मध्य प्रदेश- कभी अकेले नदी में उतरकर कचरा निकालने वाले एक युवा ने शायद खुद भी नहीं सोचा होगा कि उसकी मेहनत की गूंज एक दिन विदेशों तक पहुंचेगी. मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के रहने वाले सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें लोग प्यार से ‘बिट्टू तबाही’ के नाम से जानते हैं, आज पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बन चुके हैं. अजनार नदी को फिर से जीवन देने की उनकी मुहिम ने न सिर्फ देश में लोगों का ध्यान खींचा, बल्कि अब दुनिया भी उनके काम की सराहना कर रही है. नीदरलैंड की एक प्रतिष्ठित संस्था ने उन्हें अपने साथ काम करने का न्योता दिया है, जबकि पूर्व इंग्लैंड क्रिकेटर केविन पीटरसन ने भी खुले दिल से उनकी तारीफ की है.

सोशल मीडिया से दुनिया तक पहुंची बिट्टू की कहानी
राजगढ़ के युवा सुरेंद्र सिंह चौधरी पिछले कई महीनों से अजनार नदी की सफाई में जुटे हुए हैं. उनके काम के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद लोगों ने उन्हें ‘सफाई किंग’ के नाम से पहचानना शुरू कर दिया. नदी को स्वच्छ बनाने के लिए उनके समर्पण और मेहनत ने लाखों लोगों को प्रभावित किया.
नीदरलैंड की संस्था ने दिया जॉब का ऑफर
बिट्टू के काम की चर्चा जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंची तो नीदरलैंड स्थित संस्था ‘द ओशन क्लीनअप’ भी उनसे प्रभावित हुई. संस्था के संस्थापक और सीईओ बोयन स्लैट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उनके काम की सराहना करते हुए उन्हें अपनी टीम के साथ जुड़ने का न्योता दिया. दरअसल, एक यूजर ने बिट्टू की तस्वीर और उनके अभियान की जानकारी साझा की थी, जिस पर प्रतिक्रिया देते हुए स्लैट ने लिखा, “Come work with us”.
समुद्र और नदियों को साफ करने का काम करती है संस्था
‘द ओशन क्लीनअप’ दुनिया भर में समुद्रों और नदियों में फैले प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने के लिए जानी जाती है. यह संस्था नीदरलैंड में स्थित है और जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और बड़े स्तर पर अभियान चलाती है. ऐसे में इस संस्था की ओर से मिला निमंत्रण बिट्टू की मेहनत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान माना जा रहा है.
केविन पीटरसन ने भी की खुलकर सराहना
पूर्व इंग्लैंड क्रिकेटर केविन पीटरसन भी बिट्टू की कहानी से प्रभावित हुए. उन्होंने इंस्टाग्राम पर बिट्टू के अभियान को साझा करते हुए लिखा, ‘WELL DONE! Bhai’. पीटरसन ने कहा कि उन्होंने सुबह बिट्टू की कहानी पढ़ी और उन्हें लगा कि इसे दुनिया के सामने लाना चाहिए. उन्होंने बिट्टू के जज्बे और पर्यावरण के प्रति समर्पण की खुलकर तारीफ की.
बिना दस्ताने और जूतों के शुरू किया अभियान
बिट्टू ने 26 जनवरी 2026 को ब्यावरा क्षेत्र में एक मंदिर के पास बहने वाली अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया था. उस समय नदी का बड़ा हिस्सा कचरे और प्लास्टिक से पट चुका था. खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी सरकारी मदद के, अपने दम पर सफाई का बीड़ा उठाया. न हाथों में दस्ताने थे, न पैरों में जूते और उन्हें तैरना भी नहीं आता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी.
सफाई अभियान को आगे बढ़ाने के लिए बिट्टू ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर धन जुटाया. इसी राशि से सफाई के उपकरण और कूड़ेदान खरीदे गए. उन्होंने नदी से निकलने वाले प्लास्टिक और कचरे को अलग किया, वहीं पूजा सामग्री से निकलने वाले अपशिष्ट को खाद में बदलने की पहल भी शुरू की. इस अभियान पर करीब 30 हजार रुपये खर्च हुए.
संक्रमण हुआ, लेकिन नहीं रुके कदम
नदी की सफाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब लगातार गंदे पानी में काम करने से उनके हाथों में संक्रमण हो गया. इसके बावजूद उन्होंने अपना अभियान नहीं छोड़ा. उनका कहना था कि अगर नदी को बचाना है तो कठिनाइयों से घबराकर पीछे नहीं हट सकते. यही जज्बा आज उन्हें युवाओं के लिए प्रेरणा बना रहा है.
नाले में बदलती जा रही थी अजनार नदी
राजगढ़ जिले के आंदलहेड़ा गांव से निकलने वाली अजनार नदी कभी इलाके की पहचान हुआ करती थी. इसका साफ पानी लोगों की जरूरतों को पूरा करता था और नदी में जलीय जीवों की भरमार रहती थी. लेकिन समय के साथ बढ़ते प्लास्टिक कचरे और लापरवाही ने नदी की हालत खराब कर दी. कई जगह नदी कचरे के ढेर में बदल गई थी और उसका प्राकृतिक संतुलन भी प्रभावित होने लगा था.



















