड शो, स्वागत कार्यक्रम, नुक्कड़ सभाएं, आदि प्रमुख हैं। मंचों पर नाटक का आयोजन भी हुआ। और हर रैली, रोड शो, नाटक और भाषण में भाजपा ने जनता के बीच संदेश पहुंचाया कि यह यात्रा राजनीतिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि नशे के खिलाफ है। इस यात्रा से भाजपा ने अपने विरोधियों, राजनीतिक विशेषज्ञों और मीडिया संस्थानों को भी हैरत में डाल दिया है।
पंजाब की राजनीति में लंबे समय से धारणा थी कि भारतीय जनता पार्टी शहरी पार्टी है। शहरों में तो इसकी पकड़ है लेकिन गांवों में, खेतों में, मंडियों में इसकी पहुंच नहीं। यात्रा ने इस मिथक को पूरी तरह तोड़ दिया है जोकि भाजपा की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। साथ ही, जन संपर्क और नशा पीड़ित परिवारों से मिलना भी पार्टी की बड़ी उपलब्धि रही। इससे भाजपा अपने नशा विरोधी एजैंडे को जनता के सामने मजबूती के साथ रखने में कामयाब रही। इससे पहले पंजाब में किसी भी राष्ट्रीय पार्टी ने इतने कम समय में इतने बड़े स्तर पर नशे के मुद्दे पर ऐसे आवाज नहीं उठाई। यह सिर्फ भाषणों की यात्रा नहीं थी। न सिर्फ कार्यकत्र्ता, बल्कि पार्टी के बड़े नेता गांव-गांव गए। नशा पीड़ित परिवारों से मिले और उनकी पीड़ा सुनी। दुकानदारों, मजदूरों, किसानों, युवाओं और नशों के कारण बेटे खो चुकी मांओं से मिले। यही कारण है कि इसे यात्रा नहीं, जन-आंदोलन कहा जा रहा है।
धार्मिक और सांस्कृतिक नब्ज को पकड़ा : राज्य की धार्मिक और सांस्कृतिक नब्ज को भी भाजपा इस यात्रा से साधने में काफी हद तक कामयाब रही। इस यात्रा का रूट-मैप भी बहुत सोच-समझकर बनाया गया था। यात्रा की शुरुआत माधोपुर से हुई। माधोपुर वही धरती है जहां पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राण देने से पहले अनशन किया था। वहां से संदेश साफ था-भाजपा के लिए पंजाब सिर्फ एक राज्य नहीं, देश की एकता का प्रतीक है। दूसरी यात्रा फतेहगढ़ साहिब से निकली। सिख कौम के इतिहास का सबसे दर्दनाक और प्रेरणादायक स्थल। तीसरी तलवंडी साबो से, जो पांच तख्तों में से एक है, दमदमा साहिब। यहां जाकर भाजपा ने सिख परंपरा के प्रति अपना सम्मान दिखाया।
चौथी यात्रा फाजिल्का के सदीकी से शुरू हुई, जहां 1971 के युद्ध में हमारे जवानों ने शहादत दी थी। इससे भाजपा ने जनता के बीच संदेश पहुंचाया कि पंजाब वीरों और गुरुओं की भूमि है। सब यात्राओं का समापन जालंधर के देवी तालाब मंदिर में हुआ। शक्ति की उपासना का केंद्र। वहीं से आशीर्वाद लेने के बाद नशा खत्म करने की तारीख और साल का ऐलान अमित शाह ने किया। यह एक प्रतीकात्मक संकल्प था, कि जैसे मां दुर्गा ने असुरों का नाश किया था, वैसे ही भाजपा पंजाब से नशे के असुर का नाश करेगी। यह पंजाब के लोगों को विश्वास दिलाने का सबसे मजबूत तरीका रहा।
अपनी उपलब्धियों से जनता में विश्वास जगाया : लोगों को यह भरोसा दिलाने के लिए कि सिर्फ वही एक पार्टी है जो नशे को खत्म कर सकती है, भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय उपलब्धियों को भी पंजाब की सुरक्षा से जोड़ा। मंच से बार-बार तीन बातें दोहराई गईं-जम्मू-कश्मीर से धारा 370 और आतंकवाद मिटाया, उत्तर प्रदेश से गैंगस्टरवाद तो छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद को खत्म किया। जनता को सीधा संदेश दिया कि पंजाब एक सीमावर्ती राज्य है। यहां स्थिरता, सुरक्षा और एकता सबसे बड़ी जरूरत है। जनता ने इस तर्क को समझा और सराहा।
गांवों में विरोध नहीं, स्वागत हुआ : कुछ साल पहले तक भाजपा को गांवों में विरोध का सामना करना पड़ता था। लेकिन इस यात्रा में तस्वीर बिल्कुल बदली हुई दिखी, बल्कि किसान, मजदूर, छोटे कारोबारी, दुकानदार, युवा और महिलाएं खुद बढ़-चढ़कर रैलियों में पहुंचे। ट्रैक्टरों पर झंडे लगे देखे गए। गांवों की चौपालों में लोगों ने स्वेच्छा से यात्रा का समर्थन किया और नशे के खात्मे के लिए भाजपा से उम्मीद जताई।
13 दिन, एक ही मुद्दा-नशा : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भाषण हो या पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का या किसी अन्य नेता की जनसभा, पूरे 13 दिन का फोकस सिर्फ एक मुद्दे पर रहा-नशा। भाजपा राज्य के दूसरे मुद्दों के जाल में उलझने से बची। राज्य की मौजूदा आम आदमी पार्टी की सरकार, मुख्यमंत्री भगवंत मान और पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से नशे के मुद्दे पर सीधे सवाल पूछे। कोई निजी टिप्पणी नहीं की गई। मंच से पार्टी ने संदेश दिया-पंजाब के नौजवानों को नशे से कैसे बचाना है। नशा पीड़ित परिवारों से मिलकर भाजपा ने इस मुद्दे को इमोशनल टच दिया।
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अब तक नशे पर सिर्फ बयानबाजी करती रही हैं। लोगों को लगा कि भाजपा इस समस्या को जड़ से खत्म करने की नीयत रखती है। जालंधर से नशा खत्म करने की तारीख देना, यह एक राजनीतिक मास्टरस्ट्रोक था। यह एक टाइम-बाऊंड वादा है, जिस पर जनता भाजपा को परखेगी। भाजपा इस मुद्दे पर बढ़त बनाने में कामयाब रही। यह यात्रा बताती है कि भाजपा अब पंजाब में खुद सरकार बनाने के योग्य है और खुद के बलबूते पर सरकार बनाना चाहती है।-केवल सिंह ढिल्लों(पंजाब भाजपा प्रधान)



















