राजधानी दिल्ली में ‘हत्यारे डिब्बेनुमा’ कमरों में रहना छात्रों की मजबूरी है। दिल्ली विश्वविद्यालय और जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के विरोधाभासी आंकड़े ही साबित कर देते हैं कि छात्रों और छात्रावासों (हॉस्टल) के दरमियान कितना बड़ा फासला है। दिल्ली विवि में नियमित 2-2.5 लाख छात्र पढ़ते हैं, जबकि ओपन, प्राइवेट, दूरस्थ और अन्य माध्यमों के साथ यह संख्या 7 लाख को पार कर जाती है। उनमें से दो-तिहाई छात्र दिल्ली से बाहर राज्यों और शहरों से आते हैं। हॉस्टल की सीटें और बिस्तरों की संख्या 7258 है। दिल्ली विवि के कुल 90 कॉलेजों में से सिर्फ 20 कॉलेजों में ही छात्रावास हैं। उनमें करीब 3000 छात्र ही रह सकते हैं। दिल्ली के स्थानीय और एनसीआर से भी छात्र आते हैं, जो पढ़ाई के बाद अपने घरों को लौट जाते हैं। शेष लाखों छात्र कहां जाएं, कहां रहें? यह सवाल स्वाभाविक है और मनुष्य के बसेरे से जुड़ा है। जेएनयू बड़ी विख्यात और लोकप्रिय यूनिवर्सिटी है, जहां 8000-10,000 नियमित छात्र पढ़ते हैं। वैसे पंजीकरण 20,000 छात्रों के करीब का है, लेकिन वे नियमित नहीं हैं। जेएनयू में 18 बड़े-बड़े हॉस्टल हैं, जिनमें करीब 5500 छात्रों के आवास की सुविधा है। छात्रावासों के नाम देश की प्रमुख नदियों के नाम पर हैं। इनमें छात्रों का आवास बेहद किफायती है और खाना भी बेहतर मिलता है। औसतन छात्र 3000-4000 रुपए में महीने भर का गुजारा कर सकता है, जबकि बाजार में ‘डिब्बे’ के एक बिस्तर का किराया 15,000 रुपए या अधिक वसूला जा रहा है। सवाल यह है कि दिल्ली विवि में मात्र 2 फीसदी और जेएनयू में 50 फीसदी से अधिक छात्रों के लिए हॉस्टल की सुविधा क्यों है? इतना बड़ा अंतर क्यों है? दरअसल दिल्ली में कुल 38 केंद्रीय, राज्य, निजी, डीम्ड विश्वविद्यालय हैं और एनसीआर को मिला कर करीब 1000 कॉलेज तथा संस्थान हैं। युवा छात्र संघ लोक सेवा आयोग के अलावा अन्य परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए भी दिल्ली आते हैं। यहां बेहतर कोचिंग की सुविधाएं भी हैं। तो वे छात्र दिल्ली में कहां रहेंगे? जाहिर है कि इन ‘डिब्बेनुमा’ कमरों में ही रहने को वे विवश हैं। दिल्ली में ऐसे पीजी, कथित हॉस्टल या अन्य बसेरे ‘कुकुरमुत्तों’ की तरह बना दिए गए हैं। जो इलाके कभी शहरी गांव (लाल डोरा क्षेत्र), पुनर्वास और अनधिकृत कॉलोनियां थीं, वहां अब ‘डिब्बेनुमा’ आवास बना दिए गए हैं।

जाहिर है कि कानून का उल्लंघन किया गया, प्रशासन और सरकार सोये रहे, अधिकारियों की जेब और तिजौरियां भरती रहीं और ऐसे ‘हत्यारे बसेरे’ उभरते रहे। ‘सत्य निकेतन’ में ही, मई माह में, ऐसी ही त्रासदी हुई थी, जब एक कोचिंग संस्थान की इमारत ढह गई थी और कई मौतें हुई थीं। दिल्ली के संदर्भ में गौरतलब है कि वहां केंद्र सरकार, अद्र्धराज्य सरकार और नगर निगम में भाजपा ही सत्ता में है। अर्थात तीन इंजनों की सरकार! त्रासदियां लगातार हो रही हैं। सरकारें सिर्फ इतना बोलती हैं-‘किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।’ कितने दोषी पकड़े गए हैं? कितनों को लंबी सजा मिली है अथवा जुर्माना लिया गया है? माफिया तो जमानत लेकर खुले घूम रहे हैं। वक्त गुजरता है और उन त्रासदियों पर भी धूल, विस्मृति की मोटी चादर फैल जाती है। बीते तीन सालों में मुख्यत: 1132 त्रासद घटनाएं हुई हैं, जिनमें करीब 100 मौतें हुईं अथवा हत्याएं कर दी गईं! सिलसिला अब भी जारी है। इस बार उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, विवि, नगर निगम, पुलिस, अग्निशमन आदि सभी प्रमुख पक्षों को नोटिस भेज कर हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। अदालत ने खूब फटकार लगाई है और माना है कि ये त्रासदियां राजधानी में नियमित हो गई हैं। विडंबना और लापरवाही की इंतिहा है कि 2012 में सरकार ने ‘राजीव गांधी बालिका छात्रावास’ बनवाया था। तब केंद्र में कांग्रेस नेतृत्व की यूपीए सरकार थी। उसके बाद देश और दिल्ली की आबादी कई गुना बढ़ चुकी है, लेकिन मौजूदा मोदी सरकार ने 12 लंबे सालों में एक भी हॉस्टल बनवाने की जहमत नहीं उठाई है। कई राज्य स्तरीय विश्वविद्यालयों में 45-50 फीसदी छात्रों के लिए छात्रावास की व्यवस्था की गई है। वहां व्यवस्था की जा सकती है, तो देश की राजधानी में क्या दिक्कत है? सरकार राजधानी के विश्वविद्यालयों को अधिक सबसिडी मुहैया कराती है, फिर भी युवा बच्चे लगातार मर रहे हैं! देश भर के शैक्षणिक संस्थानों में पर्याप्त संख्या में हॉस्टलों का निर्माण होना चाहिए। इनमें रहने के लिए युवाओं से कम से कम शुल्क लिया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री की नई घोषणा है कि युवाओं को नि:शुल्क ऑनलाइन कोचिंग देकर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा।

Advertisement Carousel
Share.

chhattisgarhrajya.com

ADDRESS : GAYTRI NAGAR, NEAR ASHIRWAD HOSPITAL, DANGANIYA, RAIPUR (CG)
 
MOBILE : +91-9826237000
EMAIL : info@chhattisgarhrajya.com
November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30