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मुरादाबाद. उत्तराखंड से सटे मुरादाबाद के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों तेंदुओं का खौफ लोगों की जिंदगी पर भारी पड़ रहा है. पिछले 22 दिनों में तेंदुओं के हमलों में तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 20 से ज्यादा किसान घायल बताए जा रहे हैं. करीब 50 गांवों में रहने वाले एक लाख से अधिक लोग दहशत में हैं.

हालात ऐसे हैं कि मंदिरों और मस्जिदों से लगातार एनाउंसमेंट कर लोगों को खेतों की तरफ नहीं जाने की सलाह दी जा रही है. डर के कारण कई परिवारों ने बच्चों को स्कूल भेजना तक बंद कर दिया है.

100 से ज्यादा तेंदुए होने का अनुमान

वन विभाग के मुताबिक, जिले में 100 से ज्यादा तेंदुओं की मौजूदगी का अनुमान है. विभाग की करीब 50 एक्सपर्ट्स की टीमें इलाके में कैंप कर रही हैं और लगातार गश्त की जा रही है. तेंदुओं को पकड़ने के लिए 29 पिंजरे लगाए गए हैं. अब तक एक शावक समेत 11 तेंदुओं को पकड़ा जा चुका है. तेंदुओं की निगरानी के लिए थर्मल ड्रोन की भी मदद ली जा रही है. इसके बावजूद अलग-अलग इलाकों में तेंदुओं की मौजूदगी सामने आ रही है.

अचानक इंसानों पर हमले से एक्सपर्ट भी हैरान

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में हुए हमलों में एक बात सामान्य है. तेंदुए कई बार बिना किसी स्पष्ट उकसावे के इंसानों पर हमला कर रहे हैं और सीधे गर्दन को निशाना बना रहे हैं. मुरादाबाद के DFO डॉ. विनय कुमार पांडेय के मुताबिक, एक्सपर्ट्स तेंदुओं के व्यवहार को समझने की कोशिश कर रहे हैं. उनका मानना है कि इंसान को अचानक करीब आता देखकर तेंदुआ अपनी सुरक्षा के लिए हमला कर सकता है.

गन्ने के खेत बने तेंदुओं का ठिकाना

वन विभाग का कहना है कि उत्तराखंड से सटा यह इलाका तेंदुओं का पारंपरिक क्षेत्र रहा है. पहले यहां जंगल और घास के मैदान ज्यादा थे, जहां इंसानों की आवाजाही सीमित रहती थी. अब इन इलाकों में गन्ने की खेती बढ़ गई है. गन्ने के खेत तेंदुओं को छिपने के लिए सुरक्षित जगह देते हैं. इस बार बारिश और बाढ़ कम होने के कारण किसानों की खेतों में आवाजाही भी जारी है. माना जा रहा है कि इंसानों और तेंदुओं का आमना-सामना बढ़ने की यह भी एक बड़ी वजह है.

हाईवे और शहर के आसपास भी दिख रहे तेंदुए

तेंदुओं का दायरा अब सिर्फ गांवों और खेतों तक सीमित नहीं रह गया है. शहर और हाईवे के आसपास भी इनके देखे जाने की घटनाएं सामने आ रही हैं. करीब 15 दिन पहले हाईवे के किनारे तेंदुओं का झुंड दिखाई देने की बात सामने आई थी. ठाकुरद्वारा और डिलारी के बाद अब कांठ और छजलैट क्षेत्र में भी तेंदुओं की मौजूदगी दर्ज की गई है. दिल्ली-लखनऊ नेशनल हाईवे पर मुरादाबाद के पास TMU अंडरपास में भी तेंदुआ देखा गया.

‘तेंदुए को ट्रैक करना बेहद मुश्किल’

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, तेंदुआ बेहद चालाक और छिपकर रहने वाला जानवर है. छोटी सी झाड़ी, पत्थर या किसी सामान की आड़ में भी वह अपने शरीर को जमीन से सटाकर छिप सकता है. इस वजह से उसे खुले इलाके में भी ढूंढना मुश्किल होता है.

वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, लेकिन तेंदुओं की बड़ी संख्या और उनके तेजी से बदलते ठिकानों ने चुनौती बढ़ा दी है. फिलहाल ग्रामीणों से खेतों और सुनसान इलाकों में अकेले नहीं जाने की अपील की जा रही है.

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