उद्घाटन सत्र में नेताओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता लोगों पर केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता देने वाले नजरिए पर आधारित रही है, जिससे मजबूती, इनोवेशन, सहयोग और सस्टेनेबिलिटी को मुख्य प्राथमिकताएं माना गया है।
पीएम मोदी के संबोधन की खास बातें
- हम ब्रिक्स के 20 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। किसी व्यक्ति के जीवन में, 20 वर्ष परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए चरण की शुरुआत का प्रतीक हैं। यह एक ऐसा चरण है जब जिम्मेदारियां सपनों के साथ आती हैं। आज ब्रिक्स भी अपने विकास के चरण में है। पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
- हम एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हैं और आम सहमति से आगे बढ़ते हैं। हम किसी के खिलाफ नहीं हैं. बल्कि हम सबको साथ लेकर चलने की मानसिकता के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।
- आज, ग्लोबल साउथ वैश्विक संकटों का सामना करने में तो सबसे आगे है, लेकिन फ़ैसले लेने की प्रक्रिया में सबसे पीछे है। हमें विशेषाधिकार के पिरामिड को साझेदारी के मंच में बदलना होगा, एक ऐसा मंच जहां हर देश की आवाज सुनी जाए, हर सदस्य की भागीदारी हो, और हर कोशिश के केंद्र में मानवता का विकास हो।
- इसके लिए, मेरा प्रस्ताव है कि हम वैश्विक शासन में सुधार के लिए मिलकर 10 प्रस्ताव तैयार करें, ताकि अगले शिखर सम्मेलन तक उन्हें ‘ब्रिक्स सुधार रोडमैप’ का रूप दिया जा सके।
- इस रोडमैप को तैयार करते समय, हमें तीन प्रमुख पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा। प्रतिनिधित्व, जवाबदेही और नियम-निर्माण।
- प्रतिनिधित्व के संबंध में, मैं यह कहना चाहूंगा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार को अब और टाला नहीं जा सकता। इस मामले पर बातचीत एक निश्चित समय सीमा और स्पष्ट परिणामों से जुड़ी होनी चाहिए।
- इसी प्रकार, वित्तीय संस्थानों के भीतर मतदान शक्ति, नेतृत्व पद और नीतिगत प्राथमिकताएं आज की आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। वैश्विक आर्थिक विकास को गति देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका निभानी चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित इस BRICS समिट का संदेश स्पष्ट होना चाहिए। यदि हमारा भविष्य साझा है, तो उसके निर्माण का अधिकार भी साझा होना चाहिए। आवाज से प्रभाव तक, विशेषाधिकार से साझेदारी तक, यही BRICS 2026 का संकल्प हो।



















