मुंबई: वैश्विक तनाव और भारी उतार-चढ़ाव के कारण आज भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ संकट का कोई राजनयिक समाधान न निकलने से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है. इसका सीधा असर आज बाजार पर दिखा.

सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट
कारोबार के अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स 539 अंक (0.70%) टूटकर 76,933 के स्तर पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 116 अंक (0.48%) गिरकर 24,090 पर आ गया. बैंकिंग सेक्टर में भी भारी बिकवाली रही, जिससे निफ्टी बैंक 273 अंक (0.47%) की कमजोरी के साथ 57,509 पर बंद हुआ.

सेक्टर और शेयरों का हाल
आज बाजार में चौतरफा गिरावट का माहौल रहा. निफ्टी सीमेंट में सबसे ज्यादा 1.33% की गिरावट आई. इसके अलावा पीएसयू (सरकारी) बैंक, मीडिया और मेटल सेक्टर भी लाल निशान में बंद हुए. भारी बिकवाली के इस दौर में एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), इन्फोसिस और भारती एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों ने बाजार को नीचे खींचने का काम किया.

हालांकि, इस गिरावट के बीच फार्मा, प्राइवेट बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (रोजमर्रा के इलेक्ट्रॉनिक सामान) जैसे घरेलू डिमांड वाले सेक्टर मामूली बढ़त के साथ बंद होने में कामयाब रहे. बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा और अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में आज मजबूती देखी गई.

बाजार में गिरावट की 3 बड़ी वजहें

  • वैश्विक और युद्ध का तनाव: मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के संकेत नहीं मिल रहे हैं. इसके चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और व्यापारिक रास्तों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
  • मंथली एक्सपायरी का दबाव: आज अगस्त महीने की डेरिवेटिव्स (F&O) एक्सपायरी का दिन था. इसके कारण बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया और संस्थागत निवेशकों ने ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली की.
  • डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर: अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच भारतीय रुपया गिरावट के साथ 95.50 के करीब कारोबार कर रहा है. रुपए की कमजोरी से विदेशी निवेशकों (FPIs) के बीच चिंता है.

आगे क्या करें निवेशक?
बाजार जानकारों के अनुसार, निफ्टी अपने 50-दिनों के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (50EMA) से नीचे आ गया है, जो शॉर्ट-टर्म में बाजार की कमजोरी को दर्शाता है. अब निफ्टी के लिए 24,000 से 24,100 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट है. निवेशकों को इस समय एकमुश्त पैसा लगाने से बचना चाहिए और केवल मजबूत घरेलू कंपनियों में ही सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश करना चाहिए. इसके अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के आगामी ‘जैकसन होल’ भाषण पर भी नजर रखना जरूरी है.

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